कश्मीर: सेब का बिजनेस करने वाले परेशान, रमजान के महीने में लोगों से खरीदने की अपील

कश्मीर में सेब के खरीददार नहीं
कश्मीर में सेब के खरीददार नहीं

श्रीनगर और घाटी के दूसरे शहरों में भी सेब (Apple) के खरीदार नहीं हैं. सेब का बिजनेस करने वालों का कहना है कि लोग अगर रमजान के महीने में सेब खरीदते हैं तो हम अपने घाटे को थोड़ा कम कर पाएंगे

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2020, 3:38 PM IST
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(मुफ्ती इस्लाह)

श्रीनगर. कश्मीर में कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते लॉकडाउन ने सेब (Apple) का बिजनेस करने वालों की कमर तोड़ कर रख दी है. इन्हें उम्मीद थी ऑफ सीज़न यानी मार्च-अप्रैल के महीने में सेब बेच कर उन्हें अच्छा मुनाफा होगा. लेकिन लॉकडाउन ने इन्हें परेशान कर दिया है. देश के दूसरे हिस्से तो दूर की बात है. यहां श्रीनगर और घाटी के दूसरे शहरों में भी सेब के खरीदार नहीं हैं.

रमज़ान में खरीदने की अपील
अब परेशान सेब के व्पापारियों ने स्थानीय लोगों से रमजान के महीने में सेब खरीदने की अपील की है जिससे कि इनका नुकसान कम हो सके. दरअसल इन्हें कोल्ड स्टोरेज में सेब रखने से काफी नुकसान हो रहा है. सेब की खेती करने वाले शाबाज़ ने कहा, 'एक 15 किलो के सेब के पैकेट को कोल्ड स्टोरेज में रखने के लिए हर महीने 30-32 रुपये का खर्चा आता है. अब आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि हमने पिछले 6 महीने में इसे रखने के लिए कितने पैसे खर्च कर दिए.'
लोग खरीदेंगे तो कम होगा घाटा


एक स्थानीय व्यापारी अफरोज़ ने कहा कि अगर लोग रमजान के महीने में सेब खरीदते हैं तो हम लोग अपने घाटे को थोड़ा कम पाएंगे. कश्मीरी लोग इफ्तार के दौरान रोजा तोड़ने के लिए खजूर, तरबूज, कस्तूरी, अंगूर और चेरी खाते हैं. अफरोज चाहते हैं कि वे अपने मेनू में सेब को भी शामिल करें.

सोशल मीडिया पर दे रहे हैं संदेश
शोपियां के एक सेब व्यापारी तनवीर उल हक ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक मैसेज दिया. जिसमें स्थानीय लोग से अन्य फलों के बजाय सेब खरीदने को कहा गया. उन्होंने कहा, 'मैंने कश्मीरियों से अपील की कि है कि वे जितना सेब खाएंगे हमारे उत्पादकों को उतना कम नुकसान होगा और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए आपकी मदद की जरूरत है.'

कश्मीर में लोग 2.2 मिलियन टन सेब अक्टूबर से बेचना शुरू करते हैं. लेकिन करीब 1.3 मिलियन टन को वो अगले 6 महीने में बेचने के लिए रख लेते हैं. इस बार भी उन्होंने ऐसा किया. लेकिन अब उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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