जब तक रिया चक्रवर्ती को निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिलता तब तक न्याय असंभव: एमनेस्टी इंडिया

रिया चक्रवर्ती के मीडिया ट्रायल को लेकर एमनेस्टी इंडिया ने सवाल खड़े किये हैं. (File Photo)

Sushant Singh Rajput Death Case: सुशांत सिंह राजपूत की मौत के केस में रिया चक्रवर्ती को लेकर हुई मीडिया कवरेज पर एमनेस्टी इंडिया ने आपत्ति जताई है.

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    मुंबई. बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के मामले (Sushant Singh Rajput Death Case) में उनकी एक्स गर्लफ्रेंड और लिव-इन पार्टनर रहीं रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) पर मुख्यधारा मीडिया की संस्थाओं की कवरेज को लेकर एमनेस्टी इंडिया (Amnesty India) ने कड़ी आपत्ति जताई है. बता दें अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह की मौत से जुड़े ड्रग्स केस में आरोपी हैं और फिलहाल मुंबई की भयखला जेल में बंद हैं. मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था ने कहा कि रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार को मीडिया ने जिस तरह से अपमानित किया वह पूरी तरह से गलत है.

    एमनेस्टी इंडिया के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर अविनाश कुमार ने एक बयान जारी कर कहा कि "न्याय सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष ट्रायल का अधिकार सर्वोपरि है. इस अधिकार से इनकार करना अभियुक्त के लिए उतना ही अन्याय है जितना कि पीड़ित के लिए है. इस तरह से मीडिया चैनलों द्वारा रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के कुछ लोगों के इस अधिकार में बाधा डाली गई है. मीडिया एजेंसियों को निश्चित रूप से न्याय तंत्र को जवाबदेह बनाने में भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन वे निष्पक्ष और प्रभावी कानूनी प्रक्रिया के विकल्प नहीं हैं."

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    'निष्पक्ष ट्रायल संवैधानिक अधिकार'
    बयान में आगे कहा गया कि "एक निष्पक्ष ट्रायल का अधिकार, जो भारत का संविधान और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय नियमों (ICCPR) द्वारा गारंटीकृत है, जिसके लिए भारत एक राज्य पार्टी है, इसमें दोषी साबित होने तक निर्दोष होने का अधिकार शामिल है. ICCPR, कन्वेंशन ऑन एलिमिनेशन ऑफ ऑल फॉर्म्स ऑफ डिस्क्रिमिनेशन विद वूमन (CEDAW) किसी ट्रायल के दौरान महिला की निजता, सुरक्षा और अन्य मानवाधिकारों की भी रक्षा करता है. जबकि मीडिया चैनल बोलने की स्वतंत्रता के अपने अधिकार के हकदार हैं, इस स्वतंत्रता को हर कीमत पर न्याय प्रशासन के साथ हस्तक्षेप से बचना चाहिए."

    बयान में कहा गया कि "पिछले दो महीनों में रिया चक्रवर्ती के बारे में भ्रामक टिप्पणियों, मीडिया के आर्टिकल और काल्पनिक जानकारी की बाढ़ जैसी आ गई. इस मामले के कवरेज ने बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित किया है जिसके परिणामस्वरूप ऑनलाइन हिंसा और रिया के खिलाफ दुर्व्यवहार के कई मामले सामने आए हैं. मीडिया कवरेज से उसके चरित्र और व्यवहार को लेकर शंका बढ़ाई और बदनामी की, जिसका कोई मतलब नहीं था. इन प्रथाओं को नजरअंदाज करने से और पीड़ितों को न्याय और आरोपी को निष्पक्ष न्याय मिलता है और लैंगिक समानता के प्रति हमारी प्रगति बाधित होती है."

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