जम्मू-कश्मीर में जमीनों की खरीद से जुड़े कानूनों के निरस्त करने के फैसले का कश्मीरी पंडितों ने जताई खुशी


कश्मीरी पंडितों का संगठन रुट्स इन कश्मीर,जम्मू-कश्मीर विचार मंच और यूथ फॉर पानुन कश्मीर ने मोदी सरकार के इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है.
कश्मीरी पंडितों का संगठन रुट्स इन कश्मीर,जम्मू-कश्मीर विचार मंच और यूथ फॉर पानुन कश्मीर ने मोदी सरकार के इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है.

ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा ने भी केेंद्र की मोदी सरकार के इस फैसले का हार्दिक स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए डोमिसाइल और परमानेंट रेसिडेंशियल क्लॉज को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 8:53 PM IST
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श्रीनगर. कृषि भूमि को छोड़कर कोई भी भारतीय बिना डोमिसाइल के अब जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में जमीन ख़रीद सकता है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बाबत 27 अक्टूबर को 11 पुराने कानूनों को निरस्त करने का फैसला किया था. गृह मंत्रालय ( Ministry of Home Affairs) ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के तीसरे आदेश 2020 के तहत इन कानूनों को निरस्त किया था. मोदी सरकार के इस फैसले का कश्मीरी पंडितों ने स्वागत किया है.

कश्मीरी पंडितों का संगठन रूट्स इन कश्मीर,जम्मू-कश्मीर विचार मंच और यूथ फॉर पनुन कश्मीर ने मोदी सरकार के इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है. जम्मू-कश्मीर विचार मंच के प्रेसिडेंट ने कहा कि कश्मीरी पंडित हमेशा किसी भी समुदाय या क्षेत्रीय रुचि से ऊपर भारत के अधिकारों और हितों का समर्थन करता आया है. कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर से पलायन के विकल्प को चुना लेकिन देश की एकता और संप्रभुता के साथ समझौता नहीं किया.

वन नेशन, वन लॉ और वन रूल
वहीं रूट्स इन कश्मीर के प्रवक्ता राहुल महनूरी ने कहा कि देश के अलग-अगल हिस्सों से आये सैनिक कश्मीर में आतंकवादियों और जिहादियों से लड़ते है, कई सैनिकों ने तो अपने प्राणों की आहुति दी है. लेकिन यह अन्यायपूर्ण कदम था कि सुरक्षा के जवान या शहीदों के परिवारवाले यहां जमीन नहीं खरीद सकते. जबकि महिला कम्यूनिटी एक्टिविस्ट नेत्री भट्ट ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे वन नेशन, वन लॉ और वन रूल को स्थापित करने में मदद मिलेगी. यहीं नहीं कश्मीर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय लोगों को फायदा होगा. यूथ फॉर पनुन कश्मीर के सचिव विट्ठल चौधरी ने कहा कि कश्मीर के जिहादियों को शिकस्त देने के लिए यह कदम उठाना बहुत जरूरी था. जो लोग कश्मीर में जमीन खरीद रहे है उन्हें हर संभव मदद और सुविधाएं देनी चाहिए.
ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा ने भी किया स्वागत


ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा ने भी केंद्र की मोदी सरकार के इस फैसले का हार्दिक स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए डोमिसाइल और परमानेंट रेसिडेंशियल क्लॉज को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया. इसके जरिए अलगावादियों की रोटियां सेकी जाती थीं. वास्तव में कश्मीर की यह सबसे बड़ी समस्याओं में से एक था. यह बहुत गलत था कि कोई कश्मीर में आजीवन काम करे और वह वहां अपना आशियाना नहीं बना सकता. जमीन खरीद से जुड़े कानूनों को निरस्त किए जाने से अब कश्मीर में औद्योगिक इकाइयां लगेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. कृषि जमीनों को इस जद से बाहर रखने से अंधाधुंध शहरीकरण पर भी रोक लग पाएगी. यही नहीं क्षेत्र में धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र को पंख भी लगेंगे. निजी निवेश आने से कश्मीर के लिए यह गेम चेंजर साबित होगा.



इन कानूनों को केंद्र सरकार ने किया था निरस्त
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर एलिनेशन ऑफ़ लैंड एक्ट, जम्मू एंड कश्मीर बिग लैंडेड इस्टेट्स एबोलिशन एक्ट, जम्मू एंड कश्मीर कॉमन लैंड्स (रेगूलेशन) एक्ट, 1956 को निरस्त करने का ऐलान किया था. पहले के अधिकांश भूमि क़ानूनों को निरस्त करने का फैसला केंद्र सरकार ने किया था, जिसमें जम्मू एंड कश्मीर ऑफ़ प्रिवेंशन ऑफ़ फ्रैग्मेंटेशन ऑफ़ एग्रीकल्चर होल्डिंग एक्ट, 1960 भी शामिल है. इसके अलावा जम्मू एंड कश्मीर ऑन कन्वर्सन ऑफ़ लैंड एंड एलिनेशन ऑफ़ आर्चार्ड एक्ट, 1975. जम्मू- कश्मीर राइट ऑफ़ प्रायर परचेज एक्ट, 1936; जम्मू कश्मीर टिनेंसी (स्टे ऑफ़ इजेक्टमेंट प्रोसिडिंग्स) एक्ट 1966 का खंड 3; द जम्मू एंड कश्मीर यूटिलाइज़ेशन ऑफ़ लैंड एक्ट 2010; और द जम्मू एंड कश्मीर अंडरग्राउंड यूटिलिटिज़ एक्ट को भी निरस्त किया जा चुका है.

गौरतलब  है कि गत वर्ष 5 अगस्त को मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करते हुए इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में विभाजित कर दिया था.अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था.अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले, जम्मू और कश्मीर के स्थायी निवासियों को छोड़कर कोई भी यहां ज़मीन नहीं ख़रीद सकता था.
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