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कर्नाटक हाईकोर्ट ने हुबली बार एसोसिएशन को 'कश्मीरी स्टू़डेंट्स का बचाव न करने के प्रस्ताव' पर झिड़का

News18Hindi
Updated: February 26, 2020, 6:02 PM IST
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हुबली बार एसोसिएशन को 'कश्मीरी स्टू़डेंट्स का बचाव न करने के प्रस्ताव' पर झिड़का
सोमवार को स्टूडेंट्स का केस लड़ने बेंगलुरु से आए वकीलों पर हमला किया गया था (सांकेतिक तस्वीर, Twitter)

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कहा है कि भारत में तो कसाब (Kasab) को भी अपना पूरा मुकदमा (Case) लड़ने की छूट दी थी.

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  • Last Updated: February 26, 2020, 6:02 PM IST
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बेंगलुरु. कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने हुबली बार एसोसिएशन (Hubli Bar Association) को कश्मीरी स्टूडेंट (Kashmir Student) का बचाव न करने का प्रस्ताव पास करने पर डांट लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि भारत में तो कसाब (Kasab) को भी अपना पूरा मुकदमा लड़ने की छूट थी.

दरअसल हुबली बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें देशद्रोह (Sedition) के आरोप में गिरफ्तार किए गए कश्मीरी स्टूडेंट्स (Kashmiri Student) के बचाव में मुकदमा न लड़ने का प्रस्ताव पास किया गया था.

बार एसोसिएशन अपने फैसले पर कर सकता है पुनर्विचार
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है कि अगर ऐसा किया गया तो न्यायपालिका संस्था (Judiciary Body) की छवि का क्या होगा? यहां तो अजमल कसाब को भी पूरा मुकदमा लड़ने दिया गया था. एडवोकेट जनरल नवादगी ने कहा कि बार अपने फैसले पर पुनर्विचार (Reconsider) के बारे में सोच रहा है.



हाईकोर्ट ने कहा, ऐसा न होने पर मामले को बेंगलुरु स्थानांतरित करने का विकल्प
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवास ओका (Chief Justice of High Court Oka) ने कहा है कि यह अन्य बार एसोसिएशन के लिए एक सबक हो सकता है, जो ऐसे प्रस्ताव पारित करते हैं. इसके अलावा अन्य विकल्प जो हैं उनके मुताबिक अदालत को जमानत मामले को बेंगलुरु स्थानांतरित करना होगा. ऐसी हालत में केस उनके न्यायाधिकार (Jurisdiction) से बाहर होगा.

इससे पहले तीन वकीलों की एक टीम बेंगलुरु से उत्तरी कर्नाटक (North Karnataka) के धारवाड़ में तीन कश्मीरी स्टूडेंट्स (Students of Kashmir) का पक्ष रखने के लिए पहुंची. जहां उन्हें देशद्रोह का मुकदमा झेल रहे छात्रों के पक्ष में आने के लिए डराया-धमकाया गया और उनके खिलाफ नारे लगाए गए. यह घटना इसी हफ्ते सोमवार को हुई. वे जब कोर्ट पहुंचे तो उनके वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई थी.

बेंगलुरु से आई वकीलों की टीम हमले के बाद वापस लौट गई थी
इसके बाद कोर्ट के अंदर और बाहर हो रही झड़पों के चलते इन वकीलों को अपने वादियों की ओर से जमानत याचिका (Bail Plea) दायर न कर पाने के बाद बेंगलुरु वापस लौटना पड़ा था. बेंगलुरु के ये वकील, जिन्हें भारी सुरक्षा के साथ धारवाड़ के कोर्ट ले जाया गया था, उन पर हमला हुआ था और दोपहर में उन्हें सरकार की देखरेख में सरकार के निरीक्षण बंगले पर ले जाया गया था. वकीलों के एक समूह ने कोर्ट के पास उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था. जबकि दक्षिणपंथी कार्यकर्ता (Right Wing Activist) 'वापस जाओ' और 'भारत माता की जय' के नारे लगा रहे थे.

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First published: February 26, 2020, 5:04 PM IST
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