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अयोध्या फैसले की बेंच में शामिल जस्टिस अब्दुल नजीर को मिलेगी Z कैटेगरी की सुरक्षा

News18Hindi
Updated: November 18, 2019, 7:26 AM IST
अयोध्या फैसले की बेंच में शामिल जस्टिस अब्दुल नजीर को मिलेगी Z कैटेगरी की सुरक्षा
केंद्र सरकार ने जस्टिस एस अब्दुल नजीर को जेड प्लस सिक्योरिटी देने का आदेश दिया है.

गृह मंत्रालय (Ministry of Home affairs) ने सुरक्षा एजेंसियों से जस्टिस एस अब्दुल नजीर (Justice S Abdul Nazir) को पीएफआई (PFI) की ओर से मिली धमकी के बाद सीआरपीएफ (CRPF) और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह जस्टिस अब्दुल नजीर और उनके पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करें.

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  • Last Updated: November 18, 2019, 7:26 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जस्टिस एस अब्दुल नजीर (Justice S Abdul Nazir) और उनके परिवार को ज़ेड सिक्योरिटी (Z plus security) देने का फैसला किया है. जस्टिस नजीर सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच का हिस्सा थे जिसने हाल ही में अयोध्या को लेकर फैसला दिया है. उनको सुरक्षा देने का फैसला पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular front and India) की धमकी के बाद लिया गया है.

गृह मंत्रालय (Ministry of Home affairs) ने सुरक्षा एजेंसियों से जस्टिस अब्दुल नजीर को पीएफआई (PFI) की ओर से मिली धमकी की चेतावनी मिलने के बाद सीआरपीएफ (CRPF) और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह जस्टिस अब्दुल नजीर और उनके पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करें.

सुरक्षा में तैनात हुए सीआरपीएफ और पुलिस बल
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सुरक्षाबल और स्थानीय पुलिस इस आदेश का तत्काल पालन करते हुए जस्टिस अब्दुल नसीर और उनके परिवार को कर्नाटक (Karnataka) और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा मुहैया कराने के लिए तैनात कर दी गई है.

जस्टिस अब्दुल नजीर को कर्नाटक कोटे के साथ जे़ड सुरक्षा उनको बेंगलुरु (Bengaluru) , मेंगलुरु (Mangaluru) और राज्य के अन्य हिस्सों में दी जाएगी. साथ ही बेंगलुरु और मेंगलुरु में रह रहे उनके परिवार को भी यही सुरक्षा प्रदान की जाएगी.

जे़ड सुरक्षा कवर में पैरामिलिट्री और पुलिस एस्कॉर्ट के 22 जवान होते हैं.

राम मंदिर और तीन तलाक को लेकर दिया था फैसलासुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित स्थल पर एक न्यास द्वारा राममंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और यह भी कहा कि अयोध्या में एक मस्जिद के निर्माण के लिये वैकल्पिक पांच एकड़ जमीन भी आवंटित की जाए. पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल रहे.

अयोध्या के रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के अलावा अब्दुल नजीर सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच का भी हिस्सा रहे जिसने 2017 में ट्रिपल तलाक (Triple Talaq) को असंवैधानिक करार दिया था.

जस्टिस अब्दुल नजीर ने एसडीएम लॉ कॉलेज कोडियालबेल, मेंगलुरु से कानून की डिग्री हासिल की है. नजीर ने 18 फरवरी 1983 में बेंगलुरु में कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka Highcourt) में एक वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया. जस्टिस नजीर को मई 2003 में कर्नाटक हाईकोर्ट में ही अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया.

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First published: November 17, 2019, 7:23 PM IST
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