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कर्नाटक: चाणक्य विश्वविद्यालय विधेयक पास, विपक्ष का आरोप, औने-पौने दाम पर बेची गई जमीन

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस यूनिवर्सिटी को लाने वाले लोगों के आरएसएस से काफी करीबे रिश्ते हैं. लिहाजा सरकार पर बेहद कीमती ज़मीन को सस्ते दर पर देने का आरोप लगाया गया है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस यूनिवर्सिटी को लाने वाले लोगों के आरएसएस से काफी करीबे रिश्ते हैं. लिहाजा सरकार पर बेहद कीमती ज़मीन को सस्ते दर पर देने का आरोप लगाया गया है.

Chanakya University Bill: प्रस्तावित विश्वविद्यालय को 'भूमि घोटाला' करार देते हुए विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि हवाई अड्डे के नजदीक हरालूर के पास विश्वविद्यालय को दी गई ज़मीन मूल रूप से एक एयरोस्पेस टेक पार्क के लिए थी

  • News18Hindi
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    (दीपा बालाकृषणन)

    बेंगलुरु. कर्नाटक विधान परिषद ने बुधवार को चाणक्य विश्वविद्यालय विधेयक (Chanakya University Bill) पास कर दिया. इस बिल से बेंगलुरु में एक और प्राइवेट यूनिवर्सिटी का रास्ता साफ हो गया है. लेकिन विपक्ष इससे खुश नहीं है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस यूनिवर्सिटी को लाने वाले लोगों के आरएसएस से काफी करीबी रिश्ते हैं. लिहाजा विपक्ष ने सरकार पर बेहद कीमती ज़मीन को सस्ते दर पर देने का आरोप लगाया गया है. बता दें कि 116.6 एकड़ ये ज़मीन बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास है.

    बिल पास करने के दौरान विधान परिषद में जमकर हंगामा हुआ. कांग्रेस एमएलसी के आरोपों पर सरकार ने कहा कि आरएसएस को देने में क्या गलत है? क्या इसे इटालियंस को सौंप दिया जाना चाहिए? प्रस्तावित विश्वविद्यालय को ‘भूमि घोटाला’ करार देते हुए विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि हवाई अड्डे के नजदीक हरालूर के पास विश्वविद्यालय को दी गई ज़मीन मूल रूप से एक एयरोस्पेस टेक पार्क के लिए थी. बाद में सिद्धारमैया ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने सरकार से इस भूमि आवंटन को वापस करने का आग्रह किया है.

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    सिद्धारमैया ने कहा, ‘ये इस क्षेत्र के किसानों से अधिग्रहित भूमि है. करीब 116.16 एकड़ जमीन महज 50 करोड़ रुपये में दी जा रही है. उसी क्षेत्र में, KIADB ने किसानों से 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से जमीन खरीदी थी. सरकार ने सिर्फ उसी जमीन को खरीदने के लिए 175 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और सामान्य परिस्थितियों में, इसकी कीमत 300 रुपये से 400 करोड़ रुपये होनी चाहिए.’

    सिद्धारमैया ने आगे कहा कि सरकार ने पिछले साल अप्रैल में इस विश्वविद्यालय के लिए जमीन को मंजूरी दी थी, ऐसे समय में जब राज्य कोविड-नियंत्रण उपायों में व्यस्त था. उन्होंने कहा, ‘ये सिर्फ दिखाता है कि इसके पीछे अन्य ताकतें हैं. इस विश्वविद्यालय से जुड़े सभी व्यक्तियों की आरएसएस पृष्ठभूमि है. सरकार को अपनी जमीन इतनी कम दरों पर क्यों देनी चाहिए?’

    बता दें कि इस यूनिवर्सिटी की शुरुआत प्रोफेसर एमके श्रीधर ने की है, जो सेंटर फॉर एजुकेशनल एंड सोशल स्टडीज के प्रमुख हैं. श्रीधर अर्थशास्त्र के एक पूर्व प्रोफेसर और बैंगलोर विश्वविद्यालय में डीन, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का मसौदा तैयार करने वाली समिति के एक प्रमुख सदस्य थे. प्रोफेसर श्रीधर ने News-18 को बताया कि विश्वविद्यालय की योजना सामाजिक विज्ञान, मानविकी, गणित, बुनियादी विज्ञान, वाणिज्य और प्रबंधन में जून 2022 से शुरू होने वाले शैक्षणिक वर्ष से स्नातक, मास्टर और पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने की है.

    प्रोफेसर श्रीधर ने बताया कि इसे 2007 में एक सोसायटी के रूप में स्थापित किया गया था. उन्होंने कहा, ‘ये एक निजी विश्वविद्यालय हो सकता है लेकिन इसकी फंडिंग दान के तौर पर होती है. हम एनईपी पर आधारित अपना खुद का पाठ्यक्रम तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. समय के साथ, हम अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में कानून और शिक्षा, प्रदर्शन कला और खेल पर पाठ्यक्रम शुरू करेंगे. हम प्राचीन से आधुनिक तक भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर सही परिप्रेक्ष्य लाना चाहते हैं – वेदों से लेकर अन्य ज्ञान प्रणालियों तक – और साथ ही इसे वैश्विक परिदृश्य से जोड़ना चाहते हैं.’

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