कर्नाटक के चुनाव परिणाम का महाराष्ट्र में असर, शिवसेना, NCP के सुर बदले

उद्धव अलग से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं लेकिन कर्नाटक के नतीजों से उद्धव को इस बात का एहसास हो चुका है कि मोदी लहर अभी इनती कम नहीं हुई है, जितना वो सोच रहे थे.

संदीप सोनवलकर
Updated: May 16, 2018, 5:45 PM IST
कर्नाटक के चुनाव परिणाम का महाराष्ट्र में असर, शिवसेना, NCP के सुर बदले
फाइल फोटो
संदीप सोनवलकर
Updated: May 16, 2018, 5:45 PM IST
कर्नाटक चुनाव के नतीजों का कहीं सीधा असर हुआ है तो वह है महाराष्ट्र पर. यहां कर्नाटक के नतीजों से बीजेपी की बांछे खिल गई हैं. शिवेसना और एनसीपी के सुर बदल गए हैं. जो शिवसेना कल तक बीजेपी को पानी पी-पी कर कोस रही थी, उसके प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ना सिर्फ बीजेपी को बधाई दी बल्कि यह भी कहा कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए.

दरअसल, उद्धव लगातार बीजेपी पर हमला करते रहे हैं और अलग से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं लेकिन कर्नाटक के नतीजों से उद्धव को इस बात का एहसास हो चुका है कि मोदी लहर अभी इतनी कम नहीं हुई है, जितना वो सोच रहे थे.

पालघर के लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने भी प्रत्याशी उतारा है. शिवसेना को भी लग रहा है कि यहां से बीजेपी प्रत्याशी श्रीनिवास वनगा जीत हासिल करेंगे. हालांकि उद्धव पार्टी के प्रत्याशी का प्रचार तो कर रहे हैं लेकिन संभलकर. वह इस प्रचार में मोदी का नाम नहीं ले रहे बल्कि राज्य सरकार पर बोल रहे हैं.

कर्नाटक में आए नतीजों का असर, गोदिया भंडारा के उपचुनाव में भी पड़ेगा. यहां बीजेपी से इस्तीफा देने वाले सांसद नाना पटोले को महसूस हो रहा है कि उन्होंने गलती कर दी. वहां एनसीपी ने अब कमजोर प्रत्याशी उतार दिया है, ऐसे में वहां फिर से बीजेपी से जीत सकती है. इतना ही नहीं नतीजे आते ही कांग्रेस के नेताओं ने तुरंत एनसीपी नेताओं के साथ बैठक की और ये भी कहा कि विधान परिषद सहित सारे चुनाव एनसीपी से मिलकर लड़ेगें.

दरअसल कांग्रेस नेताओं को लगने लगा है कि कर्नाटक चुनाव के बाद अब कांग्रेस की ताकत बारगेनिंग की नहीं रही तो जो पवार कहेंगे वही मान लिया जायेगा. शरद पवार भी नतीजे के ही दिन दिल्ली पहुंच गये. खबर आ रही है कि राहुल गांधी जल्दी ही शरद पवार से मुलाकात करेंगे. इतना ही नहीं राज ठाकरे को कुछ नही सूझ रहा तो कह रहे है कि ईवीएम ने मोदी को जिता दिया. जाहिर है कर्नाटक के नतीजों का असर पड़ोसी महाराष्ट्र की राजनीति पर लंबे समय तक रहेगा.

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