इंश्योरेंस के पैसों के लिए किया एक्सीडेंट का नाटक, 25 साल बाद CBI चलाएगी मुकदमा

यह घटना 1993 में कर्नाटक के शिमोगा में हुई थी. जब बीएस शांतिकुमार की एंबैसडर कार अचानक पीछे की ओर लुढ़कने लगी और कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया.

Utkarsh Anand | News18.com
Updated: October 28, 2018, 3:35 PM IST
इंश्योरेंस के पैसों के लिए किया एक्सीडेंट का नाटक, 25 साल बाद CBI चलाएगी मुकदमा
सुप्रीम कोर्ट
Utkarsh Anand | News18.com
Updated: October 28, 2018, 3:35 PM IST
25 साल पहले एक बीमा कंपनी से धोखाधड़ी करने की कोशिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक समूह के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की इजाजत दी है. कोर्ट ने सीबीआई को झूठ और धोखाधड़ी के लिए सीआरपीसी के तहत शिकायत दर्ज करके मामला चलाने की अनुमति दी है.

यह घटना 1993 में कर्नाटक के शिमोगा में हुई थी. जब बीएस शांतिकुमार की एंबैसडर कार अचानक पीछे की ओर लुढ़कने लगी और कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया. उस समय बताया गया कि गाड़ी को खराब तरीके से पार्क किया गया था. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर कुछ लोगों के साथ मिलकर साजिश रची.

एक टैक्सी संचालक और कुछ अन्य आरोपियों ने इस घटना को दुर्घटना करार देने की कोशिश की थी. इसमें उनके साथ एक पुलिस अधिकारी भी मिला हुआ था. सीबीआई ने आरोप लगाया था कि इस अधिकारी ने ही एक झूठी रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें प्रमाणित किया गया कि एक एंबैसडर कार ने अन्य वाहनों को टक्कर मारी है.

पुलिस अधिकारी ने शांतिकुमार के परिवार के सदस्यों को इस मामले का गवाह बनाया. टैक्सी ड्राइवर ने मुआवजा की राशि पर दावेदारी तेज करने के लिए दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन पर लापरवाही से गाड़ी चलाने का भी आरोप लगाया. इसके बाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के तहत न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से नुकसान की भरपाई के लिए 35 लाख रुपये का दावा किया गया.

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सीबीआई ने एंटी करप्शन ब्रांच के माध्यम से मामले की जांच की और विभिन्न आरोपों के तहत पुलिस अधिकारी और चार अन्य के खिलाफ केस चलाने की मांग की. लेकिन सेशन कोर्ट ने तकनीकी आधार पर उसे बरी करार दिया. सीबीआई की अपील पर हाईकोर्ट ने अभियोजन के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

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सुप्रीम कोर्ट ने अब सीबीआई को सीआरपीसी के तहत आरोपियों पर कार्रवाई करने की इजाजत दी है. साथ ही कहा कि केस की सुनवाई के बाद आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और संबंधित कोर्ट में अपराध के आधार पर शिकायज दर्ज कराई जाएगी.
First published: October 28, 2018, 3:30 PM IST
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