तमाम विवादों के बीच जस्टिस जोसेफ ने ली शपथ, SC में अब कुल 25 जज

जस्टिस के एम जोसेफ  (फ़ाइल फोटो)
जस्टिस के एम जोसेफ (फ़ाइल फोटो)

इन तीन नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 25 हो गई है. हालांकि अब भी यहां छह पद खाली हैं.

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  • Last Updated: August 7, 2018, 1:22 PM IST
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मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों को शपथ दिलाई. अदालत कक्ष में आयोजित पारंपरिक समारोह में जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस के एम जोसेफ को पद की शपथ दिलाई गई.

शपथ ग्रहण समारोह सीजेआई के कोर्ट रूम में सुबह 10.30 बजे शुरू हुआ.  सबसे पहले जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने शपथ ली. इसके बाद सरन और फिर जोसेफ ने शपथ ली. यानी जस्टिस केएम जोसेफ इस खेप में सबसे जूनियर जज होंगे.

इन तीन नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 25 हो गई है. अभी भी यहां छह पद खाली हैं. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि देश की सबसे बड़ी अदालत में तीन महिला जज होंगी. ये तीनों जज हैं जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस आर बानुमति और जस्टिस इंदु मल्होत्रा.



जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने अस्सी के दशक के मध्य में एक वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज के पूर्व छात्रा इंदिरा बनर्जी को 2002 में हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था और पिछले साल ही उनकी नियुक्ति मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में हुई थी.
जस्टिस जोसेफ पर विवाद
आपको बता दें कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ को केंद्र ने तमाम विवादों के बाद सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की मंजूरी तो दे दी, लेकिन उनकी वरिष्ठता घटा दी गई. सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए तीन जजों की लिस्ट में जस्टिस जोसेफ का नाम तीसरे नंबर पर है. .

वरिष्ठता क्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज बंटे हुए हैं. कॉलेजियम में शामिल सुप्रीम कोर्ट के कई जज जहां केंद्र के इस कदम से नाराज हैं और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा से मुलाकात करने वाले हैं. वहीं, कुछ जजों का कहना है कि वरिष्ठता को लेकर कोई लिखित नियम नहीं है. ऐसे में इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केएम जोसेफ के अलावा जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस विनीत सरन को प्रमोट किया गया है. जस्टिस इंदिरा बनर्जी फरवरी 2002 में हाईकोर्ट की जज नियुक्त हुई थीं. जस्टिस विनीत सरण 14 फरवरी 2002 को अप्वॉइंट हुए थे.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जनवरी में जस्टिस जोसेफ का नाम केंद्र सरकार के पास भेजा था. उस वक्त सरकार ने उनका नाम यह कहकर वापस भेज दिया कि जस्टिस जोसेफ उतने सीनियर नहीं हैं. इसके बाद कॉलेजियम ने जुलाई में मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस विनीत सरण के साथ जस्टिस जोसेफ का नाम दोबारा सरकार को भेजा.

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