येडियुरप्पा के सामने सरकार बचाने की चुनौती, मंत्रीपद नहीं मिलने से सीनियर नेताओं में नाराज़गी

कर्नाटक (Karnatak BJP Governmet) के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने सीनियर नेताओं को दरकिनार कर विभागों का बंटवारा किया. जिन विधायकों को मंत्रीपद या कोई विभाग नहीं दिया गया, उनकी नाराज़गी सामने आने लगी है.

News18Hindi
Updated: August 27, 2019, 10:03 AM IST
येडियुरप्पा के सामने सरकार बचाने की चुनौती, मंत्रीपद नहीं मिलने से सीनियर नेताओं में नाराज़गी
येडियुरप्पा के सामने सरकार बचाने की बड़ी चुनौती है.
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Updated: August 27, 2019, 10:03 AM IST
(स्टेसी परेरा/दीपा बालाकृष्णन)

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार (Congress-JDS) गिरने के बाद बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने सरकार तो बना ली, लेकिन इस सरकार को बचाने के लिए अब तक जूझ रहे हैं. दरअसल, मंत्रीपद नहीं मिलने से कई विधायकों में असंतोष है. ऐसे में मजबूरन येडियुरप्पा को एक नहीं, बल्कि तीन डिप्टी सीएम बनाने पड़े. येडियुरप्पा ने लक्ष्मण सावदी, गोविंद एम करजोल और अश्वथ नारायण को डिप्टी सीएम बनाया है. येडियुरप्पा ने तीन डिप्टी सीएम समेत 17 नए मंत्रियों को विभाग भी सौंप दिए हैं. जिन विधायकों को मंत्रीपद नहीं दिया गया, उनकी नाराज़गी भी सामने आने लगी है. ऐसे में येडियुरप्पा के सामने सरकार बचाने की बड़ी चुनौती है.

येदियुरप्पा कैबिनेट में लिंगायत समुदाय से 7, ओबीसी से 2, ब्राह्मण समाज से एक, वोक्कालिगा समुदाय से 3 और एससी-एसटी समुदाय से 4 लोगों को मंत्री बनाया गया है. मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं. उन्हें लेकर सरकार में 8 लोग लिंगायत समुदाय से हो गए हैं. मंत्रीपद नहीं मिलने पर वोक्कलिगा नेता और चिकमगलुर से विधायक सीटी रवि ने कई ट्वीट्स किए और पार्टी के प्रति अपनी नाराज़गी जाहिर की.

बीजेपी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में केएस ईश्वरप्पा और आर. अशोक डिप्टी सीएम रह चुके थे, लेकिन इस बार उन्हें डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया. ईश्वरप्पा को ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग दिया गया है, जबकि आर. अशोक राजस्व विभाग संभालेंगे.


ईश्वरप्पा को डिप्टी सीएम नहीं बनाने से समर्थकों में नाराजगी
ईश्वरप्पा के समर्थक उन्हें डिप्टी सीएम नहीं बनाए जाने से खासे नाराज हैं. उनका कहना है कि ये उनके नेता का 'अपमान' है. ईश्वरप्पा के समर्थकों ने इशारों-इशारों में येडियुरप्पा सरकार को इसकी कीमत चुकाने की चेतावनी भी दी है. वहीं, सीटी रवि के समर्थक अपने नेता को दरकिनार कर अश्वथ नारायण को डिप्टी सीएम बनाए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं.

चार बार के विधायक सीटी रवि ने CNN-News18 को बताया कि उन्होंने कभी कोई पोर्टफोलियो की मांग नहीं रखी थी. लेकिन, उन्हें टूरिज्म मिनिस्ट्री के साथ साथ कन्नड़ और कल्चर विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है. रवि आगे बताते हैं, 'मैंने कभी कोई मंत्रीपद नहीं मांगा. मैं पार्टी के साथ और पार्टी के लिए काम करना चाहता हूं. जब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष शपथ ले लेंगे, तब मैं उनके साथ अपनी बात रखूंगा.' बता दें कि येडियुरप्पा के सीएम बनने के बाद बीजेपी ने अब नलिन कुमार कटील को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.
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सीटी रवि ने ट्विटर पर जाहिर की नाराज़गी
हालांकि, सोमवार देर रात किए गए ट्वीट्स में सीटी रवि ने अपनी नाराज़गी भी जाहिर की. उन्होंने ट्वीट किया- 'न तो मैं असंतुष्ट हूं और न ही बागी. मेरी वफादारी सिर्फ बीजेपी के प्रति है. लेकिन मैं अपने सिद्धांतों के प्रति भी उतना ही वफादार और प्रतिबद्ध हूं. अगर मेरा अभिमान आहत होगा, तो मेरे अंदर का योद्धा बाहर आएगा और चीजों का सामना करेगा.'







कर्नाटक सरकार के पोर्टफोलियो बांटने को लेकर सिर्फ बीजेपी नेताओं में ही नाराज़गी नहीं है, बल्कि जेडीएस-कांग्रेस विधायक भी खासे नाखुश हैं. इस बीच मोलकलमुरु विधायक और दलित नेता बी. श्रीरामालु को लेकर सोशल मीडिया पर कैंपेन भी चलाया जा रहा है. समर्थकों का कहना है कि श्रीरामालु दलित समुदाय के जाने-माने नेता हैं, लिहाजा उन्हें डिप्टी सीएम पद मिलना चाहिए. बहरहाल बीजेपी सरकार इन असंतुष्ट विधायकों को संतुष्ट करने के उपाय खोज रही है. ताकि, सरकार को सुचारू रूप से चलाया जा सके.

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First published: August 27, 2019, 9:12 AM IST
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