ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाला नागरिक उड्डयन मंत्रालय का पदभार, पिता माधवराव ने भी 30 साल पहले निभाई थी यही जिम्मेदारी

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार संभाला. (फोटो: News18 English)

Jyotiraditya Scindia Takes Charge: ज्योतिरादित्य के पिता दिवंगत माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) भी पीवी नरसिम्हा राव की कैबिनेट में शामिल थे. 1991 से 1993 के दौरान उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय संभाला.

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    नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) के विस्तार के दौरान कैबिनेट में शामिल किए गए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) का कार्यभार संभाला. बीते बुधवार को ही उन्होंने राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी. इस मंत्रालय में उन्हें जनरल वीके सिंह का भी साथ मिलेगा. सिंह ने भी नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री के रूप में नई पारी की शुरुआत कर दी है. हालांकि, इससे पहले भी सिंधिया UPA सरकार में संचार, वाणिज्य और उद्योग तथा बिजली राज्य मंत्री के तौर पर कार्य कर चुके हैं.

    कोविड दौर में आ सकती हैं कई परेशानियां
    भाषा के अनुसार, सिंधिया ने ऐसे समय में मंत्रालय का कार्यभार संभाला है, जब नागरिक उड्डयन क्षेत्र को कोरोना वायरस महामारी के कारण मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है. इस क्षेत्र में मांग काफी अधिक प्रभावित हुई है और इसके चलते विमानन कंपनियों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है. सरकार राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ा रही है.

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    पिता भी संभाल चुके हैं यही मंत्रालय
    ज्योतिरादित्य के पिता दिवंगत माधवराव सिंधिया भी पीवी नरसिम्हा राव की कैबिनेट में शामिल थे. 1991 से 1993 के दौरान उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय संभाला था. कार्यकाल के दौरान दिवंगत माधवराव ने उदारीकरण की चुनौतियों का सामना किया था, तो अब ज्योतिरादित्य के सामने भी कोविड जैसी बड़ी परेशानी खड़ी है. महामारी के दौरान एविएशन सेक्टर खासा प्रभावित हुआ है.

    खास बात यह है कि दोनों नेता नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभालने से पहले भी केंद्रीय मंत्री का दायित्व निभा चुके हैं. माधवराव ने राजीव गांधी सरकार में रेल मंत्री के तौर पर काम किया. जबकि, ज्योतिरादित्य मनमोहन सिंह की सरकार में कम्युनिकेशन और आईटी मंत्री थे. मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता वापसी कराने में ज्योतिरादित्य ने अहम भूमिका निभाई थी. कांग्रेस से अलग होने के चलते कमलनाथ को मुख्यमंत्री की गद्दी गंवानी पड़ी थी.

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