कर्नाटक चुनाव 2018: राजनीति में जगह बना पाएंगे सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र?

वे अपनी मां पार्वती सिद्धारमैया के काफी करीब है. 2017 से पहले यतींद्र कभी भी अपने पिता के दफ्तर नहीं गए थे

News18.com
Updated: April 17, 2018, 9:45 AM IST
कर्नाटक चुनाव 2018: राजनीति में जगह बना पाएंगे सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के छोटे बेटे यतींद्र सिद्धारमैया
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Updated: April 17, 2018, 9:45 AM IST
डीपी सतीश

जब सिद्धारमैया ने पांच साल पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. तब उनके छोटे बेटे डॉ. यतींद्र के लिए जीवन पहले की तरह सामान्य ही था. वे रोज सुबह नाश्ते के बाद गैरेज से अपनी मारुति स्विफ्ट डिजायर निकालकर बेंगलुरु के भासावेश्वर नगर में अपने क्लिनिक में जाते थे.

यहां तक कि जब यतींद्र के पिता पचास हज़ार लोगों की भारी भीड़ के बीच कांतिरवा स्टेडियम में शपथ ले रहे थे, तब भी यथेन्द्र अपने क्लीनिक पर मरीज़ो को देखने में व्यस्त थे. काम खत्म करके जब यतींद्र वापस घर आए तो उन्हें उनके घर के बाहर एक सिक्योरिटी गार्ड रोक लिया, लेकिन सौभाग्य से उनकी पहचान होने के बाद उनके लिए घर का दरवाजा खोल दिया गया था.

बीते सप्ताह रिपोर्टर से बातचीत करते हुए सिद्धारमैया ने बहुत गर्व से कहा था, "मेरा छोटा बेटा बहुत ही शर्मीला और ब्रिलियंट है. यतींद्र बहुत ही होनहार है. वो कभी मेरे नाम का इस्तेमाल नहीं करता है. वो बहुत शर्मीला और अपने आप में रहने वाला है."

सिद्धारमैया के बड़े बेटे राकेश की 2016 में बेल्जियम में मौत से पहले तक यतींद्र को सिद्धारमैया के करीबी भी नहीं जानते थे. अपने पिता का इकलौता वारिस होने के बावजूद यतींद्र अपने मेडिकल प्रोफेशन में व्यस्त रहते थे और राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं लेते थे. यतींद्र वाकई बहुत सामान्य जीवन जीते थे.

वे अपनी मां पार्वती सिद्धारमैया के काफी करीब है. 2017 से पहले यतींद्र कभी भी अपने पिता के दफ्तर नहीं गए थे और न ही अपनी विधानसभा सीट पर किसी से कोई वास्ता रखते थे.

सिद्धारमैया के बड़े बेटे राकेश, जिनकी 38 साल की उम्र में असमय मौत हो गई, बताया जाता है कि राकेश सिद्धारमैया के चहेते थे और सिद्धारमैया ने उसे राजनीति में आगे बढ़ाने और अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने का भी फैसला किया था. राकेश की अचानक मौत के बाद उसके छोटे भाई को जबरदस्ती अपनी आम जिन्दगी छोड़नी पड़ी.

परिवार के मुताबिक यतींद्र शुरुआत में राजनीति में आने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे और कुछ महीनों तक उन्होंने इस टॉपिक को नज़रअंदाज करने की बहुत कोशिश की. लेकिन सिद्धारमैया चाहते थे कि यतींद्र उनकी विधानसभा सीट वरूना को संभालें, जिसे पहले राकेश संभालता था.

जब यतींद्र पहली बार वरूना आए तो वहां उन्हें कोई भी पहचान नहीं पाया और न ही वो किसी को पहचानते थे. यतींद्र बहुत ही विनम्र, शर्मीले और सबको सम्मान देने वाले थे. लेकिन अब वे लोकल पॉलिटिक्स को समझ चुके हैं और लोगों के साथ घुल-मिल गए हैं. एक लोकल पत्रकार के मुताबिक, यतींद्र अपने पिता की तरह निडर और तेज नहीं है.

