कपिल सिब्बल का तंज, न्यायपालिका और खुद की ईमानदारी से समझौते के लिए याद किए जांएगे गोगोई

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, पीएम मोदी के राहत पैकेज पर भी उठा चुके हैं सवाल.
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, पीएम मोदी के राहत पैकेज पर भी उठा चुके हैं सवाल.

केंद्र सरकार की ओर से सोमवार देर शाम जारी किए गए नोटिफिकेशन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ने पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को राज्यसभा के लिए मनोनित किया है.

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  • Last Updated: March 17, 2020, 10:47 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को राज्यसभा के लिए नामित किए जाने को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने दावा किया है कि गोगोई न्यायपालिका और खुद की ईमानदारी से समझौता करने के लिए याद किए जाएंगे.

सिब्बल ने ट्वीट किया, 'न्यायमूर्ति एच आर खन्ना अपनी ईमानदारी, सरकार के सामने खड़े होने और कानून का शासन बरकरार रखने के लिए याद किए जाते हैं.' उन्होंने दावा किया कि न्यायमूर्ति गोगोई राज्यसभा जाने की खातिर सरकार के साथ खड़े होने और सरकार एवं खुद की ईमानदारी के साथ समझौता करने के लिए याद किए जाएंगे.


गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से सोमवार देर शाम जारी किए गए नोटिफिकेशन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व सीजेआई को राज्यसभा के लिए मनोनित किया है. गोगोई ने अयोध्या राम मंदिर समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला सुनाया था. पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई का कार्यकाल 13 महीने रहा था. वह 3 अक्टूबर 2018 को भारत के 46वें चीफ जस्टिस बने थे. गोगोई 17 नवंबर 2019 को रिटायर हुए थे. उन्होंने पिछले साल 9 नवंबर को राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.



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पूर्व चीफ जस्टिस के कामकाज के तरीके पर उठाए थे सवाल
सीजेआई गोगोई उन चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्होंने जनवरी 2018 में संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे. न्यायमूर्ति गोगोई और शीर्ष न्यायालय के तीन अन्य न्यायाधीशों न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने 12 जनवरी 2018 को अभूतपूर्व कदम उठाते हुये संवाददाता सम्मेलन कर आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन और मुकदमों का आवंटन सही तरीके से नहीं हो रहा.सीजेआई के पद पर न्यायमूर्ति गोगोई का कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रहा. उन्हें यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना भी करना पड़ा था. हालांकि, वह इसमें पाक-साफ करार दिए गए. जस्‍टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय एक आंतरिक जांच समिति ने उन्हें इस मामले में 'क्लीन चिट' दे दी थी.

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