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कांग्रेस के ट्रबलशूटर हैं डीके शिवकुमार, अपने पास रखते हैं हर सियासी मर्ज़ की दवा

News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 6:54 PM IST

डीके शिवकुमार पहली बार कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के डॉक्टर Fixit और ट्रबलशूटर बने हैं. हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक डीके शिवकुमार जहां 'चुनावी प्रबंधन के चाणक्‍य' हैं, वहीं पार्टी को हर संकट से उबारने का भी माद्दा रखते हैं.

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कर्नाटक में सियासी घमासान और भी दिलचस्प होता जा रहा है. कुमारस्वामी की सरकार बचाने के लिए कांग्रेस-जेडीएस पूरा जोर लगा रही है. कांग्रेस ने नाराज़ विधायकों को मनाने के लिए अपने 'चाणक्य' और 'संकटमोचक' डीके शिवकुमार को भेजा है. शिवकुमार सियासत के शह और मात के खेल में माहिर हैं. मुंबई के होटल में एंट्री नहीं मिलने के बाद उन्होंने वही डेरा डाल लिया है.

मुंबई में इस वक्त बारिश हो रही है, लेकिन शिवकुमार छाता लेकर होटल के बाहर ही इंतजार कर रहे हैं. इस बीच होटल के अंदर से कोई उनके लिए मोमोज लेकर आया, जिसे उन्होंने खाया. एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें कॉफी भी ऑफर की. उन्हें उम्मीद है कि देर से ही सही, नाराज़ विधायक उनसे मिलने के लिए राज़ी हो जाएंगे.

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ऐसा नहीं है कि डीके शिवकुमार पहली बार कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के डॉक्टर Fixit और ट्रबलशूटर बने हैं. हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक डीके शिवकुमार जहां 'चुनावी प्रबंधन के चाणक्‍य' हैं, वहीं पार्टी को हर संकट से उबारने का भी माद्दा रखते हैं. वे फंड जुटाने के साथ-साथ सभाओं में भीड़ जुटाने का काम करते रहे हैं. आइए जानते हैं कौन हैं डीके शिवकुमार और कैसा है उनका रुतबा:-


वोकालिग्गा समुदाय के बड़े नेता

डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस में वोकालिग्गा समुदाय से आने वाले बड़े नेता हैं. पिछली सिद्धारमैया सरकार में वह ऊर्जा मंत्री थे. महाराष्ट्र में सरकार बचाने में शिवकुमार का योगदान उन्हें गांधी परिवार की नजरों में ले आया. इसके बाद से वो कर्नाटक में कांग्रेस के ट्रबलशूटर बन गए. 2009 में इन्हें कर्नाटक कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था.
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मुंबई के होटल के बाहर बागी विधायकों के मिलने का इंतजार करते शिवकुमार


कर्नाटक के दूसरे सबसे अमीर नेता
डीके शिवकुमार कर्नाटक के सबसे अमीर उम्मीदवारों में से थे. 2013 में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में उन्होंने अपनी 250 करोड़ की संपत्ति बताई थी, जो अब बढ़कर 600 करोड़ हो गई है.

देवगौड़ा के खिलाफ हुई थी राजनीति की शुरुआत
आज कुमारस्वामी सरकार बचाने में जुटे डीके शिवकुमार की राजनीति की शुरुआत कुमारस्वामी के पिता एच. डी. देवेगौड़ा के खिलाफ चुनाव लड़ कर हुई थी. साल था 1985 का. कर्नाटक में इस साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे थे. वोक्कालिगा लोगों के सबसे बड़े चेहरे एचडी देवेगौड़ा ने दो जगह से पर्चा दाखिल किया था. पहला अपनी गृह विधानसभा, होलानरसीपुर सीट से और दूसरा बेंगलुरु की सातनूर विधानसभा सीट से. सातनूर से कांग्रेस की टिकट पर एक 25 साल का युवक देवेगौड़ा को चुनौती दे रहा था. वो युवक कोई और नहीं बल्कि डीके शिवकुमार थे.

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शिवकुमार यह चुनाव तो 15,803 के बड़े मार्जिन से हार गए, लेकिन उनके और देवेगौड़ा के बीच दशकों तक चलने वाली सियासी रंजिश की नींव इस चुनाव ने रख दी थी. इस रंजिश के केंद्र में बेंगलुरु और वोक्कालिगा थे.

डीके शिवकुमार ने होटल के बाहर ही डेरा डाल रखा है.


चुनाव हार पर उपचुनाव जीत गए
1985 में देवेगौड़ा होलानरसीपुर और सातनूर दोनों जगह से चुनाव जीत गए. उन्होंने सातनूर की सीट छोड़ दी. यहां हुए उप-चुनाव में डीके शिवकुमार फिर मैदान में उतरे और जीत गए. उनके सियासी करियर की यह शुरुआत थी. 1989 में अपना दूसरा चुनाव भी यहीं से जीतने के बाद वो एस. बंगारप्पा की सरकार में जूनियर मिनिस्टर भी बन गए थे. शिवकुमार और देवेगौड़ा परिवार के बीच दूसरी सीधी चुनावी टक्कर 1999 में हुई. जब उन्होंने एचडी कुमारस्वामी को सातनूर से हराया था.

आलीशान रिजॉर्ट से कई बार कर चुके कांग्रेस की मदद
शिवकुमार के पास एक आलीशान रिजॉर्ट है, जिसके जरिए उन्होंने कई बार कांग्रेस की मदद की है. जब गुजरात में कांग्रेस के विधायक एक-एक कर बीजेपी में शामिल होते जा रहे थे और अहमद पटेल की नैया मझधार में फंसने लगी, तब कांग्रेस के बचे 44 विधायकों को बेंगलुरु के पास 'ईगलटन' रिज़ॉर्ट ले जाया गया. ये रि़ज़ॉर्ट डीके शिवकुमार का ही था. यहां की गई बाड़ेबंदी से अहमद पटेल चुनाव जीत गए.

सीएम बनने की तमन्ना
शिवकुमार के बारे में कहा जाता है कि उनके दुश्‍मन कांग्रेस पार्टी में ज्‍यादा और बाहर कम हैं. शिवकुमार कर्नाटक के सीएम बनना चाहते हैं और उन्‍होंने अपनी यह महत्‍वाकांक्षा कभी छिपाई नहीं है.

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First published: July 10, 2019, 1:47 PM IST
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