कश्मीरी, डोगरी, हिंदी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाएगा

कश्मीरी, डोगरी, हिंदी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाएगा
एलजी मनोज सिन्हा की फाइल फोटो (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Central Cabinet) की बैठक में राजभाषा विधेयक 2020 (Official language bill) लाने के फैसले को मंजूरी दी गई.

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  • Last Updated: September 2, 2020, 6:06 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल (Central Cabinet) ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के लिए राजभाषा विधेयक (Official language bill) लाने को मंजूरी दे दी जिसके तहत उर्दू और अंग्रेजी (Urdu and English) के अलावा अब कश्मीरी, डोगरी और हिंदी को भी इस केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) की आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाएगा. इस फैसले की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Union Minister Prakash Javadekar) ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक 2020 (Jammu and Kashmir Official Language Bill 2020) को संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) में पेश किया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में राजभाषा विधेयक 2020 (Official language bill) लाने के फैसले को मंजूरी दी गई. जावड़ेकर ने विधेयक की विस्तृत जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार दिया कि इस बारे में संसद (Parliament) में विस्तार से चर्चा होगी. केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह (Union Minister Jitendra Singh) ने कहा कि सरकार ने डोगरी (Dogri), हिन्दी और कश्मीरी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में डालकर क्षेत्र की जनता की एक बहुत पुरानी और लंबित मांग (A very old and pending demand) को पूरा किया है.

"यह गत 5 अगस्त के निर्णय के अनुरूप समानता की भावना को भी प्रतिबिंबित करता है"
केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा, ‘‘ऐसा करके सरकार ने न सिर्फ क्षेत्र की जनता की ओर से लंबे समय से की जा रही एक मांग पूरी की है बल्कि यह गत पांच अगस्त के निर्णय के अनुरूप समानता की भावना को भी प्रतिबिंबित करता है.’’
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बता दें कि पिछले साल यानि 2019 में 3 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया था. इस कदम का स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था. हालांकि इस कदम के संभावित विरोध का अनुमान करके पहले ही सरकार ने कश्मीर के सभी प्रमुख नेताओं को नजरबंद कर दिया था.
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