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देश के 47वें CJI होंगे जस्टिस बोबडे, पहले थे वकील फिर सुनाए ये बड़े फैसले...

भाषा
Updated: October 29, 2019, 6:38 PM IST
देश के 47वें CJI होंगे जस्टिस बोबडे, पहले थे वकील फिर सुनाए ये बड़े फैसले...
जस्टिस बोबडे ने आधार, अयोध्या समेत कई मामलों में की थी सुनवाई

जस्टिस बोबडे (Justice SA Bobde) उस तीन सदस्यीय पीठ के भी सदस्य थे जिसने 2015 में स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड (Aadhar) नहीं रखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को बुनियादी सेवाओं और सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता.

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नई दिल्ली. जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (Justice SA Bobde) देश के 47वें चीफ जस्टिस होंगे. बोबडे ने आधार प्रकरण सहित अनेक महत्वपूर्ण मामलों की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई की है. वह राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ के भी सदस्य हैं. जिसका फैसला 15 नवंबर तक आने की उम्मीद है.

महाराष्ट्र के वकीलों के परिवार के सदस्य न्यायमूर्ति बोबडे अगस्त 2017 में निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने वाली संविधान पीठ के भी सदस्य थे. निजता का सवाल आधार योजना की सुनवाई के दौरान उठा था और फिर इसे नौ सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया गया था.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी की थी. न्यायमूर्ति बोबडे भी इस संविधान पीठ के सदस्य हैं. सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश 63 वर्षीय न्यायमूर्ति बोबडे वर्तमान प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई का स्थान लेंगे जो 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. न्यायमूर्ति बोबडे 23 अप्रैल, 2021 तक देश के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे.

राष्ट्रपति कोविंद ने दी मंजूरी

कानून मंत्रालय ने मंगलवार को न्यायमूर्ति बोबडे की देश के नए प्रधान न्यायाधीश पद पर नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की. न्यायमूर्ति बोबडे करीब 17 महीने इस पद पर रहेंगे. इससे पहले, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के नए प्रधान न्यायाधीश पद पर न्यायमूर्ति बोबडे की नियुक्ति के पत्र पर हस्ताक्षर किए.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने स्थापित परपंरा के अनुरूप पिछले सप्ताह ही अपने उत्तराधिकारी के रूप में शीर्ष अदालत के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति बोबडे की नियुक्ति की सिफारिश केंद्र से की थी. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने वाली तीन सदस्यीय आंतरिक समिति की अध्यक्षता भी न्यायमूर्ति बोबडे ने ही की थी. इस समिति में दो महिला न्यायाधीश भी थीं. शीर्ष अदालत की एक पूर्व कर्मचारी ने यह आरोप लगाया था.

जस्टिस बोबडे ने आधार पर भी सुनवाई की थी

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आधार पर की थी सुनवाई
न्यायमूर्ति बोबडे उस तीन सदस्यीय पीठ के भी सदस्य थे जिसने 2015 में स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड नहीं रखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को बुनियादी सेवाओं और सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता .

न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कामकाज का संचालन करने वाली प्रशासकों की समिति को अपना काम खत्म करने का निर्देश दिया ताकि बीसीसीआई के संचालन के लिए नए सदस्यों का निर्वाचन हो सके. शीर्ष अदालत ने ही प्रशासकों की इस समिति की नियुक्ति की थी.

जस्टिस बोबडे का नागपुर में हुआ जन्म
नागपुर में 24 अप्रैल, 1956 को जन्मे न्यायमूर्ति बोबडे ने नागपुर विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक और फिर कानून की शिक्षा पूरी की. न्यायमूर्ति बोबडे ने 1978 में महाराष्ट्र बार काउंसिल में पंजीकरण कराने के बाद बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में वकालत शुरू की. वह 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए गए थे.

न्यायमूर्ति बोबडे की 29 मार्च 2000 को बंबई उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश पद पर नियुक्ति हुई. वह 16 अक्टूबर , 2012 को मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने और 12 अप्रैल 2013 को पदोन्नति देकर उन्हें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनाया गया.

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First published: October 29, 2019, 5:46 PM IST
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