दलितों के बाल काटने और शेविंग करने के लिए जल्द सैलून खोलने की तैयारी में कर्नाटक सरकार

कर्नाटक सरकार गांवों में दलितों के लिए जल्द खोलेगी सैलून.
कर्नाटक सरकार गांवों में दलितों के लिए जल्द खोलेगी सैलून.

कर्नाटक (Karnataka) के समाज कल्याण विभाग ने उन गांवों में सरकार द्वारा संचालित नाई (Salon) की दुकानें शुरू करने का प्रस्ताव दिया था, जहां दलित (Dalit) आम सैलून का उपयोग करने से कतराते हैं, या फिर उन्हें वहां जाने से रोक दिया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 21, 2020, 7:18 AM IST
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बेंगलुरू. कर्नाटक (Karnataka) के कुछ जिलों में सैलून (नाई की दुकान) में जातिगत भेदभाव के कई मामले सामने आने के बाद अब राज्य सरकार जल्द ही इन जिलों में सैलून (Salon) खोलने पर विचार कर रही है. इन सैलून में केवल दलितों (Dalit) के बाल काटे जाएंगे और शेविंग करने की व्यवस्था होगी. बता दें कि उत्तर और मध्य कर्नाटक के जिलों इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, जब ​दलितों के बाल काटने और शेविंग करने से मना कर दिया गया.

राज्य के समाज कल्याण विभाग ने काफी समय पहले उन गांवों में सरकार द्वारा संचालित नाई की दुकानें शुरू करने का प्रस्ताव दिया था, जहां दलित आम सैलून का उपयोग करने से कतराते हैं, या फिर उन्हें वहां जाने से रोक दिया जाता है. सरकार ने तब इस प्रस्ताव पर विचार नहीं किया था. हाल में सामने आईं दो घटनाओं के बाद अब सरकार ने इस मामले को लेकर चिंता जताई है.

विभाग ने राज्य भर में जातिगत पूर्वाग्रहों से लड़ने के लिए इस पहल की सिफारिश की है. हाल के दिनों में, ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां दलित और ओबीसी को नाई की दुकानों पर सेवाओं से वंचित किया गया है. इस तरह के सभी जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए विभाग ने इस योजना को तैयार किया है.

यह प्रस्ताव राज्‍य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की अध्यक्षता में एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम (SC/ST Atrocities Act) पर हालिया समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए एजेंडे का एक हिस्सा था. कर्नाटक सरकार की बैठक में शामिल रहे विधायक एन महेश ने बताया कि यह मुद्दा सरकार का अहम एजेंडा रहा है. उन्होंने कहा, ये समस्या मुख्य रूप से उत्तर और मध्य कर्नाटक के जिलों में है. सरकार जल्द ही इस पर कोई बड़ा फैसला लेगी.



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पहले भी आते रहे हैं ऐसे मामले
उल्‍लेखनीय है कि कर्नाटक के कुछ ग्रामीण इलाकों में यह अपमानजनक प्रथा अभी भी प्रचलित है और अक्सर यहां ऐसे मामले सामने आते हैं. अक्टूबर 2019 में, नाइयों द्वारा दलितों के बाल काटने जैसी सेवा देने से इनकार करने के बाद पुलिस और तहसीलदार को तनाव फैलने से रोकने के लिए कदम उठाना पड़ा था. कोप्पल और धारवाड़ जैसे जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं.
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