ऑपरेशन कमल' मामले में कर्नाटक के CM येदियुरप्पा को झटका, हाईकोर्ट ने दी जांच को मंजूरी

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (फाइल फोटो)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (फाइल फोटो)

Karnataka Operation Kamala: कांग्रेस-जद (एस) सरकार जुलाई 2019 में कर्नाटक में बहुमत साबित करने में विफल रही और गिर गई. इसके बाद बी. एस. येदियुरप्पा चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 6:36 PM IST
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बेंगलुरु. 'ऑपरेशन कमल' में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा की भूमिका की जांच के लिए हाईकोर्ट ने बुधवार को मंजूरी दे दी. भाजपा नेता पर आरोप है कि प्रदेश की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को गिराने के लिए उन्होंने ही साजिश रची. दरअसल एक ऑडियो सामने आया था, जिसमें येदियुरप्पा कथित तौर पर एक विधायक के बेटे को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश करते सुने गए कि वह अपने पिता से इस्तीफा दिलवाए और फिर पार्टी बदल ले.

दरअसल कांग्रेस-जद(एस) के 15 विधायक जून 2019 में विधानसभा से इस्तीफा देकर मुंबई चले गए थे. विधायकों के इस्तीफे के बाद तत्कालीन कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था. इसके बाद 14 महीने पुरानी कांग्रेस-जद (एस) सरकार जुलाई में कर्नाटक में बहुमत साबित करने में विफल रही और गिर गई. इसके बाद बी. एस. येदियुरप्पा चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे. कांग्रेस इस मुद्दे पर शुरू से ही भाजपा पर आरोप लगाती रही है कि उसने 'ऑपरेशन कमल' के तहत विधायकों को तोड़कर अपने पाले में कर लिया और प्रदेश की सत्ता अपने हाथ में ले ली.

2018 में 'ऑपरेशन कमल'

2018 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के पास निर्दलीय के समर्थन से 106 सीटें थीं, जबकि कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के पास 118 विधायक थे. ऐसे में भाजपा की योजना यह थी कि विपक्ष के 14 विधायक इस्तीफा दें, जिसके बाद सदन में सदस्यों की संख्या घटकर 210 हो जाए. ऐसी स्थिति में बहुमत के लिए 106 सीट चाहिए थीं जो कि भाजपा को हासिल सीटों के बराबर थी. हालांकि उसे कामयाबी नहीं मिली. लेकिन आगे चलकर 2019 में भाजपा विपक्ष के 15 विधायकों को अपने खेमे में लाने में कामयाब रही और कांग्रेस-जद (एस) की सरकार जुलाई 2019 में गिर गई.
क्या है ऑपरेशन कमल

ऑपरेशन कमल की शुरुआत भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने ही की थी. दरअसल 2008 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बीएस येदियुरप्‍पा की अगुआई में सबसे अधिक 110 सीटों पर कब्जा जमाया, लेकिन बहुमत से तीन सीट दूर रह गई. ऐसे में येदियुरप्‍पा 6 निर्दलीय विधायकों की मदद से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे. लेकिन इसके बाद सदन में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए येदियुरप्‍पा ने 'ऑपरेशन कमल' चलाया जिसके अंतर्गत विपक्षी विधायकों को तोड़ने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया गया. फिर सदन में भाजपा के विधायकों की संख्या 124 तक पहुंच गई. 'ऑपरेशन कमल' की बदौलत ही 2008 में मुश्किल से सत्ता में आई भाजपा पांच साल तक कर्नाटक में कायम रह सकी.
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