जम्मू प्रशासन ने पुलिस से मांगी कश्मीर की मस्जिदों की जानकारी

जम्मू कश्मीर में प्रशासन ने एक आदेश में पुलिस से कहा है कि वह घाटी में मस्जिदों का विवरण उसे तत्काल मुहैया कराए.

News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 11:46 PM IST
जम्मू प्रशासन ने पुलिस से मांगी कश्मीर की मस्जिदों की जानकारी
A Central Reserve Police Force (CRPF) personnel stands guard in front of closed shops next to the Jamai Masjid in Srinagar February 23, 2019. REUTERS/Danish Ismail
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Updated: July 29, 2019, 11:46 PM IST
जम्मू कश्मीर में प्रशासन ने एक आदेश में पुलिस से कहा है कि वह घाटी में मस्जिदों का विवरण उसे तत्काल मुहैया कराए. केंद्र ने हाल में राज्य में अतिरिक्त सुरक्षाबल भी भेजे हैं जिससे राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35ए के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी हैं.

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में 10,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुरक्षा कवायद का हिस्सा है और आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीडीपी इसे लेकर “होहल्ला मचा रही हैं.’’

घाटी में अनिश्चितता के बीच राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी अनुच्छेद 35ए के मुद्दे पर केंद्र से चीजों को स्पष्ट करने की मांग की है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का वक्त मांगा है.

महबूबा ने भी केंद्र द्वारा राज्य के निवासियों को विशेष अधिकार और सुविधाएं देने वाले कुछ संवैधानिक प्रावधानों को रद्द करने की कोशिशों को नाकाम करने के लिये एक संयुक्त मोर्चा बनाने का आह्वान किया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर


भाजपा की 30 जुलाई को बैठक
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जम्मू कश्मीर में राजनीतिक माहौल और वहां संभवत: इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को प्रदेश इकाई के कोर समूह के साथ बैठक करेगा.
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सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, भाजपा महासचिव राम माधव, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेता इस बैठक में शामिल होंगे. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा के बैठक की अध्यक्षता करने की संभावना है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महासचिव (संगठन) बी एल संतोष सहित कुछ वरिष्ठ नेता भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे . प्रदेश भाजपा के एक नेता ने कहा कि गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी जम्मू कश्मीर के नेताओं के साथ बैठक कर सकते हैं.

पुलिस से मांगी गई ये जानकारी
राज्य प्रशासन की तरफ से रविवार रात एक आदेश जारी कर श्रीनगर के पांच जोनल पुलिस अधीक्षकों से शहर में स्थित मस्जिदों और उनकी प्रबंध समितियों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है, जबकि एक अन्य आदेश में पुलिस अधिकारियों से टैक्सियों की यात्री क्षमता और पेट्रोल पंपों की ईंधन क्षमता की सूचना जुटाने को कहा गया है.

श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जोनल पुलिस अधीक्षकों को जारी किये गए आदेश के मुताबिक, “कृपया दिये गए प्रारूप में अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली मस्जिदों और प्रबंध समितियों के बारे में विवरण इस कार्यालय को तत्काल उपलब्ध कराएं जिससे उसे उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया जा सके.”

इसके अलावा अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे मस्जिद समिति के वैचारिक रुझान के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराएं.

प्रतीकात्मक तस्वीर


सोशल मीडिया पर वायरल हुई जानकारी
इन आदेशों को गोपनीय रखा जाना था लेकिन ये सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं. कुछ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक ये आदेश नहीं मिले हैं. आदेशों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

पिछले हफ्ते केंद्र ने केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) की 100 अतिरिक्त कंपनियां भेजने का फैसला लिया था. इन 100 कंपनियों (10,000 जवान) में 80 कंपनियां घाटी में तैनात की जाएंगी.

फारुक अब्दुल्ला ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया, “मौजूदा हालत पर चर्चा और आगे की राह के लिये आम सहमति बनाने के उद्देश्य से हमें गुरुवार को यहां सर्वदलीय बैठक करने की उम्मीद है.”

राज्य के नेताओं ने कही ये बातें
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का वक्त मांगा है लेकिन उनके दफ्तर से अभी जवाब नहीं आया है.

