जस्टिस एनवी रमन्ना बोले- आलोचना के लिए जजों को बनाया जा रहा है सॉफ्ट टारगेट

जस्टिस एनवी रमन्ना बोले- आलोचना के लिए जजों को बनाया जा रहा है सॉफ्ट टारगेट
जस्टिस रमन्ना ने ये बातें सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस आर भानुमति की किताब ‘ज्यूडिशियरी, जज, एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस’ नामक पुस्तक के लोकार्पण समारोह में कही. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे (CJI SA Bobde) ने भी जस्टिस रमन्ना (Justice Ramanna) की टिप्पणियों का समर्थन किया. चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यायाधीशों के बोलने की स्वतंत्रता उन्हीं कानूनों द्वारा छीनी जाती है जिन कानूनों के तहत दूसरे लोगों को बोलने की स्वतंत्रता मिलती है.

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  • Last Updated: September 13, 2020, 7:14 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस एनवी रमन्ना ने शनिवार को न्यायाधीशों को आलोचना के लिए सॉफ्ट टारगेट बनाए जाने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई. रमन्ना ने कहा कि न्यायाधीशों को आत्मसंयम का पालन करना पड़ता है और खुद का बचाव करने का उनके पास कोई उपाय नहीं होता.

भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश बनने वाले जस्टिस रमन्ना ने कहा, 'चूंकि न्यायाधीश अपने बचाव में बोलने से खुद को रोकते हैं, उन्हें अब आलोचना के लिए सॉफ्ट टारगेट समझा जा रहा है. सोशल मीडिया और टेक्नॉलजी के प्रसार ने इस प्रवृत्ति को और जटिल कर दिया है.' उन्होंने कहा कि जजों को गपशप का पात्र बनाया जा रहा है. यह गलतफहमी है कि न्यायाधीश आराम का जीवन जीते हैं. यह सच नहीं है.

जस्टिस रमन्ना ने कहा कि न्यायाधीशों को स्वतंत्र होने के लिए अपने सामाजिक जीवन को संतुलित करना होता है. उन्होंने ये बातें सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस आर भानुमति की किताब ‘ज्यूडिशियरी, जज, एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस’ नामक पुस्तक के लोकार्पण समारोह में कही.



इस कार्यक्रम में मौजूद चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने भी जस्टिस रमन्ना की टिप्पणियों का समर्थन किया. चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यायाधीशों के बोलने की स्वतंत्रता उन्हीं कानूनों द्वारा छीनी जाती है जिन कानूनों के तहत दूसरे लोगों को बोलने की स्वतंत्रता मिलती है. इन्हीं का इस्तेमाल करते हुए न्यायपालिका और न्यायाधीशों की आलोचना की जाती है.
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जस्टिस बोबडे ने कहा, जिला अदालतों से लेकर ऊपरी अदालतों तक सभी न्यायाधीश एकसमान काम करते हैं. सभी न्याय करते हैं. यह आसान काम नहीं है. न्यायाधीशों को उन चीजों को करने के लिए कहा जाता है जो दूसरे करने से बचते हैं.
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