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कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा- अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ शादी करना मौलिक अधिकार

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka Highcourt) इस सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के माता-पिता अदालत में मौजूद थे. हालांकि, याचिका दायर करने वाले वाजिद खान की मां का कहना है कि उन्होंने शादी के लिए हां कर दी है, लेकिन राम्या के पेरेंट्स नहीं मान रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 4:03 PM IST
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बेंगलुरु. देश में लव जिहाद (Love Jihad) को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं. ऐसे में कर्नाटक हाईकोर्ट की तरफ से दिए गए एक फैसले को कफी अहम माना जा रहा है. यहां अदालत ने कहा है कि अपनी पसंद से शादी करना किसी का भी मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है. कुछ ही दिनों पहले इलाहाबाद कोर्ट (Allahbad Court) ने भी इसी तरह का फैसला सुनाया था. अदालत ने कहा था कि बालिग व्यक्ति को अपने पसंद के साथी के साथ शादी करने का हक है.

बीते 27 नवंबर को अदालत में जस्टिस एस सुजाता और सचिन शंकर मगदम की बेंच ने वाजिद खान की हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई की थी. इस याचिका में खान ने अपनी दोस्त राम्या जी को रिहा करने की मांग की थी. अदालत ने एनजीओ को महिला को स्वतंत्र करने का आदेश दिया है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, 'किसी महिला या पुरुष को अपनी पसंद से शादी करने का मौलिक अधिकार है. यह संविधान में शामिल है.'

खान और राम्या दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और कंपनी में सहकर्मी है. दोनों शादी करना चाहते हैं, लेकिन लड़की के परिवार वालों की तरफ से विरोध का सामना कर रहे हैं. स्थानीय पुलिस ने 27 नवंबर को राम्या को अदालत में पेश किया था. इस दौरान राम्या ने कहा था कि वह जनोदय सांत्वना केंद्र में शिकायत दर्ज कराने के बाद एक एनजीओ महिला दक्षता समिति में रह रही है. राम्या ने बताया था कि उसके पेरेंट्स खान के साथ शादी का विरोध कर रहे हैं और उसके आजादी के अधिकारों को छीन रहे हैं.

इस सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के माता-पिता अदालत में मौजूद थे. हालांकि, खान की मां का कहना है कि उन्होंने शादी के लिए हां कर दी है, लेकिन राम्या के पेरेंट्स नहीं मान रहे हैं. अदालत ने एनजीओ से राम्या को छोड़ने का आदेश देते हुए कहा कि वह अपने जीवन को लेकर निर्णय लेने में सक्षम है. खास बात है कि अदालत का यह फैसला तब और भी ज्यादा खास हो जाता है, जब कर्नाटक सरकार लव जिहाद से जुड़े कानून को लाने पर विचार कर रही है.
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