कर-नाटक: कल कुमारस्वामी सरकार का फ्लोर टेस्ट, SC ने कहा- बागी MLAs को विधानसभा में आने के लिए नहीं कर सकते मजबूर

इस बीच मुख्यमंत्री कुमारस्वामी गुरुवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का प्रस्ताव पेश करेंगे. अगर विधानसभा अध्यक्ष इन बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं तो उनकी सरकार उससे पहले ही गिर सकती है.

News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 1:18 PM IST
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कर्नाटक में 12 दिनों से जारी सियासी उठापटक के बीच बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की अर्जी पर अपना फैसला सुना दिया. कोर्ट ने जेडीएस-कांग्रेस के 15 बागी विधायकों की इस्तीफे पर फैसला स्पीकर पर छोड़ दिया है. चीफ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई ने कहा कि विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार बागी विधायकों के इस्तीफे पर नियम के मुताबिक फैसला करें. इसके लिए कोई डेडलाइन नहीं दी जा रही है. कोर्ट के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी गुरुवार को विधानसभा में विश्वास मत पेश करेंगे.

विधायकों को विधानसभा में आने के लिए नहीं कर सकते मजबूर
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ये फैसला सुनाया. कोर्ट ने ये भी कहा कि बागी विधायक विधानसभा में आने या न आने के लिए स्वतंत्र हैं. लेकिन, उनपर कोई दबाव नहीं डाला जा सकता.

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अदालत का फैसला आने के बाद बागी विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, 'विश्वास प्रस्ताव के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने 2 अहम बातें कही हैं. 15 विधायकों को कल सदन में उपस्थित होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. सभी 15 विधायकों को स्वतंत्रता दी जाती है जो कल सदन में जा सकते हैं या नहीं.'


अब नज़रें स्पीकर पर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब नज़रें विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार पर हैं. अगर विधानसभा अध्यक्ष इन बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं तो उनकी सरकार उससे पहले ही गिर सकती है.
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कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर केआर रमेश कुमार


स्पीकर ने क्या कहा?
कोर्ट का फैसला आने के बाद कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कहा, 'मैं जो भी फैसला लूंगा, वो संविधान, कोर्ट और लोकपाल के खिलाफ कतई नहीं होगा.'

फ्लोर टेस्ट के दिन मुंबई में ही रहेंगे बागी विधायक
उधर, मुंबई में कर्नाटक के बागी विधायकों गुरुवार को बेंगलुरु नहीं आएंगे. माना जा रहा है कि सभी विधायक मुंबई में ही रहेंगे.



कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनी थी दलील
इससे पहले मंगलवार को चीफ जस्टिस (सीजेआई) रंजन गोगोई ने इस मामले में सभी पक्षों की ओर से जोरदार दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. इस दौरान कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया. वहीं, बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार बहुमत खो चुकी गठबंधन सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं.



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सीजेआई ने कहा-स्पीकर को डिक्टेट नहीं कर सकते
मंगलवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, 'हम ये तय नहीं करेंगे कि विधानसभा स्पीकर को क्या करना चाहिए, यानी उन्हें इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए या नहीं. हालांकि, हम सिर्फ ये देख सकते हैं कि क्या संवैधानिक रूप से स्पीकर पहले किस मुद्दे पर निर्णय कर सकता है.' CJI ने कहा कि कोर्ट ये तय नहीं करेगा कि स्पीकर को क्या करना है.



येदियुरप्पा बोले- हमारे पास बहुमत
इस बीच कर्नाटक के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने बहुमत होने की बात कही है. कोर्ट का फैसला आने के बाद उन्होंने कहा, 'हमारे पास बहुमत है. बीजेपी के पास सरकार बनाने के लिए पूरे नंबर हैं. कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरेगी. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी इस्तीफा देंगे.'

सीएम एचडी कुमारस्वामी


कुमारस्वामी सरकार बढ़ा खतरा
सत्तारूढ़ गठबंधन को विधानसभा में 117 विधायकों का समर्थन है. इसमें कांग्रेस के 78, जेडीएस के 37, बीएसपी के 1 और एक मनोनीत विधायक शामिल हैं. इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष का भी एक वोट होता है. दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से 225 सदस्यों वाली विधानसभा में विपक्षी बीजेपी को 107 विधायकों का समर्थन हासिल हैं. अगर 15 बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है, तो कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी. ऐसे में कुमारस्वामी को इस्तीफा देना पड़ेगा.

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First published: July 17, 2019, 10:36 AM IST
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