SC में तीन तलाक का बचाव कर कांग्रेस की 'शर्मिंदगी' की वजह बने सिब्बल

SC में तीन तलाक का बचाव कर कांग्रेस की 'शर्मिंदगी' की वजह बने सिब्बल
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की तरफ से ट्रिपल तलाक का बचाव कर रहे हैं.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की तरफ से ट्रिपल तलाक का बचाव कर रहे हैं.

  • News18.com
  • Last Updated: May 17, 2017, 8:33 PM IST
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की तरफ से ट्रिपल तलाक का बचाव कर रहे हैं. पार्टी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सिब्बल का यह कदम कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गया है.

सिब्बल राज्यसभा सांसद हैं, सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक के पक्ष में उन्होंने दलील दी कि यह सदियों पुरानी परंपरा है और इसलिए इसे असंवैधानिक नहीं कहना चाहिए. सिब्बल की इस दलील के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.

पार्टी से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि कपिल सिब्बल द्वारा AIMPLB के पक्ष का बचाव करने से पार्टी के वरिष्ठ नेता नाखुश हैं, क्योंकि इस मामले पर पार्टी का मत एआईएमपीएलबी से एकदम अलग है. सूत्रों ने बताया कि सिब्बल का पक्ष कांग्रेस के लिए शर्मिंदा करने वाला था, सिब्बल का पक्ष ऐसे वक्त में सामने आया जब पार्टी खुद पर लगे मुस्लिम अपीसमेंट के टैग को मिटाने की कोशिश कर रही है.



इस सूत्र ने बताया कि कांग्रेस ने हमेशा कहा है कि ट्रिपल तलाक का मुद्दा महिलाओं के मूलभूत अधिकार से जुड़ा है. ऐसे में सिब्बल द्वारा इसका बचाव करना कांग्रेस की छवि खराब करता है. उन्होंने बताया कि पार्टी हाईकमान ने अभी तक केस छोड़ने के लिए सिब्बल से संपर्क नहीं किया है, हालांकि वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सिब्बल द्वारा इसका बचाव करने से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है.
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यह पहली बार नहीं है जब किसी कांग्रेसी नेता ने किसी मुद्दे पर पार्टी के मत या पॉलिसी के विपरीत काम किया है. साल 2010 में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने केरल में लॉटरी चलाने वालों के पक्ष में केस लड़ा था. इस पर केरल कांग्रेस ने नाराजगी जताई थी क्योंकि वहां कांग्रेस लॉटरी माफिया के खिलाफ अपने स्टैंड के आधार पर चुनाव लड़ रही थी. बाद में सिंघवी ने वह केस छोड़ दिया था. सिंघवी ने कर्नाटक सरकार की अकरामा सकरामा योजना के खिलाफ राजीव चंद्रशेखर के लिए भी केस लड़ा था. इस स्कीम के तहत राज्य में असंवैधानिक निर्माण को रेगुलराइज किया गया था.

सिब्बल ने इससे पहले भी पार्टी की मान्यता के खिलाफ केस लड़े हैं. इस साल कि शुरुआत में उन्होंने शारदा घोटाले में त्रिणमूल कांग्रेस का बचाव किया था. इसी समय कांग्रेस ने बंगाल चुनाव के लिए लेफ्ट के साथ गठबंधन किया था. कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह सिब्बल को केस से हटने के लिए मनाएं.

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एक सूत्र ने बताया कि सिब्बल ने केस छोड़ने से मना कर दिया था, उन्होंने पार्टी से कहा कि वह केस नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा था कि वह एक वकील हैं उन्हें अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारियां भी निभानी हैं. इसके बाद बंगाल कांग्रेस ने सिब्बल को बायकॉट करने और अपने किसी आयोजन में शामिल नहीं होने देने की धमकी दी थी.

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि एक तरफ वकीलों की हमारी टीम हमें नेशनल हेराल्ड जैसे मामले लड़ने में मदद करती है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के मूलभूत अधिकार के खिलाफ लड़कर पार्टी को शर्मिंदा करते हैं.

वैसे कांग्रेस ही नहीं, भाजपा के नेता भी अपनी पार्टी के लिए शर्मिंदगी की वजह बन चुके हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान राम जेठमलानी ने 2जी स्कैम मामले में कनिमोझी की तरफ से केस लड़ा था, जबकि उनकी पार्टी ने इस चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाया था. बाद में जेठमलानी ने पार्टी ही छोड़ दी.

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