कर्नाटक संकट: राहुल, कुमारस्वामी और परमेश्वर की वजह से बगावत पर उतरे विधायक

कर्नाटक में 13 विधायकों के इस्तीफे के बाद एकमात्र निर्दलीय विधायक ने भी कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस ले लिया. राहुल गांधी का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा, सीएम कुमारस्वामी की उदासीनता व ढुलमुल रवैया और डिप्टी सीएम परमेश्वरा की बेवजह दखल इसकी वजह है.

D P Satish | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 3:06 PM IST
कर्नाटक संकट: राहुल, कुमारस्वामी और परमेश्वर की वजह से बगावत पर उतरे विधायक
कर्नाटक में सियासी संकट घमासान लगातार तेज होता जा रहा है.
D P Satish
D P Satish | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 3:06 PM IST
कर्नाटक में सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है. कांग्रेस के 10 और जेडीएस के 3 विधायकों के इस्तीफे के बाद कुमारस्वामी सरकार को एक और झटका लगा है. सोमवार को एकमात्र निर्दलीय विधायक नागेश ने सरकार से समर्थन वापस लेते हुए बीजेपी को सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया. इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बाद विधानसभा के समीकरण ऐसे हो गए हैं कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मजबूत स्थिति में पहुंच गई है.

देखा जाए तो कर्नाटक में सियासी संकट राहुल गांधी के ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद से शुरू हुआ. प्रदेश कांग्रेस कमिटी का एक धड़े का निजी हित राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से सामने आने लगे हैं. यही वजह है कि ये विधायक पार्टी से इतर अपने निजी हितों को तवज्जो दे रहे हैं. सीएम एचडी कुमारस्वामी की जरूरत के वक्त अनुपलब्धता और उनका उदासीन रवैया भी विधायकों में अंसतोष का एक बड़ा कारण है.

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कमजोर नेतृत्व ने विधायकों को बनाया बागी

जब राज्य के मुखिया एचडी कुमारस्वामी निजी दौरे पर अमेरिका गए थे, उसी दौरान राहुल गांधी ने साफ कर दिया था कि अब वह कांग्रेस अध्यक्ष नहीं हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मौजूदा विधायक इसे पार्टी का सबसे बड़ा फेल्योर मानते हुए बगावत पर उतर आए हैं. वहीं, जेडीएस विधायकों ने कुमारस्वामी के उदासीन रवैये को अपनी बगावत का कारण बताया है.

बता दें कि सत्ता में आने से पहले 2006-07 के दौरान एचडी कुमारस्वामी से कांग्रेस और जेडीएस के विधायक काफी नाराज़ रहे थे. यहां तक कि कुमारस्वामी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच अलग-थलग पड़े हुए थे.


डिप्टी सीएम से निजी नाराज़गी
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डिप्टी सीएम डॉ. जी परमेश्वरा का भी कमोवेश यही हाल है. कांग्रेस के इन विधायकों के इस्तीफे के पीछे उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर को कथित रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि ये सभी विधायक डिप्टी सीएम से खुश नहीं हैं. बागी विधायकों में बेंगलुरु क्षेत्र से आने वाले चार विधायक- एसटी सोमशेखर, बी बासवराजू, एन मुनिरत्ना और रामलिंगा रेड्डी सबसे अहम माने जा रहे हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि परमेश्वरा के साथ इनका निजी विरोध है. सात बार के विधायक और पूर्व मंत्री बी रामलिंगा रेड्डी ने शर्त रखी है कि अगर परमेश्वरा बेंगलुरु विकास मंत्री पद छोड़ दें, तो वह अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे.

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News18 से बातचीत में रेड्डी ने कहा, 'बेंगलुरु डेवलपमेंट पोर्टफोलियो सिटी एमएलए को मिलना चाहिए. परमेश्वरा आउट साइडर (बाहरी) हैं. उन्होंने हमें भरोसे में नहीं लिया, यही वजह है कि हमें ऐसा कदम उठाना पड़ा.'

जनता का विश्वास खो रही गौड़ा परिवार
जेडीएस अब दो धड़ों में बंट गई है. जेडीएस के बागी नेता एच विश्वनाथ ने News18 से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि लोकसभा में जेडीएस बुरी तरह से हार गई. फिर भी देवगौड़ा परिवार को इसका एहसास तक नहीं हुआ कि उसकी जमीन खिसक रही है. गौड़ा परिवार को इसका एहसास ही नहीं है कि वह जनता का विश्वास खोती जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी की अनुपलब्धता और ईगो के कारण ऐसा हो रहा है. जेडीएस के कई विधायक भी इससे इत्तेफाक रखते हैं.

एक दूसरे जेडीएस नेता के मुताबिक, कुमारस्वामी पहले जैसे नहीं रहे. वह अनुपयोगी लोगों से घिरे हुए हैं. उनकी विधायकों से बात करने में और इस संकट से उबरने में कोई दिलचस्पी नहीं है. उनके ईगो की वजह से हमारी पार्टी की इमेज खराब हुई है.


सिद्धारमैया भी खड़ी कर रहे मुसीबत
खास बात है कि बागी विधायकों को पूर्व सीएम और गठबंधन को-ऑर्डिनेशन कमिटी के चेयमैन सिद्धारमैया का सपोर्ट मिल रहा है. लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने उनसे कहा था कि वो राज्य में सरकार को बनाए रखने के लिए कांग्रेस की तरफ से जेडीएस को मजबूत करें. भले ही सिद्धारमैया दिखावे के तौर पर ऐसा कर रहे हों, लेकिन उनके करीबियों की मानें, तो सिद्धारमैया को गौड़ा परिवार के साथ रिश्ते मजबूत करने में कोई दिलचस्पी नहीं है.

'वेट एंड वॉच' पर काम कर रही बीजेपी
अब आखिर में बात बीजेपी की. कर्नाटक में पिछले एक साल में बीजेपी ऑपरेशन लोटस के जरिए छह बार सत्ता पलटने की असफल कोशिश कर चुकी है. लेकिन अब इसबार पार्टी को लगता है कि वह बिना किसी बाधा के ये ऑपरेशन कामयाब हो जाएगा. फिलहाल बीजेपी वेट एंड वॉच की नीति पर काम कर रही है. उन्हें उम्मीद है कि येदियुरप्पा दोबारा से सीएम की कुर्सी पर बैठ सकते हैं.

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First published: July 8, 2019, 2:05 PM IST
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