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11 साल बाद मिला न्याय! UAPA के तहत गुजरात में गिरफ्तार हुआ युवक अपने घर श्रीनगर पहुंचा

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष स्पष्ट रूप से आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष स्पष्ट रूप से आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

Bashir Ahmad Baba Released: गुजरात एटीएस ने बाबा को आणंद से गिरफ्तार किया था. उनपर 2002 के दंगों (2002 Riots) के चलते नाराज मुस्लिम युवकों को हिजबुल मुजाहिदीन के लिए भर्ती करने के आरोप लगे थे.

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    गांधीनगर. गुजरात (Gujarat) में आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार हुए बशीर अहमद बाबा रिहा होकर 11 साल बाद अपने घर श्रीनगर पहुंचे. वडोदरा कोर्ट की तरफ से सुनाए गए फैसले में कहा गया है कि बाबा के ऊपर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके हैं. गुजरात एटीएस ने बाबा को साल 2010 में हिरासत में लिया था.

    बाबा के वकीलों ने अदालत को बताया था कि वे कैंसर मरीजों की देखभाल के लिए आयोजित चार दिवसीय कैंप में शामिल होने गुजरात आए थे. जानकारी दी गई थी कि वे इस कैंप में इसलिए शामिल हुए थे, ताकि घाटी लौटकर मरीजों को किमाया फाउंडेशन के जरिए सेवाएं दे सकें. 19 जून को कोर्ट ने बचाव पक्ष के इस तर्क को बरकरार रखा. बाबा बीती 23 जून को श्रीनगर के रैनावारी स्थित अपने घर पहुंचे.

    क्या था मामला
    गुजरात एटीएस ने बाबा को आणंद से गिरफ्तार किया था. उनपर 2002 के दंगों के चलते नाराज मुस्लिम युवकों को हिजबुल मुजाहिदीन के लिए भर्ती करने के आरोप लगे थे. पुलिस ने आरोप लगाया था कि बाबा हिजबुल के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और अहमद शेरा के साथ फोन और ई-मेल के जरिए संपर्क में है. उन्हें हॉस्टल से गिरफ्तार किया गया था.

    अदालत ने क्या कहा
    87 पन्नों के अपने फैसले में आणंद जिले के चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसए नकुम ने कहा, 'आरोपी के खिलाफ लगे आरोप कि वह गुजरात में रुका और आणंद में 13 मार्च को मिला और उसे गुजरात में आतंकी नेटवर्क स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद मिली है, यह पर्याप्त साबित नहीं हुए हैं. ना ही इस बात का कोई सबूत पेश किया गया है कि उसे इस तरह का कोई फायदा मिला था या वह टेरर मॉड्यूल स्थापित कर रहा था.'

    अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष स्पष्ट रूप से आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा है. बाबा के काउंसल खालिद शेख ने बताया कि एटीएस ने यह तर्क दिया था कि बाबा ने कैंप के डॉक्टर के लैपटॉप के इस्तेमाल से पाकिस्तान में हिजबुल के हैंडलर्स को ईमेल भेजे थे. शेख के मुताबिक, एटीएस ने यह भी कहा था कि बाबा को खाना या नमाज के नाम पर कई बार कैंप से निकलते और संदिग्ध फोन लगाते देखा गया था.

    क्या कहते हैं अहमद
    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बाबा ने कहा, 'मुझे पता था, मैं बेकसूर हूं और इसलिए मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी. मैं जानता था कि मुझे एक दिन सम्मान के साथ रिहा किया जाएगा.' जेल में रहने के दौरान उन्हें मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. बाबा कहते हैं कि इस बात का दुख हमेशा रहेगा कि उनके पिता उन्हें घर लौटता देखने के लिए जिंदा नहीं हैं. बाबा के पिता गुलाम नबी बाबा की साल 2017 में कैंसर से मौत हो गई थी.

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