अपने बेटे के राजनीति में प्रवेश पर सिद्धारमैया कहते हैं कि ये लोगों की इच्छा थी कि यतींद्र राजनीति में आए, उन्होंने उनके साथ कोई जबरदस्ती नहीं की,  "कोई भी उन्हें सिर्फ मेरा बेटा समझकर वोट नहीं करेगा. बल्कि लोग उसे उसकी अच्छाइयों पर ही चुनकर लाएंगे." उन्होंने कहा "मुझे मेरे बेटे पर गर्व है और लोग भी उसे काफी पसंद कर रहे हैं मुझे विश्वास है कि वो जीतेगा."

हालांकि दो साल पहले यतींद्र का नाम एक विवाद में आया था जब यतींद्र की  लैब कंपनी ने बेंगलुरु के सरकारी अस्पताल विक्टोरिया में लैब चलाने के लिए एक कॉन्ट्रेक्ट लिया था. विवादों में आने के बाद यतींद्र की कंपनी ने ये डील छोड़ दी थी. इस मद्दे पर यतींद्र के एक दोस्त ने उनके बचाव में कहा कि सिर्फ चीफ मिनिस्टर का बेटा होने की वजह से उन्हे लीगल बिजनेस करने से रोकना गलत है. यतींद्र गरीबों को वाजिब मेडिकल सुविधाएं देना चाहते थे. यतींद्र एक बड़े डॉक्टर हैं उन्हें सरकारी अस्पताल के बाहर पैसों के लिए लैब चलाने की कोई ज़रूरत नहीं है.

सिद्धारमैया आजकल अचानक से सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हो गए हैं और बताया जा रहा है कि इसके पीछे यतींद्र का हाथ है. यतींद्र उनके ट्वीट नहीं करते लेकिन वो पूरी तरह से अपने पिता की सोशल मीडिया एक्टीविटीज़ पर नज़र रखते है.

न्यूज़18 से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वरुना के लोगों ने उन्हें पूरे मन से अपना लिया है, और सिद्धारमैया का बेटा होना ही मेरे लिए काफी नहीं है. उन्होंने कहा "भले ही आप सीएम के बेटे क्यों न हो लेकिन अगर आप में लीडरशिप क्वालिटीज़ नहीं होंगी तो आप राजनीति में गुज़ारा नहीं कर सकते, लोग आपको तभी अपनाएंगे जब आप उनके लिए एक अच्छे नेता साबित होंगे." यतींद्र ने ये भी कहा कि वो पिछले डेढ़ सालों से अपनी विधानसभा में घूम-घूम कर लोगों से परिचित होने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

अपने प्रतिद्वंदी और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस येदियुरप्पा के बेटे विजेन्द्र के बारे में पूछने पर यतींद्र ने कोई टिप्पणी नहीं की उन्होंने कहा कि मै उनके बारे में कुछ नहीं जानता हूं और अभी कोई टिप्पणी करने की पोजिशन में नहीं आया हूं. "अगर मैं हार जाता हूं तो कृप्या मेरे पिता को इसका दोषी न माना जाए क्योंकि वो मेरी हार होगी मेरे पिता की नहीं हालांकि मैं अपनी जीत के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हूं."

यतींद्र की करीबी मित्र तबू राव ने कहा कि यतींद्र राजनीति में बहुत अच्छा काम करेंगे क्योंकि वो बहुत "विनम्र और दयालु है". आपने कभी उनके जैसा इंसान नहीं देखा होगा. किसी भी मुख्यमंत्री का बेटा इतना विनम्र और ज़मीन से जुड़ा हुआ नहीं होता है. उन्होंने ये भी कहा की यतींद्र काफी समझदार और शार्प है उन्हें हर तरह की स्थिति को हैंडल करना बहुत अच्छे से आता है.

संतोष जयचंद ने बताया कि एक बार उन्होंने यतींद्र और इनकी मां को सिटी बस में बैठे देखा था. उन्होंने बताया कि वो एक ट्रैफिक सिग्नल पर इंतजार कर रहे थे और बस भी सिग्नल पर खड़ी थी तभी उन्होंने यतींद्र और उनकी मां को सिटी बस में देखा और वो हैरान रह गए.

क्या विधायक बनने के बाद यतींद्र के रवैये में बदलाव आएगा? ये तो समय ही बता सकता है.
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