अब्दुल्ला ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री से मुलाकात का अनुरोध किया है और जम्मू कश्मीर में संवेदनशील हालात के मद्देनजर मुझे जल्द ही उनके कार्यालय से जवाब आने की उम्मीद है.”

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘हालिया घटनाक्रम के मद्देनजर जम्मू कश्मीर में लोगों के बीच दहशत फैल गयी है. मैंने डॉ. फारूक अब्दुल्ला साहब से सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया है. एक साथ होकर काम करने और एकजुट जवाब देने की जरूरत है . हम कश्मीरियों को साथ मिलकर खड़े होने की जरूरत है.’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने हालांकि इस पर यह कहते हुए जवाब दिया कि पार्टी राज्य के लिये केंद्र सरकार की मंशा को समझने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने ट्वीट किया, “जम्मू कश्मीर में दूसरे दलों के वरिष्ठ नेताओं से कश्मीर के मौजूदा हालात पर चर्चा से पहले केंद्र सरकार से राज्य को लेकर उसकी मंशा को समझने की आवश्यकता है और यह भी कि वह मौजूदा हालात को कैसे देखते हैं. जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस अभी इस पर ध्यान केंद्रित कर रही है.”

अतिरिक्त जवानों को लेकर राजनीतिक दल उठा रहे सवाल
प्रदेश के राजनीतिक दलों ने कहा है कि विशेष दर्जे के साथ छेड़छाड़ के किसी भी कदम का विरोध किया जाएगा. घाटी में 10 हजार अतिरिक्त जवानों को भेजे जाने के सवाल पर उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, “अतिरिक्त तैनाती सुरक्षा इंतजामों के लिये है...वे (राजनीतिक दल) 8-10 फीसदी मतदान प्रतिशत से अपनी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्हें डर है कि यहां हालात बदले तो बीते 30-40 सालों में बना उनका प्रभुत्व खत्म हो जाएगा.”

कश्मीर में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की पृष्ठभूमि में शहर में नए सुरक्षा नाकों का निर्माण भी देखा जा रहा है. पुराने शहर, पर्यटकों की ज्यादा आवाजाही वाले इलाकों में यहां कई बंकर बनाए गए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर


 

राज्यपाल ने सलाहकार ने कही ये बात
गृह मामलों पर राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वह हर समय अफवाहों और कयासों का जवाब नहीं दे सकते.

कुमार ने कहा, “अगर कोई सोशल मीडिया पर अफवाह या अफरा-तफरी मचा रहा है तो मुझे उसका जवाब नहीं देना चाहिए, यह उचित नहीं होगा. किसी ने कहा कि अतिरिक्त सुरक्षा बल आ रहे हैं. यह यहां उपलब्ध सुरक्षा तंत्र के लिये सोची समझी प्रतिक्रिया है.”

कुमार ने कहा, “अमरनाथ यात्रा पर ध्यान केन्द्रित करने के मद्देनजर सुरक्षा में कुछ कटौती की गई थी. इसलिये जरूरत पड़ने पर बातचीत के बाद बलों को थोड़ा बढ़ाने का अनुरोध किया गया. यह उस योजना का हिस्सा है जिस पर अभी अमल किया जाना है.”

इससे पहले हुई थी ये घोषणा
इससे पहले शनिवार को बडगाम में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के एक अधिकारी ने अपने कर्मचारियों से कहा था कि कश्मीर घाटी में “लंबे समय के लिये हालात खराब होने के पूर्वानुमान” को देखते हुए वो कम से कम चार महीने के लिए अपने घरों में राशन का भंडारण कर लें और दूसरे कदम उठा लें. इससे भी इन चर्चाओं को बल मिला.

रेलवे ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस पत्र का कोई आधार नहीं है और किसी अधिकारी को इसे जारी करने का अधिकार नहीं है. आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने कहा कि जिस अधिकारी ने आदेश दिया था उसका स्थानांतरण कर दिया गया है. उन्होंने और कोई विवरण नहीं दिया.

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First published: July 29, 2019, 11:46 PM IST
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