कर्नाटकः लॉकडाउन में स्कूल टीचर ने बच्चों को लिखा सुंदर सा पत्र, जानें पूरी कहानी

गीता टीचर ने बताया है कि 'कैसे छात्रों को ऑनलाइन क्लास के बाहर मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए, कैसे क्लास में पढ़ाई को ध्यान से सुनना चाहिए और कैसे खुद का ख़याल रखना चाहिए.'

Miss Geeta letter to students: गीता ने कहा, 'मैंने चार दिनों में 16 पत्र लिखे. उन्होंने बच्चों से उनके परिवार के सदस्यों का हालचाल पूछा है. उन्हें पिछले क्लास से अगले क्लास में आने पर बधाई दी.'

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    सौम्या कलसा

    बेंगलुरु. कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के यलकुडिगे गाँव के निम्न प्राथमिक स्कूल के बच्चे इन दिनों अपनी शिक्षक गीता के कारण काफी खुश हैं. बच्चों की इस खुशी का कारण यह है कि ‘गीता मिस’ के नाम से मशहूर इस शिक्षिका ने स्कूल के सभी बच्चों को अपने हाथ से एक चिट्ठी लिखी है. लॉकडाउन के बाद से छात्र और शिक्षक को एक-दूसरे की कमी खल रही थी. दोनों ने एक दूसरे को डेढ़ साल में एक बार भी आमने-सामने नहीं देखा है. जैसे बच्चे स्कूल को मिस कर रहे हैं, अपने दोस्तों को मिस कर रहे हैं या किसी और बात को मिस कर रहे हैं, वैसे ही शिक्षक भी बच्चों को मिस कर रहे हैं. लेकिन बच्चों को सिर्फ मिस करने के बजाय, इस शिक्षक ने अपने सभी छात्रों को एक सुंदर सा पत्र लिखा है.

    शिक्षिका गीता ने बताया कि 'सभी बच्चों के साथ मेरा विशेष रिश्ता है. इसलिए हर पत्र अलग है. पिछले साल शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने चिकमगलूर का दौरा किया था और वे शिक्षकों से मिले थे. उन्होंने सुझाव दिया था कि लॉकडाउन के दौरान पत्रों के माध्यम से हम अपने छात्रों से संपर्क बनाए रखें. मुझे यह सुझाव पसंद आया और इस बार मैंने इसे अंजाम दिया. हर बच्चे ने मेरे पत्र का जवाब दिया है और इस वजह से मेरा प्रयास सार्थक रहा.'

    गीता ने कहा, 'मैंने चार दिनों में 16 पत्र लिखे. उन्होंने बच्चों से उनके परिवार के सदस्यों का हालचाल पूछा है. उन्हें पिछले क्लास से अगले क्लास में आने पर बधाई दी. वे खुशी-खुशी अपना रिजल्ट देखेंगे और मिठाइयां बांटेंगे. इसलिए मैंने सोचा कि वे इस खुशी को अब भी महसूस करें,'

    कार्तिक कक्षा दो से अब कक्षा तीन में पहुँच गया है. वह पूरे साल स्कूल नहीं गया. पर जैसे ही उसे अपने पसंदीदा टीचर का लेटर मिला, वह अपने घर में सभी को जोर-जोर से इसे पढ़कर सुनाया और खुशी के मारे अभी तक बार-बार उसे निकालकर पढ़ता है. एक छात्र की मां सुनीता ने पत्र लिखने के लिए शिक्षक का शुक्रिया अदा किया.

    उन्होंने कहा, 'हम जो भी कहें, बच्चे हमेशा ही अपने शिक्षकों की बात मानते हैं. गीता टीचर ने बताया है कि कैसे छात्रों को ऑनलाइन क्लास के बाहर मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए, कैसे क्लास में पढ़ाई को ध्यान से सुनना चाहिए और कैसे खुद का ख़याल रखना चाहिए.'

    ये सभी 16 छात्र चिकमगलूर के यलकुडिगे सरकारी प्राथमिक स्कूल में कक्षा 1 से 5 में पढ़ते हैं. टीचर गीता इन बच्चों को हर विषय पढ़ाती थीं. उन्होंने इन बच्चों को जो पत्र लिखा है, उसके साथ अपना पता लिखा, एक खाली अंतर्देशीय पत्र भी भेजा. ताकि बच्चे उन्हें अपना जवाबी पत्र भेज सकें. और हर बच्चे ने उनके पत्र का जवाब दिया है कि वे टीचर की सारी बातें मानेंगे और स्कूल खुलने का वे सभी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.