Home /News /nation /

'रोहिंग्याओं को वापस भेजने की योजना नहीं', कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

'रोहिंग्याओं को वापस भेजने की योजना नहीं', कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

कर्नाटक सरकार ने रोहिंग्याओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है. (सीएम बासवराज बोम्मई की फाइल फोटो)

कर्नाटक सरकार ने रोहिंग्याओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है. (सीएम बासवराज बोम्मई की फाइल फोटो)

Rohingyas in Karnataka: राज्य सरकार ने रोहिंग्या समुदाय के 72 लोगों की सूची भी अदालत को दी है और एड्वोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका को खारिज करने की मांग की है. इन नामों में कई की उम्र 12 साल से कम है.

    बेंगलुरु. कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने साफ कर दिया है कि राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) में रह रहे रोहिंग्याओं (Rohingyas) को वापस भेजने की कोई योजना नहीं है. यह जानकारी राज्य सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को दी है. राज्य सरकार ने यह भी बताया कि ऐसे 72 रोहिंग्याओं की पहचान की गई है, जो शहर में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं. शीर्ष अदालत में एक साल के भीतर रोहिंग्याओं की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने को लेकर याचिका दायर हुई थी.

    अदालत में दिए हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा, ‘बेंगलुरु सिटी पुलिस ने अपने अधिकार क्षेत्र में रोहिंग्याओं को किसी कैंप या डिटेंशन सेंटर में नहीं रखा है. हालांकि, बेंगलुरु शहर में 72 रोहिंग्याओं की पहचान हुई है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और बेंगलुरु सिटी पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कोई भी कठोर कार्रवाई अब तक नहीं है और उन्हें निर्वासित करने की कोई तत्काल योजना नहीं है.’

    साथ ही राज्य सरकार ने रोहिंग्या समुदाय के 72 लोगों की सूची भी अदालत को दी है और एड्वोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका को खारिज करने की मांग की है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन नामों में कई की उम्र 12 साल से कम है.

    अगस्त 2017 में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद को बताया था राज्यों को रोहिंग्याओं समेत अवैध प्रवासियों का पता लगाने और उन्हें निर्वासित करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद रोहिंगा समुदाय के दो लोगों ने निर्वासन के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था.

    Tags: Bengaluru, Karnataka, Rohingya, Supreme Court

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर