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कर्नाटकः मंत्रालय बंटवारे के बाद कांग्रेस-JDS खेमों में बढ़ी नाराजगी!

कर्नाटकः मंत्रालय बंटवारे के बाद कांग्रेस-JDS खेमों में बढ़ी नाराजगी!

कर्नाटक सरकार में  मंत्रियों के शपथग्रहण के बाद की फाइल फोटो -PTI

कर्नाटक सरकार में मंत्रियों के शपथग्रहण के बाद की फाइल फोटो -PTI

करीब 15-20 विधायक जो मंत्री नहीं बन पाएं हैं, उन्होंने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विधायकों ने कहा है कि तय सीमा के भीतर मामले सुलझाएं जाएं. पोर्टफोलियो के आवंटन के चलते पार्टी के लिए मुसीबत और बढ़ गई है.

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के सामने नई समस्या आ गई है. वास्तव में पोर्टफोलियो का बंटवारा होने के बाद कांग्रेस और जेडीएस खेमों में नाराजगी बढ़ गई है. कई मंत्री अपने विभाग से खुश नहीं हैं. वो खुले तौर पर गौड़ा परिवार और कांग्रेस हाई कमान पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री के पास दर्जन भर अन्य मंत्रालयों के साथ-साथ दो प्रमुख मंत्रालय, वित्त और उर्जा भी हैं. कांग्रेस और जेडीएस के कुछ नेताओं ने कुमारस्वामी के भाई रेवन्ना को दो पोर्टफोलियो देने पर विरोध जताया था जिसके बाद उन्हें सिर्फ पीडब्ल्यूडी पोर्टफोलियो दिया गया था. मांड्या से जेडीएस विधायक सीएस पुट्टाराजू इसलिए कुमारस्वामी से खफा हैं क्योंकि उनको माइन इरिगेशन का मंत्रालय दिया गया है.

गौड़ा के करीबी रिश्तेदार डीसी थमान्ना भी इसी जिले हैं और उन्हें ट्रांसपोर्ट पोर्टफोलियो दिया गया है. पुट्टाराजू के समर्थक उनसे कह रहे हैं कि वह अब काम न संभालें. कुछ ऐसी ही स्थिति कांग्रेस के खेमे में भी है. करीब 15-20 विधायक ऐसे हैं जो मंत्री नहीं बन पाए हैं, उन्होंने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

विधायकों ने कहा है कि तय सीमा के भीतर मामले सुलझाएं जाएं. पोर्टफोलियो के आवंटन के चलते पार्टी के लिए मुसीबत और बढ़ गई है. दो वरिष्ठ विधायक आरवी देशपांडे और केजे जॉर्ज को फायदेमंद मंत्रालय दिए गए हैं.  देशपांडे को रेवेन्यू और जॉर्ज को इंडस्ट्रीज, कॉमर्स, आईटी और बीटी पोर्टफोलियो दिया गया है.

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कृष्ण बैरे गौड़ा को को प्रतिष्ठित ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कानून और संसदीय मामलों सहित लगभग आधा दर्जन मंत्रालय दिए गए हैं.  मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे को सामाजिक कल्याण पोर्टफोलियो मिला है. पूरे उडुपी-मंगलौर क्षेत्र से जीतने वाले एकमात्र कांग्रेस उम्मीदवार यूटी खादर को शहरी विकास पोर्टफोलियो मिला है.  उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर को गृह और बेंगलुरु विकास का पोर्टफोलियो मिला है.

पोर्टफोलियो बांटे जाने में विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब वरिष्ठ लोगों ने मांग की कि उन्हें बेंगलुरु विकास पोर्टफोलियो से निकाल दिया गया है. कांग्रेस के संकट मोचक डीके शिवकुमार को जल संसाधन और मेडिकल एजुकेशन का पोर्टफोलियो मिला है. स्वतंत्र विधायक आर शंकर को फॉरेस्ट इकोलॉजी और  एन्वायरमेंट पोर्टफोलियो मिला है.

शिवानंद पाटिल को लेबर पोर्टफोलियो दिया गया है. जेडीएस के अनुभवी नेता जीटी देवगौड़ा को शिक्षा विभाग दिया गया है, लेकिन वह बिजली और पीडब्ल्यूडी  न मिलने से नाराज हैं.  कुमारस्वामी के वफादार और बीदर से बांदेपा कशेमपुर को सहकारिता मंत्रालय दिया गया है. फिल्म अभिनेत्री जयमाला को महिला, बाल विकास, कन्नड़ और संस्कृति मंत्रालय देने के चलते कांग्रेस की 4 महिला विधायक नाराज हैं.

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कांग्रेस के निष्ठावान समर्थक और कोलार से सात बार के सांसद केएच मुनियप्पा अपनी बेटी रूपा शशिधर को कैबिनेट में शामिल न किए जाने पर नाराज हैं. कोलार गोल्ड फील्ड से शशिधर ने 41,000 वोटों से जीत हासिल की थी. हालांकि, मुनियप्पा ने प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया और कहा कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और पब्लिक में राय नहीं देंगे. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इससे नाखुश हैं और हाई कमांड की ओर से आग्रह  के चलते सहमति बनाने का फैसला किया है.  यदि जेडी (एस) -कांग्रेस गठबंधन जल्द ही लोगों को मना नहीं सका तो घायल बीजेपी को फिर से मौका मिल सकता है.

Tags: Assembly Elections 2018, Congress, Election commission, HD Deve Gowda, HD Kumarswami, Karnataka, Karnataka Election 2018, Rahul gandhi

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