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हिंदू हितों की वकालत करने वाले कपिल मिश्रा एमनेस्टी इंटरनेशनल और ग्रीनपीस में कर चुके हैं काम

Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: February 27, 2020, 12:05 AM IST
हिंदू हितों की वकालत करने वाले कपिल मिश्रा एमनेस्टी इंटरनेशनल और ग्रीनपीस में कर चुके हैं काम
कपिल मिश्रा आम आदमी पार्टी से 2019 में बीजेपी में आए थे (News18 क्रिएटिव)

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के लिए एफआईआर दर्ज करनी चाहिए.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 12:05 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi high Court) ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली (North-East Delhi) में हुई हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर बेहत सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के लिए एफआईआर दर्ज करनी चाहिए. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों से भी पूछा कि उन्होंने एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की. लेकिन यह पहली बार नहीं है कि कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) के किसी बयान को लेकर किसी संवैधानिक संस्था की ओर से कड़ा रुख अपनाया गया हो.

इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी (National Capital) में एक 'छोटा पाकिस्तान' बनने को लेकर जनवरी में किए गए कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) के एक ट्वीट (Tweet) के चलते चुनाव आयोग (Election Capital) ने उन पर 48 घंटे का बैन लगा दिया था.

कौन हैं कपिल मिश्रा?
कपिल मिश्रा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता हैं. 39 साल के मिश्रा आम आदमी पार्टी (AAP) से बीजेपी में आए थे. कपिल मिश्रा की आप से कड़वाहट भरी विदाई तब हुई थी, जब उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. मिश्रा को अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट से मई, 2017 में हटा दिया गया था. इसके बाद अगस्त, 2019 में उन्हें आप विधायक के तौर पर भी अयोग्य घोषित कर दिया गया था. इसके बाद अगस्त, 2019 में ही कपिल मिश्रा ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी.



इसके बाद बीजेपी ने कपिल मिश्रा को उत्तरी दिल्ली (North Delhi) की मॉडल टाउन विधानसभा सीट से उनके पुराने साथी और दो बार आप विधायक रह चुके अखिलेश पति त्रिपाठी के खिलाफ उतारा था. चुनावों से पहले पर्चा दाखिल करते हुए दिए हलफनामे के मुताबिक कपिल मिश्रा की कुल संपत्ति करीब 60 लाख के करीब है और उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है. विधानसभा चुनावों के दौरान कपिल मिश्रा तथाकथित सांप्रदायिक और भड़काऊ बयानबाजी के चलते कई बार चर्चा में आए. हालांकि दिल्ली विधानसभा चुनाव, 2020 में कपिल मिश्रा जीत हासिल नहीं कर सके थे.

हाईकोर्ट ने किस बयान पर FIR दर्ज करने की बात कही?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कपिल मिश्रा के जिस बयान पर FIR दर्ज करने की बात कही, वह उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा से एक दिन पहले दिया था. उन्होंने दिल्ली में हिंसा भड़कने से एक दिन पहले कहा था, 'ये यही चाहते हैं कि दिल्ली में आग लगी रहे. इसीलिए इन्होंने रास्ते बंद किए और इसीलिए ये दंगे जैसा माहौल बना रहे हैं. हमारी तरफ से एक भी पत्थर नहीं चला है. डीसीपी साहब, आप सबके सामने खड़े हैं. मैं आप सबकी ओर से ये बात कह रहा हूं कि ट्रंप के जाने तक तो हम शांति से जा रहे हैं. लेकिन उसके बाद हम आपकी भी नहीं सुनेंगे अगर रास्ते खाली नहीं हुए तो. ठीक है?”

दरअसल, दिल्ली के जाफराबाद में मेट्रो स्टेशन के नीचे 22 और 23 फरवरी की आधी रात में सीएए के खिलाफ महिलाएं धरने पर बैठ गईं और सड़क जाम कर दी. इसके चलते मौजपुर और यमुना विहार जाने वाला रास्ता बंद हो गया. इसके बाद कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) ने ट्वीट भी किया था कि 'जाफराबाद के जवाब में' सड़क पर उतरना जरूरी हो गया है.

जिसके बाद रविवार दोपहर बाद कपिल मिश्रा अपने समर्थकों के साथ मौजपुर चौक की रेड लाइट पर पहुंचे और CAA के समर्थन में धरने पर बैठ गए थे. मौके पर पुलिस बल पहुंचा तो कपिल मिश्रा ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था. कपिल मिश्रा ने कहा था, “ट्रंप के जाने तक आप (डीसीपी) जाफराबाद और चांद बाग खाली करा लीजिए, ऐसी आपसे विनती कर रहे हैं, उसके बाद हमें रोड पर आना पड़ेगा. भारत माता की जय. वंदे मातरम्.” इसी के बाद दिल्ली में जाफराबाद समेत कई जगह हिंसा भड़क गई थी.

अपने इन विवादित बयानों के चलते पहले भी घिर चुके हैं कपिल मिश्रा


लेफ्ट लिबरल, सेक्युलर और हिंदू राष्ट्रवादी सभी कुछ रह चुके हैं कपिल
द वायर की एक प्रोफाइल के मुताबिक कपिल मिश्रा एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) और ग्रीनपीस (Greenpeace) में भी काम कर चुके हैं. यहां तक कि AAP नेता के तौर पर उन्होंने एक बार पीएम मोदी को ISI का एजेंट भी बता दिया था. कपिल मिश्रा ने 5 अप्रैल, 2016 में अपने एक ट्वीट में लिखा था, "क्या एक ISI एजेंट अब हमारा प्रधानमंत्री है? यह बहुत गंभीर है, जिस तरह से प्रधानमंत्री भारत विरोधी ताकतों के सामने समर्पण कर रहे हैं."

बता दें कि एमनेस्टी इंटरनेशनल के खिलाफ 2016 में एक मामले में देशद्रोह का मुकदमा हो चुका है.

फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वे अभी तक एक लेफ्ट-लिबरल एक्टिविस्ट (Left Liberal Activist), एक 'सेक्युलर' आप एक्टिविस्ट और एक दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी बीजेपी एक्टिविस्ट तीनों रह चुके हैं. हाल ही में AAP के विरोधी नेताओं को पाकिस्तान का प्रतिनिधि बताते हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों को उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच एक मुकाबला बताया था.

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First published: February 26, 2020, 7:57 PM IST
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