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‘कम से कम जुमे और रमजान के मौके पर ही लड़कियों को हिजाब पहनने की इजाजत दे दी जाए’, जानिए किसने की ये गुजारिश और कहां

‘कम से कम जुमे और रमजान के मौके पर ही लड़कियों को हिजाब पहनने की इजाजत दे दी जाए’, जानिए किसने की ये गुजारिश और कहां

प्रतीकात्मक तस्वीर

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Hijab Row from Karnataka : दो दलीलें दी गई हैं. पहली- दूसरे पंथ के लोगों, जैसे कि सिखों को कृपाण, पगड़ी आदि धारण करने की अनुमति मिली हुई है. इसी तरह, मुस्लिम लड़कियों को भी हिजाब (Hijab) पहनने की अनुमति दी जाए. यह उनकी धार्मिक आस्था का मामला है. उनकी पवित्र धार्मिक पुस्तक कुरान में लिखा है कि महिलाओं को अपना शरीर ढंककर रखना चाहिए. दूसरी दलील में उन्होंने कहा है कि हिजाब (Hijab) से न तो सार्वजनिक व्यवस्था को चुनौती मिल रही है, न ही या स्वास्थ्य या नैतिकता के लिए कोई खतरा है. बल्कि इसके उलट इस पर विवाद से जरूर देशभर में विवाद की स्थितियां बन रही हैं.

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बेंगलुरू. कर्नाटक से शुरू हुए हिजाब-विवाद (Hijab Row from Karnataka) में एक नया मोड़ आया है. अब मांग की गई है कि मुस्लिम लड़कियों को कम से कम जुमे के दिन और रमजान के महीने में ही हिजाब (Hijab) पहनने की अनुमति दे दी जाए.

कर्नाटक हाईकोर्ट की पूर्ण बेंच (Full Bench Of Karnataka High Court) के सामने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. पेशे से मनोचिकित्सक डॉक्टर विनोद जी कुलकर्णी ने पीआईएल लगाई है. वे कर्नाटक के हुबली के रहने वाले हैं. सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं. याचिका में कुलकर्णी ने मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी की अगुवाई वाली हाईकोर्ट की बेंच से आग्रह किया है कि जब तक मामले में फैसला नहीं आ जाता, मुस्लिम लड़कियों को अंतरिम राहत दी जाए. इसके तहत उन्हें शुक्रवार को जुमे के दिन और आगामी रमजान (Ramzan) के महीने में हिजाब पहनने (शिक्षण संस्थानों में) की अनुमति दी जाए. क्योंकि यह उनकी आस्था का विषय है. इस पर हो रहे विवाद से उनके मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर विपरीत असर पड़ रहा है.

पीआईएल में दलील- हिजाब से कोई चुनौती नहीं 

डॉक्टर कुलकर्णी ने दो दलीलें दी हैं. पहली- दूसरे पंथ के लोगों, जैसे कि सिखों को कृपाण, पगड़ी आदि धारण करने की अनुमति मिली हुई है. इसी तरह, मुस्लिम लड़कियों को भी हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए. यह उनकी धार्मिक आस्था का मामला है. उनकी पवित्र धार्मिक पुस्तक कुरान में लिखा है कि महिलाओं को अपना शरीर ढंककर रखना चाहिए. दूसरी दलील में उन्होंने कहा है कि हिजाब से न तो सार्वजनिक व्यवस्था को चुनौती मिल रही है, न ही या स्वास्थ्य या नैतिकता के लिए कोई खतरा है. बल्कि इसके उलट इस पर विवाद से जरूर देशभर में विवाद की स्थितियां बन रही हैं. इसलिए अदालत को इसकी इजाजत देने पर विचार करना चाहिए.

अदालत का सवाल- क्या बाल ढंकना भी जरूरी है 

डॉक्टर कुलकर्णी की याचिका सहित इस मामले में गुरुवार को कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) में विचार हुआ. इस दौरान अदालत ने कहा, ‘हमारे सामने दो पक्ष है. एक दलील दे रहा है कि शिक्षण संस्थानों में सिर्फ निर्धारित वर्दी (Uniform) में ही छात्र-छात्राओं को पढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए. दूसरे का कहना है कि वर्दी के साथ हिजाब (Hijab) पहनने की इजाजत भी होनी चाहिए. क्योंकि इससे किसी व्यवस्था का उल्लंघन नहीं होता. लेकिन हम जानना चाहते हैं कि कुरान में महिलाओं के बालों को ढंकने का भी कोई निर्देश दिया गया है क्या?’ मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी होगी. इस दौरान कर्नाटक सरकार के वकील की ओर से पक्ष रखा जाएगा.

Tags: Hijab controversy, Hindi news, Karnataka High Court, Ramzan

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