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1932 में जिस हवाई मार्ग से JRD टाटा ने मुंबई पहुंचाया था एयरमेल, उसी पर महिला पायलट ने उड़ाया विमान

1932 में जिस हवाई मार्ग से JRD टाटा ने मुंबई पहुंचाया था एयरमेल, उसी पर महिला पायलट ने उड़ाया विमान

कैप्‍टन आरोपी पंडित ने दोहराया इतिहास. (Pic- tata Power)

कैप्‍टन आरोपी पंडित ने दोहराया इतिहास. (Pic- tata Power)

जेआरडी टाटा (JRD Tata) ने 1932 में 15 अक्‍टूबर के दिन छोटे विमान से कराची (अब पाकिस्‍तान में) से बॉम्‍बे (अब मुंबई) के लिए उड़ान भरी थी. इसी के साथ भारत में कॉ‍मर्शियल फ्लाइट की शुरुआत हुई थी.

    नई दिल्‍ली. जेआरडी टाटा (JRD Tata) ने 1932 में 15 अक्‍टूबर के दिन छोटे विमान से कराची (अब पाकिस्‍तान में) से बॉम्‍बे (अब मुंबई) के लिए उड़ान भरी थी. वह अपने साथ एयरमेल (Airmail) लेकर बॉम्‍बे पहुंचे थे. इसी के साथ भारत में कॉ‍मर्शियल फ्लाइट (Commercial Flight) की शुरुआत हुई थी. अब इस घटना को 89 साल पूरे होने पर एक महिला पायलट ने उनकी इस ऐतिहासिक उड़ान को दोहराया है. टाटा पावर और इंडियन वीमेन पायलट एसोसिएशन (IWPA) की ओर से इस उड़ान का आयोजन किया गया था.

    कैप्‍टन आरोही पंडित (Arohi Pandit) नाम की महिला पायलट ने 15 अक्‍टूबर को गुजरात के भुज एयरपोर्ट से मुंबई के लिए उड़ान भरी. चूंकि अब कराची पाकिस्‍तान में है, इसलिए यह उड़ान भुज से भरी गई थी. कैप्‍टन आरोही पंडित ने साइनस 912 पिपिस्‍ट्रेल विमान से यह उड़ान पूरी की, जो उस समय की याद दिलाता है.

    भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र के जनक माने जोने वाले जेआरडी टाटा ने 15 अक्टूबर 1932 को कराची से बॉम्‍बे तक टाटा एअर सर्विसेज की पहली उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा किया था. उन्होंने सिंगल इंजन वाले डे हैविलैंड पुस मोथ विमान के जरिए एक डाक को लेकर उड़ान भरी थी.

    अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को लाइट स्पोर्ट एअरक्राफ्ट (एलएसए) के जरिए अकेले पार करने वाली विश्व की पहली महिला पायलट आरोही पंडित ने 1932 में जेआरडी टाटा द्वारा भरी गई देश की पहली व्यावसायिक उड़ान को दोहराया है.

    आरोही पंडित का कहना है कि 15 अक्टूबर को उन्‍होंने भुज रनवे से उड़ान भरी, जिसे 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान माधापर गांव की महिलाओं ने 72 घंटे में फिर से बना दिया था. आरोपी पंडित ने अहमदाबाद में विमान में ईंधन भरा और मुंबई के जुहू स्थित भारत के पहले नागरिक हवाई अड्डे पर उतरीं.

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    कैप्‍टन आरोपी पंडित ने दोहराया इतिहास. (Pic- tata Power)

    आरोपी पंडित ने कहा कि यह सामान्‍य फ्लाइट से पूरी तरह अलग है. इसमें बिना जीपीएस और बिना ऑटो पायलट के उड़ान भरना शारीरिक और मानसिक रूप से थकाने वाला काम है. उनका कहना है कि इस उड़ान के जरिये हम माधवपुर की उन महिलाओं को भी श्रद्धांजलि देनाा चाहते हैं, जिन्‍होंने 1971 की जंग में हिस्‍सो लिया था.

    आईडब्ल्यूपीए ने कहा है कि कैप्‍टन आरोपी पंडित ने ठीक जेआरडी टाटा की पहली उड़ान की तरह ही विमान क्षमताओं के साथ कच्छ से मुंबई के उसी हवाई मार्ग पर उड़ान भरी. आईडब्ल्यूपीए अध्यक्ष हरप्रीत एडे सिंह का कहना है कि जेआरडी टाटा के प्रति यह श्रद्धांजलि उड़ान आजादी का अमृत महोत्सव के तहत हमारे कार्यक्रमों की श्रृंखला का पहला कार्यक्रम है.

    आरोही पंडित 2019 में एलएसए के जरिए अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को पार करने वाली विश्व की पहली महिला पायलट बन गई थीं.

    Tags: Ratan tata

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