शुजात बुखारी: कश्‍मीर का वह पत्रकार जिसने झेले तीन हमले, दो बार हुआ किडनैप

कश्‍मीर में लगभग एक दशक बाद फिर से पत्रकार पर हमला हुआ है. इससे पहले 2003 में परवेज मुहम्‍मद सुल्‍तान की बंदूकधारियों ने हत्‍या कर दी थी. साल 2000 में एक बम धमाके में फोटो जर्नलिस्‍ट प्रदीप भाटिया की मौत हो गई थी.

News18Hindi
Updated: June 14, 2018, 9:32 PM IST
शुजात बुखारी: कश्‍मीर का वह पत्रकार जिसने झेले तीन हमले, दो बार हुआ किडनैप
राइजिंग कश्‍मीर अखबार के एडिटर शुजात बुखारी की गुरुवार को गोली मारकर हत्‍या कर दी गई
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Updated: June 14, 2018, 9:32 PM IST
सीनियर जर्नलिस्ट और राइजिंग कश्‍मीर अखबार के एडिटर शुजात बुखारी की गुरुवार को गोली मारकर हत्‍या कर दी गई. अज्ञात हमलावरों ने प्रेस कॉलोनी में उनकी गाड़ी को निशाना बनाया. अस्‍पताल ले जाते समय बुखारी की मौत हो गई. वहीं, उनका ड्राइवर और एक सुरक्षाकर्मी घायल हो गया. अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक पर प्रेस एनक्‍लेव में इफ्तार पार्टी के बाद वह दफ्तर से जा रहे थे तभी उन्‍हें गोली मारी गई. उन पर पहले भी हमला हुआ था. साल 2000 में हमले के बाद उन्‍हें सुरक्षा दी गई थी.

बुखारी लगभग एक दशक से श्रीनगर से अपना अखबार चला रहे थे. उनके पिता भी पत्रकार थे. महबूबा सरकार में उनके भाई सैयद बशरत बुखारी कश्‍मीर के कानून मंत्री हैं. वह मानवाधिकारों के हनन पर खुलकर लिखते थे. बुखारी कश्‍मीर की समस्‍या के समाधान के लिए बातचीत के हमेशा समर्थक रहे. वह कश्‍मीर में 'द हिंदू' अखबार के ब्‍यूरो चीफ भी रहे थे. उन पर तीन बार हमले हुए.

फ्री प्रेस कश्‍मीर की रिपोर्ट के अनुसार, आठ जुलाई 1996 को सरकार समर्थक आतंकी ग्रुप इख्‍वान ने अनंतनाग जिले से 19 पत्रकारों का अपहरण किया था और उन्‍हें सात घंटे तक बंधक बनाए रखा था. इन पत्रकारों में बुखारी भी शामिल थे. अंतरराष्‍ट्रीय एनजीओ रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने एक बार ifex.org को बताया था कि 2006 में बुखारी को दो लोगों ने अगवा कर लिया था. शहर से दूर ले जाकर उन्‍होंने गोली मारने की कोशिश की लेकिन बंदूक जाम होने से वह बच गए थे.

कश्मीर में शांति बहाल करने को लेकर शुजात बुखारी सक्रिय लंबे समय से सक्रिय रहे थे. उन्‍होंने कश्‍मीर घाटी में शांति के लिए कई कॉन्‍फ्रेंस आयोजित कराने में अहम भूमिका निभाई थी. वह पाकिस्‍तान के साथ बातचीत के लिए ट्रेक 2 प्रकिया के भी हिस्‍सा थे.

कश्‍मीर में लगभग एक दशक बाद फिर से पत्रकार पर हमला हुआ है. इससे पहले 2003 में परवेज मुहम्‍मद सुल्‍तान की बंदूकधारियों ने हत्‍या कर दी थी. साल 2000 में एक बम धमाके में फोटो जर्नलिस्‍ट प्रदीप भाटिया की मौत हो गई थी.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घटना पर दुख जताया. उन्‍होंने ट्वीट किया, 'राइजिंग कश्‍मीर के एडिटर शुजात बुखारी की हत्‍या कायराना हरकत है. यह कश्‍मीर की समझदार आवाजों को शांत करने की कोशिश है. वह साहसी और निडर पत्रकार थे. गहरे सदमे और दर्द में हूं. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं.' कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भी बुखारी की हत्‍या पर दुख जताया.

जम्‍मू-कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि शुजात बुखारी की मौत से वह सदमे और गहरे दुख में हैं. ईद से ठीक पहले आतंकवाद का जघन्‍य कृत्‍य है, जिसकी निंदा की जाती है. नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्‍दुल्‍ला ने भी बुखारी की मौत पर संवेदना जताई है.
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