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जस्टिस शरद अरविंद बोबडे बने 47वें प्रधान न्यायाधीश, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ

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Updated: November 18, 2019, 9:53 AM IST
जस्टिस शरद अरविंद बोबडे बने 47वें प्रधान न्यायाधीश, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ
जस्टिस एसए बोबडे देश के 47वें प्रधान न्यायाधीश हैं.

जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (Justice Sharad Arvind Bobde) सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली उस विशेष पीठ के हिस्सा थे, जिसने सालों से विवादित अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर ऐतिहासिक फैसला दिया है.

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  • Last Updated: November 18, 2019, 9:53 AM IST
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नई दिल्ली. जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (Justice Sharad Arvind Bobde) सोमवार को भारत के 47वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ले ली. उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. जस्टिस बोबडे (Justice Bobde) जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की जगह देश के नए सीजेआई होंगे.

जस्टिस बोबडे महाराष्ट्र के एक प्रख्यात वकीलों के परिवार से आते हैं. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे बोबडे को अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था.जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल 2021 तक देश के सीजेआई के रूप में कार्य करेंगे.

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जस्टिस बोबडे को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलाई शपथ.


जस्टिस बोबडे के पिता महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता

देश के नए चीफ जस्टिस बोबडे के पिता अरविंद श्रीनिवास बोबडे महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता थे. इसके अलावा उनके भाई भी एक वरिष्ठ वकील थे. उल्लेखनीय है कि जस्टिस बोबडे सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली उस विशेष पीठ के हिस्सा थे, जिसने सालों से विवादित अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर ऐतिहासिक फैसला दिया है.

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जस्टिस बोबडे, जस्टिस रंजन गोगोई की जगह लेंगे.


गौरतलब है कि जस्टिस गोगोई का सुप्रीम कोर्ट में कार्यकाल विख्यात रहा है. इस दौरान कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय दिया है. अयोध्या मामले के अलावा गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सबरीमाला मुद्दे से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को एक बड़ी पीठ को सौंपने का फैसला किया.
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जस्टिस बोबडे महाराष्ट्र के एक प्रख्यात वकीलों के परिवार से आते हैं.


साथ ही राफेल मुद्दा, चौकीदार चोर और सीजेआई के ऑफिस को सूचना के अधिकार में लाना जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी जस्टिस गोगोई के कार्यकाल के दौरान दिए गए. गौरतलब है कि पहले भारत के चीफ जस्टिस के ऑफिस को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कवर किया गया था. जस्टिस गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने सरकार से सरकारी सौदे के तहत फ्रांस से राफेल जेट खरीदने के केंद्र के फैसले को गलत नहीं माना है.

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First published: November 18, 2019, 9:33 AM IST
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