कर्नाटक: एक्शन में आए शिवकुमार, क्या बचा पाएंगे कुमारास्वामी की सरकार?

आलाकमान के आदेश के बाद शिवकुमार तुरंत हरकत में आए और विधान सौदा पहुंच कर तीन बागी विधायकों को अपने साथ ले गए.

News18Hindi
Updated: July 6, 2019, 4:02 PM IST
कर्नाटक: एक्शन में आए शिवकुमार, क्या बचा पाएंगे कुमारास्वामी की सरकार?
कुमारस्वामी के साथ डीके शिवकुमार
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Updated: July 6, 2019, 4:02 PM IST
कर्नाटक में राजनीति संकट गहराता दिख रहा है. कांग्रेस और जेडीएस के कुल 14 विधायक इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं. ऐसे में वहां कुमरास्वामी की सरकार खतरे में आ गई है. इस बीच कर्नाटक सरकार के संकटमोचक रहे डीके शिवकुमार एक बार फिर सरकार बचाने की मुहिम में जुट गए हैं. कहा जा रहा है कि कांग्रेस अलाकमान ने डीके शिकुमार को विधायकों को मनाने की ज़िम्मेदारी दी है. आलाकमान के आदेश के बाद शिवकुमार तुरंत हरकत में आए और विधान सौदा पहुंच कर तीन बागी विधायकों को अपने साथ ले गए. इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक के उपमुख्‍यमंत्री जी. परमेश्‍वर और कांग्रेस के विधायकों की आपात बैठक बुलाई है. इस बीच वो बार-बार इन खबरों का खंडन कर रहे हैं कि किसी भी विधायक ने इस्तीफा दिया है.

कर्नाटक में कांग्रेस के संकटमोचक
पिछले साल कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद जमकर हंगामा हुआ था. बीजेपी और कांग्रेस के बीच सरकार बनाने को लेकर खींचतान मची थी. दोनों पार्टियां बहुमत का दावा कर रही थीं. राज्यपाल ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवा दी. इसके बाद तीन दिनों के अंदर उन्हें बहुमत साबित करने के लिए कहा गया. इस दौरान बीजेपी ने कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश की लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इस मुश्किल दौर में डीके शिवकुमार ने चाणक्य की भूमिका निभाई. विधायकों को उन्होंने तीन दिनों तक रिजॉर्ट में रखा और किसी को भी उन्होंने पाला नहीं बदलने दिया. इतना ही नहीं वो 'गायब' विधायक प्रताप गौड़ा पाटिल और आनंद सिंह को वापस लाने में कामयाब रहे थे. आखिरकार विधानसभा में बीजेपी बहुमत साबित नहीं कर पाई. लिहाजा येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा.

राहुल गांधी के साथ डीके शिवकुमार


जब गुजरात में अहमद पटेल को हार से बचाया
अगस्त 2017 में गुजरात राज्यसभा चुनाव में जब बीजेपी ने सोनिया गांधी के पॉलिटिकल सेक्रेटरी अहमद पटेल को हटाने की कोशिश की तो शिवकुमार ने गुजरात कांग्रेस विधायकों को शरण दी थी. उनपर इनकम टैक्स और ईडी के छापे भी पड़े लेकिन वे डगमगाए नहीं. अहमद पटेल जीते और शिवकुमार की जगह पार्टी में और मजबूत हुई.

महाराष्ट्र में भी बने थे संकटमोचक
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2002 में महाराष्ट्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली विलासराव सरकार गिरने ही वाली थी. हार को देखते हुए उन्होंने अपने सभी विधायक कर्नाटक भेज दिए, जहां एसएम कृष्णा की सरकार थी. कृष्णा ने विधायकों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी शहरी विकास मंत्री डीके शिवकुमार को दी थी. विश्वासमत के दिन वे उन्हें सुरक्षित मुंबई लाए और इस तरह विलासराव की सरकार बच पाई. इस घटना के बाद शिवकुमार देशभर के अखबारों में छा गए. इस घटना के बाद गांधी परिवार से उनके संबंध और मजबूत हो गए.

राजनीति की गहरी समझ


राजनीति का लंबा अनुभव
शिवकुमार वोक्कालिगा हैं और उन्होंने 1989 में कनकपुरा के सथनूर में पहला विधानसभा चुनाव जीता. इस चुनाव में उन्होंने कर्नाटक की राजनीति के धुरंधर एचडी देवगौड़ा को हराया था. 1990 में जब एस बंगरप्पा मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने शिवकुमार की काबिलियत को पहचाना और उन्हें जेल एंव होमगार्ड प्रोफाइल के साथ मंत्री बनाया. छोटी प्रोफाइल होने के बावजूद शिवकुमार ने अपनी काबिलियत के बूते पार्टी और सीनियर लीडर्स का ध्यान खींचा. उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 29 साल थी.

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First published: July 6, 2019, 3:32 PM IST
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