कश्मीर घाटी ने देश को दिए आतंकियों से 100 गुना ज्यादा रक्षक

बारामूला के हैदरबेग स्थित सेना की 10 सेक्टर मुख्यालय में सेना की भर्ती चल रही है. 10 जुलाई से शुरू हुई यह भर्ती 16 जुलाई तक चलेगी. इसमें कश्मीर के युवा भारी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं.

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Updated: July 16, 2019, 4:12 PM IST
कश्मीर घाटी ने देश को दिए आतंकियों से 100 गुना ज्यादा रक्षक
कश्मीर में सेना भर्ती में 5,366 स्थानीय युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Updated: July 16, 2019, 4:12 PM IST
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और बारामूला जैसे जिलों का नाम जब लोगों के जहन में आता है तो उनके दिमाग में पहली तस्वीर आंतक के राह पर जा रहे युवाओं या आंतकी मुठभेड़ की आती है. लेकिन अब यह तस्वीर बदल गई है. घाटी में युवा दहशतगर्द बनने के बजाए देश के लिए आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ना चाहते हैं. ऐसे युवाओं की संख्या आतंक के राह पर जाने वालों से 100 गुना से ज्यादा हो गई है.

अब आतंकवाद के घने साये में लिपटी घाटी में बदलाव की बयार दिखाई देने लगी है. यहां हजारों युवा सेना में शामिल होने के लिए प्रैक्टिस कर रहे हैं. बारामूला के हैदरबेग स्थित सेना की 10 सेक्टर मुख्यालय में सेना की भर्ती चल रही है. 10 जुलाई से शुरू हुई यह भर्ती 16 जुलाई तक चलेगी. इसमें कश्मीर के युवा भारी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं. उनके सामने आतंक की राह पर जाने वाले युवाओं की सख्या नाममात्र रह गई है. इस भर्ती में 5366 स्थानीय युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है. वे रोज अपना फिजिकल टेस्ट दे रहे हैं.

100 गुना ज्यादा सेना में शामिल हो रहे युवा
एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन 5 हजार से ज्यादा युवाओं की तुलना में इस साल अब तक करीब 50 युवा आतंक की राह पर गए हैं. इनमें अनंतनाग से 9, शोपियां से 9, कुलगाम से 9, पुलवामा से 14, गंदरबल से 2, बडगाम से 4, बांदीपुरा से एक और बारामूला से 3 युवा आतंकी की राह पर गए हैं. वहीं, बारामूला में चल रही सेना भर्ती में बांदीपोरा, कुपवाड़ा, गांदरबल, बारामुला, श्रीनगर, बडगाम, शोपियां, पुलवामा, अनंतनाग और कुलगाम से 5,000 से ज्यादा युवा शामिल हुए हैं.

सेना में शामिल होकर देश की रक्षा करना चाहते हैं घाटी के युवा


‘देश की रक्षा करना चाहते हैं घाटी के युवा’
एनबीटी ने आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत से बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि घाटी में आतंकियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. जो लोग दहशतगर्द के रास्ते पर जा रहे थे वह भी कम हो रहे हैं. बस कुछ लोग ही हैं जो सोशल मीडिया पर अपने फ्रेंड सर्किल से प्रभावित होकर आतंक की राह पर जा रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या लगातार घट रही है. सेना प्रमुख ने कहा कि सेना की भर्ती में युवा जिस तरह हिस्सा ले रहे हैं. उससे साफ है कि वह आतंकियों की बंदूक थामने की बजाह सेना में शामिल होकर देश की रक्षा करना चाहते हैं.
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पत्थरबाजी की मात्र 40 घटनाएं
कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में भी कमी आई है. जहां 2016 में कश्मीर में 2600 पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आई थीं. वहीं, इस साल के शुरूआती छह महीनों में करीब 40 घटनाएं हुई हैं. गृह मंत्रालय के आकंड़ों को अनुसार, साल 2016 में पत्थरबाजी की 2653 घटनाएं हुईं, जिसमें पुलिस ने 10,571 लोगों को गिरफ्तार किया. साल 2017 में 1412 घटनाएं हुईं, इसमें 2838 पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया गया. 2018 में 1458 पत्थरबाजी के घटनाएं हुईं. जिसमें 3797 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

पत्थरबाजी की घटना में कमी


सेना के प्रयास से सही राह पर लौट रहे युवा
बता दें कि पिछले साल बांदीपुरा में हुई सेना की भर्ती में 9,000 से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया था. जबकि पिछले साल आतंक की राह पर जाने वाले युवाओं की सख्या 214 थी. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आतंक की राह पर जाने वाले युवा भी वापस लौट कर आ रहे हैं. उनकी सुरक्षा की दृष्टि से हम उनकी पहचान जाहिर नहीं करते. लेकिन सेना, पुलिस और सरकार के प्रयासों से घाटी में युवा मेन स्ट्रीम में वापस आ रहे हैं. इतना ही नहीं माता-पिता की अपील के बाद भी युवा वापस लौट रहे हैं.

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First published: July 16, 2019, 2:48 PM IST
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