कर्नाटक: बहुमत परीक्षण से बागी विधायकों को कुछ इस तरह घेरने की कोशिश में हैं कुमारस्वामी

कर्नाटक में बिगड़े सियासी समीकरण पर अपनी पैठ जमाने के लिए मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने विधानसभा में बहुमत परीक्षण की इजाजत मांगी है.

News18Hindi
Updated: July 13, 2019, 2:04 PM IST
कर्नाटक: बहुमत परीक्षण से बागी विधायकों को कुछ इस तरह घेरने की कोशिश में हैं कुमारस्वामी
कर्नाटक : बहुमत परीक्षण से बागी विधायकों को इस तरह सबक सिखाना चाहते हैं कुमारस्वामी
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Updated: July 13, 2019, 2:04 PM IST
कर्नाटक में बिगड़े सियासी समीकरण पर अपनी पैठ जमाने के लिए मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने विधानसभा में बहुमत परीक्षण की इजाजत मांगी है. कुमारस्वामी बहुमत परीक्षण के जरिए बागी विधायकों को दल-बदल कानून के पेंच में फंसाना चाहते हैं. कुमारस्वामी को पता है कि अगर उनकी बात मानते हुए बहुमत परीक्षण की इजाजत दी गई तो भले ही कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को नुकसान हो लेकिन बीजेपी को भी कोई फायदा नहीं मिल सकेगा.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर इस बार विश्वास मत होता है तो उस पर चर्चा और मतदान विधानसभा की बाकी सभी गतिविधियों को किनारे रखकर प्राथमिकता से किए जाएंगे. कांग्रेस और जेडीएस की रणनीति है कि वह प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने के लिए सभी विधायकों को व्हिप जारी करें. इन विधायकों में वो विधायक भी शामिल होंगे, जिन्होंने इस्तीफे की पेशकश तो की है लेकिन अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है.



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ऐसे में अगर बागी विधायक व्हिप का उल्लंघन करते हैं तो विधायकों की सदस्यता पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और बागी कांग्रेस और जेडी(एस) विधायकों की संख्या उनकी पार्टियों की संख्या की दो-तिहाई से कम है. इसी के साथ अगर वोटिंग के दौरान विधायक सदन से गायब रहते हैं या प्रस्ताव के विरोध में वोट करते हैं तो उन पर सदस्यता खोने का खतरा भी बना रहेगा. इसके बाद भले ही सरकार बहुमत परीक्षण में फेल हो जाए, स्पीकर विधायकों की सदस्यता रद्द कर सकते हैं.

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बागी विधायक बीजेपी का भी नहीं दे सकेंगे साथ
अगर बागी विधायकों की सदस्यता खत्म कर दी जाती है तो ये सभी विधायक बीजेपी का भी साथ नहीं दे सकेंगे. ऐसे में अगर बीजेपी की सरकार बन भी जाती है तो ये विधायक उनका पक्ष नहीं ले सकेंगे. बता दें कि दल-बदल कानून और संविधान के अनुच्छेद 164(1बी) के तहत अगर एक विधायक की सदन से सदस्यता रद्द कर दी जाती तो है वह तब तक मंत्री नहीं बन सकेगा/सकेगी, जब तक वह दोबारा चुनाव लड़कर विधायक न बन जाए.
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