जूनियर डॉक्‍टरों का ममता के साथ मीटिंग से इनकार, बोले- वे खुद आएं

हड़ताल कर रहे डॉक्टर्स ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बिना शर्त माफी की मांग की है. अभी तक 150 के करीब डॉक्टर्स ने इस्तीफा दे दिया है.

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Updated: June 14, 2019, 11:01 PM IST
जूनियर डॉक्‍टरों का ममता के साथ मीटिंग से इनकार, बोले- वे खुद आएं
जूनियर डॉक्‍टरों ने ममता बनर्जी के साथ मीटिंग संबंधी निमंत्रण से किया इनकार. (हड़ताल कर रहे डॉक्‍टर फाइल फोटो)
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Updated: June 14, 2019, 11:01 PM IST
पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद शुरू हुई हड़ताल की आंच अब दिल्ली समेत बाकी राज्यों तक पहुंच गई. हड़ताल कर रहे डॉक्टर्स ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बिना शर्त माफी की मांग की है. वहीं ममता बनर्जी ने बात करने के लिए शनिवार को जूनियर डॉक्‍टरों को बुलाया था. हालांकि डॉक्‍टरों ने उनके साथ मीटिंग से इनकार कर दिया है.

इसपर जूनियर डॉक्‍टरों ने कहा, 'वह राज्‍य की संरक्षक हैं और उन्‍हें यहां आना चाहिए. हम बातचीत और इस समस्‍या का हल निकालने के लिए तैयार हैं. डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने के लिए ममता के सामने 6 शर्तें रखी हैं. वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी देशभर में हड़ताल का ऐलान कर दिया है. इसके तहत सोमवार 17 जून को देश के सभी अस्पताल बंद रहेंगे. हालांकि, इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी.



डॉक्टर्स ने रखीं ये 6 शर्तें
- डॉक्‍टरों ने पहली शर्त रखी है कि सीएम ममता बनर्जी को हमला करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का सबूत देना होगा.

- डॉक्टर्स ने दूसरी शर्त रखी है कि जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट के खिलाफ दर्ज किए गए झूठे केस और अन्य आरोपों को वापस लेना होगा.
- सीएम ममता बनर्जी को हॉस्पिटल आकर घायल डॉक्टरों से मिलना होगा. सीएम ऑफिस को इस हमले की निंदा करनी होगी.
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बिना शर्त पूरे मामले के लिए माफ़ी मांगनी होगी.
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- डॉक्टर अरिंदम दत्ता के मुताबिक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी होगी.
- डॉक्टरों ने सभी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में सुधार की भी मांग की, जिसमें सशस्त्र पुलिस कर्मियों की पोस्टिंग भी शामिल है.

अमित शाह को लिखा पत्र
वहीं, इंडियन मेडिकल कॉलेज ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग की है. आईएमए ने अपने पत्र में लिखा, 'देश भर में डॉक्टर्स के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़ गए हैं, हाल की घटना पश्चिम बंगाल की है, जहां डॉक्टर मुखर्जी पर हमला किया गया. उनकी हालत बेहद गंभीर है. इसलिए सभी को आजादी से काम करने की आजादी होनी चाहिए. हम किसी भी प्रकार की हिंसा का विरोध करते हैं, खास तौर पर मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े लोगों के खिलाफ.'

क्या था मामला?
दरअसल, 10 जन को नील रत्न सरकार (NRS) मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक 75 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी. इससे गुस्साए परिजनों ने डॉक्टर्स से बदसलूकी कर दी. डॉक्टरों का कहना है कि जब तक परिजन उसे माफी नहीं मांगते तब तक वो प्रमाण पत्र नहीं देंगे. इसके बाद इम मामले में हिंसा भड़क गई और कुछ लोगों ने हथियारों से हॉस्टल में हमला कर दिया. इसमें दो जूनियर डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कई और को भी चोटें आईं.

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