आखिर क्यों नहीं खत्म हो रहीं कर्नाटक सीएम येडियुरप्पा की मुश्किलें!

D P Satish | News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 3:10 PM IST
आखिर क्यों नहीं खत्म हो रहीं कर्नाटक सीएम येडियुरप्पा की मुश्किलें!
कर्नाटक (Karnataka) में आज भी येडियुरप्पा (BS Yedyurappa) सबसे लंबे और सबसे शक्तिशाली लिंगायत (Lingayat) नेता हैं, जो अपनी जाति के प्रति वफादार हैं जो कर्नाटक में बीजेपी (Bjp) की रीढ़ है.

कर्नाटक (Karnataka) में आज भी येडियुरप्पा (BS Yedyurappa) सबसे लंबे और सबसे शक्तिशाली लिंगायत (Lingayat) नेता हैं, जो अपनी जाति के प्रति वफादार हैं जो कर्नाटक में बीजेपी (Bjp) की रीढ़ है.

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बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री  (CM of Karnataka) का पदभार ग्रहण किए हुए लगभग डेढ़ महीने हो चुके हैं. 27-दिन के 'वन-मैन शो' के बाद, येडियुरप्पा ने 17 मंत्रियों का मंत्रिमंडल का गठन किया, हालांकि अभी भी 16 लोगों की जगह खाली है. नई दिल्ली में पार्टी के आलाकमान ने तीन मुख्यमंत्री बनाने में कोई खास देर नहीं की.

येडियुरप्पा भले ही मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उनकी पिछली सरकारों के उलट, बेंगलुरु (Bengaluru) में उनके निजी घर में बहुत अधिक गतिविधि नहीं है. केवल कुछ ही पार्टी के नेता और विधायक कर्नाटक बीजेपी में सत्ता के संतुलन में एक सूक्ष्म बदलाव का संकेत देते हुए, उनके घर जा रहे हैं. मुख्यमंत्री के हाथ बंधे हुए हैं और वह किसी  को भी मंत्री पद देने की स्थिति में नहीं हैं.

साल 2018 के विधानसभा चुनावों तक, येडियुरप्पा कर्नाटक में बीजेपी के निर्विवाद नेता थे. वह साल 2008 में दक्षिणी राज्य में बीजेपी को सत्ता में लाने वाले पहले व्यक्ति थे. उनका शब्द कानून था और जुलाई 2011 में खनन घोटाले में छोड़ने के लिए मजबूर होने तक वह लगभग स्वतंत्र थे.

उनके करीबियों ने दावा किया कि 'नरेंद्र मोदी और अमित शाह (Narendra Modi and Amit Shah) की केंद्रीकृत प्रणाली के तहत, येडियुरप्पा की अधिकांश स्वायत्तता और शक्तियों खो चुकी हैं. मंत्रिमण्डल गठन के पहले दौर के बाद, उनके पंख काट दिए गए हैं और आरएसएस (RSS) अपने अधिकार का प्रयोग कर रहा है.'

'उम्र को लेकर मिली छूट'

बीजेपी ( BJP) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा 'वह 76 वर्ष के हैं. उनकी उम्र के बावजूद, आलाकमान ने उन्हें छूट दी है. लेकिन वे अन्य नेताओं को तैयार करना चाहते हैं, जो परिवार के शासन को खत्म कर सके.वे सरकार की छवि को लेकर भी चिंतित हैं. हाईकमान 2008 और 2013 की घटना को दोहराना नहीं चाहता है. अगर येडियुरप्पा इस बात को समझते हैं तो वह सुरक्षित हैं, अन्यथा उन्हें आने वाले दिनों में अपना पद खाली करना पड़ सकता है.'

येडियुरप्पा के मुख्य प्रतिद्वंद्वियों में से एक बीएल संतोष (BL Santosh), अब नई दिल्ली में बीजेपी के एक सर्व-शक्तिशाली महासचिव (संगठन) हैं और इसने पार्टी के भीतर बीजेपी के दिग्गजों का दबदबा खत्म कर दिया है. येडियुरप्पा ने जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार को सफलतापूर्वक गिरा दिया हालांकि उनके द्वारा अपनाए गए तरीकों पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
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हालांकि, पार्टी को लगता है कि उन्हें सभी को साथ लेकर चलना चाहिए और बीजेपी को अन्य सभी हितों से ऊपर रखना चाहिए. यह येडियुरप्पा के साथ अच्छा नहीं हुआ है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उनके सामने कोई और विकल्प नहीं बचा है.

आज भी येडियुरप्पा सबसे लंबे और सबसे शक्तिशाली लिंगायत (Lingayat) नेता हैं, जो अपनी जाति के प्रति वफादार हैं जो कर्नाटक में बीजेपी की रीढ़ है. अपनी उम्र और स्वभाव को ध्यान में रखते हुए, आलाकमान अब उसी समुदाय के अन्य नेताओं को तैयार कर रहा है. हाल के लोकसभा चुनावों में, उसने कर्नाटक के अन्य सभी हिस्सों में आधार का विस्तार किया है और उसे लगता है कि अन्य प्रमुख जातियां जैसे वोक्कालिगा और एससी भी उनके साथ हैं.

17 विधायकों ने की मंत्री पद की मांग

आरएसएस के एक नेता ने कहा कि 'अगर कल्पना करें कि भले ही लिंगायतों के आधे लोग येडियुरप्पा के साथ हैं, अगर कोई सत्ता परिवर्तन होता है, तो बीजेपी अभी भी अन्य जातियों के समर्थन के साथ प्रबंधन कर सकती है. यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से एक झटका हो सकता है, लेकिन पार्टी के लिए यह एक अच्छा विकास है.'

सरकार गिराने में  येडियुरप्पा की मदद करने वाले जेडीएस और कांग्रेस  (JDS And Congress) के 17 विधायकों ने अब कहा कि उनमें से कुछ को मंत्री बनाया जाए. चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है, येडियुरप्पा कुछ और समय मांग सकते हैं. एक बार निर्णय लेने के बाद, उन पर अपने भविष्य पर भी निर्णय लेने का काफी दबाव होगा.

साथ ही, मंत्रिमंडल विस्तार का अगला दौर भविष्य का रास्ता तय करेगा. यदि वह अपने वफादारों को समायोजित कर ले जाते हैं, तो येडियुरप्पा जीते हुए माने जा सकते है अन्यथा, वह बिना शक्तियों के मुख्यमंत्री बने रहेंगे और वह उनकी कार्यशैली नही है.

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First published: August 29, 2019, 2:45 PM IST
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