अयोध्या मामले में शाहरुख खान को मध्यस्थ बनाना चाहते थे पूर्व CJI बोबडे- बार एसोसिएशन चेयरमैन

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (PTI Photo)

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (PTI Photo)

जस्टिस शरद अरविंद बोबडे को नवंबर 2019 में देश के 47वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के रूप में शपथ दिलाई गई थी और वह शुक्रवार को सेवानिवृत्त गये.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2021, 7:25 AM IST
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नई दिल्ली. पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे (SA Bobde) चाहते थे कि अयोध्या भूमि विवाद (Ayodhya Land Dispute) के समाधान की मध्यस्थता प्रक्रिया का बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान भी हिस्सा हों. इस रोचक तथ्य का खुलासा पहली बार सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम सिंह ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के विदाई समारोह के मौके पर अपने संबोधन में किया.

अयोध्या विवाद के समाधान के लिये मध्यस्थता समिति का गठन मार्च 2019 में तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने किया था. जस्टिस बोबडे के प्रयास की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि अभिनेता भी इसके लिये सहमत थे लेकिन यह प्रक्रिया फलीभूत नहीं हो सकी.

उन्होंने कहा कि जस्टिस बोबडे जब अयोध्या मामले की सुनवाई के शुरुआती चरण में थे तब उनका यह दृढ़ मत था कि समस्या का समाधान मध्यस्थता के जरिये हो सकता है.

मध्यस्थता के प्रस्ताव पर शाहरुख खान ने क्या कहा था?
सिंह ने कहा, 'जहां तक अयोध्या विवाद की बात है, मैं आपको अपने और जस्टिस बोबडे का एक राज बताता हूं. जब वह सुनवाई के शुरुआती चरण में थे, उन्होंने मुझसे पूछा कि था कि क्या शाहरुख खान समिति का हिस्सा हो सकते हैं. उन्होंने मुझसे पूछा क्योंकि वह जानते थे कि मैं खान के परिवार को जानता हूं. मैंने खान से इस मामले पर चर्चा की और वह इसके लिये सहमत थे.'

सिंह ने कहा, 'खान ने यहां तक कहा कि मंदिर की नींव मुसलमानों द्वारा रखी जाए, और मस्जिद की नींव हिंदुओं द्वारा. लेकिन मध्यस्थता प्रक्रिया विफल हो गई और इसलिये यह योजना छोड़ दी गई. लेकिन सांप्रदायिक तनाव को मध्यस्थता के जरिये सुलझाने की उनकी इच्छा उल्लेखनीय थी.' मध्यस्थता समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला, ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू थे.

इससे पहले पूर्व CJI बोबडे ने शुक्रवार को कहा कि वह प्रसन्नता, सद्भाव और बहुत अच्छी यादों के साथ सुप्रीम कोर्ट से विदा ले रहे हैं और इस बात का संतोष है कि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ काम किया है.





जस्टिस बोबडे को नवंबर 2019 में देश के 47वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के रूप में शपथ दिलाई गई थी और वह शुक्रवार को सेवानिवृत्त गये. शीर्ष अदालत में अपने विदाई भाषण में उन्होंने कहा, ‘आखिरी दिन मिली-जुली अनुभूति होती है, जिसे बयां करना मुश्किल है. मैं इस तरह के समारोहों में पहले भी शामिल हुआ हूं लेकिन कभी ऐसी मिली-जुली अनुभूति नहीं हुई इसीलिए तब मैं अपनी बातें स्पष्ट तौर पर कह सका.’
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