मंदिर जाने के लिए पास चाहता था शख्स, PM मोदी ने किया जिक्र, अब करेंगे आजीवन मुफ्त यात्रा

मंदिर जाने के लिए पास चाहता था शख्स, PM मोदी ने किया जिक्र, अब करेंगे आजीवन मुफ्त यात्रा
कामेगौड़ा जो कि लेक मैन के नाम से जाने जाते हैं. (Image credit: Twitter/ @Ethirajans)

कामेगौड़ा कुछ समय पहले तक एक आम आदमी की तरह अपना जीवन बिता रहे थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के अपने रेडियो प्रोग्राम मन की बात (Mann Ki Baat) में जिक्र किये जाने के बाद उनका जीवन बदल गया.

  • Share this:
बेंगलुरु. कर्नाटक (Karnataka) में कामेगौड़ा (Kamegowda) जो कि लेक मैन (Lake Man) के नाम से जाने जाते हैं वह पास के मंदिर में जाने के लिए सिर्फ एक मुफ्त बस पास चाहते थे. लेकिन पिछले कई सालों से निस्वार्थ भाव से किए जा रहे उनके कामों के चलते अब कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (Karnataka State Road Transport Corporation) ने उन्हें जीवन भर के लिए मुफ्त पास देने का फैसला किया है. कामेगौड़ा कुछ समय पहले तक एक आम आदमी की तरह अपना जीवन बिता रहे थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के अपने रेडियो प्रोग्राम मन की बात (Mann Ki Baat) में जिक्र किये जाने के बाद उनका जीवन बदल गया. इसके बाद से ही देश के लोग उन्हें जानने लगे और उन्हें वास्तव में वह पहचान मिली जिसके वह हकदार थे.

पीएम मोदी ने मन की बात में कामेगौड़ा का जिक्र करते हुए बताया था कि 82 साल की उम्र में घर दसानाडोडी में 16 तालाब बनाए हैं. कर्नाटक के मंड्या जिले में मालावल्ली तालुका में दसानाडोडी गांव है. कामेगौड़ा ने पहला तालाब 40 साल पहले बनाया था उसके बाद से वह कभी भी नहीं रुके. कामेगौड़ा का एक वीडियो भी सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुआ था जिसमें कि उन्होंने बताया कि उन्होंने तालाब बनाने का फैसला क्यों किया.

ये भी पढ़ें- जून में लोगों ने उधार लेने के बजाए अकाउंट में ज्यादा पैसे जमा किए



वायरल हुए इस वीडियो में उन्होंने बताया कि वह पहले जंगल में भेड़ बकरियां चराया करते थे. तब उन्होंने देखा कि कैसे चिड़ियां और जंगली जानवर प्यासे हैं और उन्हें पीने के लिए पानी भी नहीं मिल पाता है. इसके बाद उन्होंने अपनी सैकड़ों भेड़-बकरियों को बेचकर तालाब बनाने की शुरुआत की. कामेगौड़ा ने कहा कि हर शख्स को आगे आकर इन जानवरों और पक्षियों के लिए पानी के स्त्रोत बनाने चाहिए.
100 किमी मंदिर जाने के लिए चाहिए था पास
कामेगौड़ा ने कहा कि उन्हें सिर्फ माले महादेश्वर मंदिर (जो कि उनके गांव से 10 किमी दूर है) और हनुमनथप्पा (जो 50 किमी है) बिना किसी मुश्किल के जाने के लिए बस पास की जरूरत थी.

ये भी पढ़ें- कोरोना के खिलाफ जंग जीत रहा है त्रिपुरा, बेहद कम डेथ रेट और शानदार है रिकवरी

कामेगौड़ा ने बताया कि भले ही पूरे देश को उनके बारे में मन की बात कार्यक्रम के बाद से पता चला हो लेकिन उनके गांव के लोगों ने उनका सम्मान किया है और उन्हें केरे (तालाब) उपनाम दिया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading