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पेगासस जासूसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार, अदालती निगरानी में जांच की मांग की

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका. (File pic)

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका. (File pic)

Pegasus Spy Case: हाल ही में कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इजरायली स्‍पाईवेयर पेगासस के जरिये भारत के विपक्षी नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और पत्रकारों की जासूसी की गई है.

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    नई दिल्‍ली. पेगासस जासूसी मामले (Pegasus Spy Case) को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में तीसरी याचिका दाखिल की गई है. द हिंदू के पूर्व मुख्य संपादक एन राम और  एशियानेट के संस्थापक शशि कुमार (निदेशक एसीजे) की ओर से दाखिल की गई याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट की निगरानी में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में इसकी जांच की जाए.

    हाल ही में कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इजरायली स्‍पाईवेयर पेगासस के जरिये भारत के विपक्षी नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और पत्रकारों की जासूसी की गई है. याचिका में कहा गया है कि दुनिया भर के कई प्रमुख प्रकाशनों से जुड़ी जांच से पता चला है कि भारत में 142 से अधिक व्यक्तियों को इजरायली फर्म एनएसओ के पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके सर्विलांस के संभावित लक्ष्य के रूप में पहचाना गया था.

    याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट को सरकार को यह बताने का निर्देश देना चाहिए कि क्या उसने स्पाईवेयर के इस्‍तेमाल के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है या इसका इस्तेमाल ऐसे ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह की निगरानी के लिए किया है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्‍योरिटी लैब द्वारा संभावित लक्ष्य के रूप में सूचीबद्ध लोगों के कई मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में सुरक्षा उल्लंघनों की पुष्टि हुई है.

    वहीं निगरानी सॉफ्टवेयर पेगासस को लेकर विवादों के बीच इजरायल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप ने अपना बचाव करते हुए दावा किया है कि खुफिया और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने के कारण दुनिया में लाखों लोग रात में चैन की नींद सो पाते हैं और सुरक्षित हैं. भारत को सॉफ्टवेयर बेचे जाने की पुष्टि या खंडन किए बिना कंपनी ने कहा था कि उसके उत्पादों को सरकारी खुफिया और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस पर दिया जाता है, जिसका एकमात्र उद्देश्य आतंक और गंभीर अपराध को रोकना और जांच करना है.

    वहीं पेगासस विवाद को लेकर केंद्र के साथ टकराव के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को नेताओं, अधिकारियों और पत्रकारों की जासूसी के आरोपों की जांच करने के लिए दो सदस्यीय जांच आयोग की घोषणा की.

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