कोविड-19 के खतरे के बावजूद 30 जुलाई से KCET परीक्षाएं करवाने पर अडिग कर्नाटक सरकार

कोविड-19 के खतरे के बावजूद 30 जुलाई से KCET परीक्षाएं करवाने पर अडिग कर्नाटक सरकार
KCET की परीक्षाएं 30 जुलाई से कराई जानी हैं (सांकेतिक फोटो)

COVID-19 महामारी (Pandemic) के बीच KCET 2020 परीक्षा आयोजित करने के कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं (Pleas) पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मंगलवार को यह आदेश दिया था.

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नई दिल्ली. कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (KCET 2020 exam) को पूर्वनिर्धारित 30 जुलाई से 1 अगस्त तक करवाने के अपने फैसले पर टिके रहने का फैसला किया है. सरकार की ओर से इससे जुड़ी जानकारी लिखित में (written submission) कोर्ट में दाखिल की गई है. बता दें कि इससे पहले मंगलवार को कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप के मद्देनजर कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने राज्य सरकार से 30 जुलाई को कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (KCET 2020 exam) आयोजित करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार (reconsider) करने को कहा था.

COVID-19 महामारी (Pandemic) के बीच KCET 2020 परीक्षा आयोजित करने के कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं (Pleas) पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मंगलवार को यह आदेश दिया था. यह आदेश मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) अभय श्रीनिवास ओका और न्यायमूर्ति एच पी संदेश की खंडपीठ ने पारित किया था.

कोविड-19 संक्रमण से रोकथाम के प्रयासों से बनी परिस्थितियों के चलते दिया था निर्देश
निर्देश में कहा गया था, "हर रोज़ स्थिति में भारी बदलाव हो रहा है. इसलिए, हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि पूर्वोक्त पहलुओं पर विचार करते हुए सीईटी परीक्षाों को करवाने के सवाल पर तुरंत पुनर्विचार करें. राज्य सरकार कल दोपहर 02.30 बजे तक रिकॉर्ड पर अपना फैसला रख सकेगी."
उपरोक्त आदेशों को जारी करने के लिए जो कारण बताए गए, उनमें राज्य में COVID-19 मामलों की बड़ा उछाल, छात्रों की कंटेनमेंट जोन घोषित इलाकों से बाहर निकलने की अक्षमता और सार्वजनिक परिवहन के साधनों की कमी शामिल है.



परीक्षा कराने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर की गई थीं दो याचिकाएं
कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (KCET) आयोजित करने के राज्य के फैसले को चुनौती देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं.

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) की ओर से दायर की गई पहली याचिका, 30 मई और 31 जुलाई को केसीईटी 2020 परीक्षा आयोजित करने की 13 मई की केईए की अधिसूचना को निष्प्रभावी करने के निर्देश के लिए प्रार्थना करती है.

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दूसरी याचिका दो अधिवक्ताओं- प्रदीप कुमार एसपी और एस हनुमंतेगौड़ा ने दायर की थी. यह जनहित याचिका Covid​​-19 पॉजिटिव स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा आयोजित करने के संबंध में जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को समाप्त करने का आग्रह करती है.
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