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कर्नाटक HC से CM येडियुरप्पा को बड़ा झटका, भूमि मामले में दर्ज FIR रद्द करने की याचिका खारिज

बेंगलुरु के एक आरटीआई कार्यकर्ता जय कुमार हीरेमठ ने 2025 में मातादहल्ली मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. फाइल फोटो
बेंगलुरु के एक आरटीआई कार्यकर्ता जय कुमार हीरेमठ ने 2025 में मातादहल्ली मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. फाइल फोटो

Karnataka Illegal Land Denotification Case: बेंगलुरु के एक आरटीआई कार्यकर्ता जय कुमार हीरेमठ ने 20215 में मातादहल्ली मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने येडियुरप्पा और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी के नाम पर एफआईआर दर्ज की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 6:30 PM IST
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नई दिल्ली. बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) को एक बड़ा झटका देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने मुख्यमंत्री के खिलाफ भूमि की अधिसूचना को अवैध रूप से रद्द करने (Illegal Land Denotification Case) के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने मुख्यमंत्री पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) की ओर से मंगलवार को याचिका दायर किए जाने के बाद जस्टिस जॉन माइकल कुन्हा ने इसे खारिज करते हुए लोकायुक्त को मामले में जांच जारी रखने का निर्देश दिया. ये दूसरी बार है जब कोर्ट ने एक पखवाड़े के भीतर बीएस येडियुरप्पा की याचिका खारिज कर दी है.

भूमि की अधिसूचना को अवैध रूप से रद्द करने के एक अन्य मामले में 23 दिसंबर को भी कोर्ट ने बीएस येडियुरप्पा की याचिका खारिज कर दी थी. ये मामला गंगेनाहल्ली में 1.11 एकड़ भूमि की अधिसूचना को अवैध रूप से रद्द करने से जुड़ा है. ये भूमि आरटीनगर में मातादहल्ली प्लान का हिस्सा है. दरअसल बेंगलुरु के एक आरटीआई कार्यकर्ता जय कुमार हीरेमठ ने 20215 में मातादहल्ली मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने येडियुरप्पा और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारास्वामी के नाम पर एफआईआर दर्ज की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि येडियुरप्पा ने अवैध रूप से पॉश इलाके आरटी नगर के पास मातादहल्ली में 1.1 एकड़ जमीन की अवैध रूप से अधिसूचना रद्द कर दी थी.

बता दें कि 1976-77 में कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु विकास प्राधिकरण के लिए भूमि अधिग्रहण किया था. इसके बाद 1988 में सभी जमीनों को कब्जे में ले लिया था. बाद में राजशेखरैया ने दावा किया था कि संपत्ति उनसे संबंधित थी और उन्होंने कोर्ट के जरिए इस केस में जीत भी हासिल की थी. उन्होंने सरकार से भूमि की अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया था, जिसके बाद 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के निर्देश पर कथित रूप से यह फाइल सामने आई थी, लेकिन इसे आगे नहीं बढ़ाया गया था.

साल 2010 में बीएस येडियुरप्पा मुख्यमंत्री बने और उन्होंने जमीन की अधिसूचना रद्द कर दी. इसके बाद सारी जमीन 20 दिनों के अंदर ही कुमारस्वामी की सास विमला को एक वकील के माध्यम से ट्रांसफर कर दी गई.
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