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कर्नाटक: मस्जिदों में बांटा जा रहा सैंपल फॉर्म, कराई जा रही है NRC और CAB की तैयारी

News18Hindi
Updated: December 11, 2019, 4:01 PM IST
कर्नाटक: मस्जिदों में बांटा जा रहा सैंपल फॉर्म, कराई जा रही है NRC और CAB की तैयारी
दक्षिण भारत की मस्जिदों में एक काउंटर खोला गया है, जो मुस्लिम समुदाय के लोगों को पहचान संबंधी दस्‍तावेज दुरुस्‍त कराने में मदद कर रहे हैं.

धार्मिक नेता (Religious Leaders) बता रहे हैं कि मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) के लोग सभी जरूरी दस्‍तावेजों (Documents) में अपने नाम सुनिश्चित करें ताकि भविष्‍य में उन्‍हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. उनका कहना है कि भारतीय मुसलमानों को CAB और NRC से डरने की कोई जरूरत नहीं है. ये घोषणाएं एहतियातन की जा रही हैं ताकि भविष्‍य में मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़े.

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  • Last Updated: December 11, 2019, 4:01 PM IST
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दीपा बालकृष्‍णन

बेंगलुरु. दक्षिण भारत (Southern India) के कुछ राज्‍यों में मस्जिदों (Mosques) से जुमे की नमाज पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने पहचान संबंधी दस्‍तावेजों (Identity Records) की फिर से जांच करने की हिदायत दी जा रही है. मुस्लिमों से कहा जा रहा है कि नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) और नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (CAB) के मद्देनजर अपने दस्‍तावेज (Documents) की हर कमी को दरुस्‍त कर लें ताकि भविष्‍य में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. हालांकि धार्मिक नेताओं का कहना है कि इन घोषणाओं का एनआरसी से कोई लेना-देना नहीं है. हम एहतियातन यह कदम उठा रहे हैं. उनके मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने साफ कर दिया है कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा.

'भारतीय मुसलमानों को CAB से डरने की जरूरत नहीं'
कुछ सप्‍ताह पहले चार दक्षिणी राज्‍यों की मस्जिदों के प्रमुखों की बैठक में मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) के लोगों को दस्‍तावेज दुरुस्‍त करने का हिदायत दिया गया था. इसी के तहत अब लोगों से कहा जा रहा है कि वे अपने दस्‍तावेजों की फिर से जांच करें. बेंगलुरु की जामा मस्जिद के इमाम मोहम्‍मद मकसूद इमरान का कहना है कि हमें एनआरसी या सीएबी से कोई समस्‍या नहीं है, क्‍योंकि हम भारत के नागरिक हैं. हम लोगों से सिर्फ एहतियात बरतने को कह रहे हैं ताकि अगर दस्‍तावेजों में किसी तरह के सुधार की जरूरत हो तो वे तुरंत आवेदन कर सकें. दक्षिण भारत में काफी लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आई कार्ड के डाटा में समानता नहीं है. भारतीय मुसलमानों को सीएबी से डरने की जरूरत नहीं है.

एनआरसी के लिए भरा गया सैंपल फॉर्म.


राज्‍यसभा में पेश किया गया CAB, हो रही है चर्चा
मोहम्‍मद मकसूद इमरान के मुताबिक, सीएबी पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने लोकसभा (Lok Sabha) में स्‍पष्‍ट कर दिया है कि इसका भारतीय मुसलमानों से कोई लेनादेना नहीं है. ये विधेयक पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख समुदाय के लोगों को भारत में संरक्षण का प्रावधान करता है. बता दें कि लोकसभा में सोमवार को सीएबी पारित हो चुका है. सरकार ने आज इसे राज्‍यसभा (Rajya Sabha) में भी पेश कर दिया है. अभी इस पर संसद (Parliament) के उच्‍च सदन में चर्चा चल रही है. इस विधेयक के जरिये नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्‍ताव है.

विपक्ष के मुताबिक, CAB और NRC में है सीधा संबंध
CAB का विरोध करने वालों का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिमों के खिलाफ है. इसका एनआरसी से सीधा संबंध है. ये बिल असम में एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर हुए हिंदुओं को संरक्षण दे रहा है. एनआरसी की अंतिम सूची से 19 लाख से ज्‍यादा लोग बाहर हो गए थे. इसमें हिंदुओं की संख्‍या लाखों में थी. इसका बीजेपी के ही कुछ नेताओं ने भी विरोध किया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने फैसला किया कि पूरे देश के साथ असम में दोबार एनआरसी की सूची बनाई जाएगी. इमरान ने बताया, 'दक्षिण भारत की सभी मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोगों को बताया जा रहा है कि वे अपने सभी दस्‍तावेजों में जन्‍म की तारीख और नाम एक करवाएं.' सभी मस्जिदों में लोगों की मदद के लिए काउंटर भी खोला गया है.



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First published: December 11, 2019, 1:54 PM IST
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