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कठुआ केस: कोर्ट ने बताया, विशाल जंगोत्रा को क्यों करना पड़ा बरी?

कठुआ केस: कोर्ट ने बताया, विशाल जंगोत्रा को क्यों करना पड़ा बरी?

पठानकोट स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी सांझी राम समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद और तीन पुलिसवालों को 5-5 साल की सज़ा सुनाई है. (फोटो-News18 Creative)

पठानकोट स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी सांझी राम समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद और तीन पुलिसवालों को 5-5 साल की सज़ा सुनाई है. (फोटो-News18 Creative)

विशेष अदालत ने कहा कि जंगोत्रा द्वारा ‘एलिबाई’ (अनुपस्थति) के पेश सबूत झूठे या फर्जी या गलत हैं, यह साबित करने के महत्वपूर्ण काम को पूरा करने के लिए पक्के सबूत पेश करने में अभियोजन पक्ष असफल रहा है, इसलिए उसे बरी किया जाता है.

    जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ हुए रेप और हत्या के मामले में आरोपियों की सजा का ऐलान हो चुका है. पठानकोट स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी सांझी राम समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद और तीन पुलिसवालों को 5-5 साल की सज़ा सुनाई है. वहीं, एक अन्य आरोपी विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया गया. विशाल मुख्य आरोपी सांझी राम का बेटा है. कोर्ट ने बताया कि सबूतों के अभाव में विशाल को बरी किया गया. अभियोजन पक्ष ये साबित करने में नाकाम रहे कि घटना के वक्त विशाल मेरठ में नहीं, बल्कि कठुआ में था.

    पठानकोट स्पेशल कोर्ट ने कहा कि कठुआ गैंगरेप और हत्याकांड की जांच के दौरान आरोपी विशाल जंगोत्रा के अनुपस्थिति के दावे को खारिज करने में अभियोजन पक्ष असफल रहा. इसी वजह से वह बरी हुआ है. कोर्ट ने ये टिप्पणी करते हुए कहा कि जम्मू पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जंगोत्रा के खिलाफ सबसे मजबूत सबूत छुपाया.

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    सोमवार को आया डिटेल ऑर्डर
    सोमवार को अपनी डिटेल आदेश में अदालत ने कहा, 'इस अदालत का मानना है कि विशाल जंगोत्रा के खिलाफ अभियोजन पक्ष के मुकदमे में बड़ी खामी है. इस संबंध में जांच के स्तर पर ही पहली नज़र में अभियोजन पक्ष विशाल जंगोत्रा की ओर से पेश कहीं और मौजूद रहने के दावे को खारिज करने में नाकाम रहा है.'

    अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा इंस्पेक्टर केवल किशोर से जिरह नहीं करने की ओर भी इशारा किया. इस केस में जंगोत्रा की कथित भूमिका के मामले की ज्यादातर जांच किशोर ने ही की थी.


    विशाल जंगोत्रा से ठीक से पूछताछ नहीं की गई
    कोर्ट ने कहा, 'लगभग सभी जांच अधिकारियों ने अपने बयान में कहा है कि विशाल से जुड़ी जांच इंस्पेक्टर केवल किशोर ने की थी. अभियोजन पक्ष के लिए जरूरी था कि वह इस मामले में आरोपी विशाल जंगोत्रा के खिलाफ मजबूत केस बनाने के लिए इंस्पेक्टर केवल किशोर से जिरह करता. लेकिन ऐसा नहीं किया गया.’ अदालत ने कहा कि इस मामले में 'पक्का अभियोजन पक्ष की कमी रही'.

    हालांकि, पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि किशोर इस मामले से जुड़ी चीजों की जब्ती करने वाली टीम में शामिल थे. क्राइम ब्रांच का ये भी कहना है कि टीम के अन्य सदस्यों ने अदालत के समक्ष गवाही दी है और उनसे जिरह भी हुई है.

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    विशाल परीक्षाओं में शामिल हुआ था, इसकी पुष्टि नहीं
    जांच की कुछ मूल खामियों को बताते हुए कोर्ट ने कहा कि सब-इंस्पेक्टर उरफान वानी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उत्तर प्रदेश के मीरापुर से जंगोत्रा को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस ने उसके कॉलेज या परीक्षा केंद्र से कोई पूछताछ नहीं की. ये पता नहीं किया गया कि विशाल अपनी परीक्षाओं में शामिल हो रहा था या नहीं. उसकी परीक्षा 9 जनवरी, 2018 को शुरू हुई थी.

    अदालत ने कहा, 'सब-इंस्पेक्टर उरफान वानी ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्होंने जंगोत्रा की मकान मालकिन सुमन शर्मा का बयान उर्दू में दर्ज किया..... और उन्हें नहीं पता है कि सुमन शर्मा उर्दू जानती हैं या नहीं.' गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में उर्दू आधिकारिक भाषा है. पुलिस, आरोपी और गवाह दोनों का बयान दर्ज करने के लिए इसी का इस्तेमाल करती है.

    निजी चैनल की खबर की भी नहीं किया वेरिफाई
    अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों ने एक निजी चैनल पर दिखाई गई खबर की सत्यता की भी पुष्टि नहीं की, जिसमें दावा किया गया था कि घटना के वक्त जंगोत्रा मीरापुर में मौजूद था. यह खबर एसबीआई के एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के आधार पर दिखाई गई थी.

    नहीं लिया किसी पुलिस अधिकारी का बयान
    कोर्ट ने कहा कि एसबीआई मीरापुर के किसी अधिकारी का इस संबंध में बयान दर्ज नहीं किया गया. उन्होंने (वानी) यह भी स्वीकार किया कि मीरापुर एटीएम के कैमरे का हार्डडिस्क जब्त करने के बाद, उस हार्डडिस्क को किसी मजिस्ट्रेट ने सील नहीं किया था. क्राइम ब्रांच ने हार्डडिस्क जब्त करने के बाद स्थानीय मजिस्ट्रेट से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने जांच का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया

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    क्राइम ब्रांच ने छिपाए ये अहम सबूत
    अदालत ने कहा कि जांच के दौरान वानी ने 14 जनवरी, 2018 की प्रायोगिक परीक्षा की कॉपी भी जब्त की थी, उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए था. कोर्ट ने कहा, लेकिन जम्मू पुलिस की क्राइम ब्रांच ने वह कॉपी कभी अदालत के सामने पेश नहीं की. उसे देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि क्राइम ब्रांच ने मजबूत सबूत छुपा लिए.

    अदालत ने अंत में कहा कि इसके अनुरूप रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य सबूतों को देखते हुए एक निष्कर्ष निकलता है कि वारदात के समय आरोपी विशाल जंगोत्रा मुजफ्फरनगर के मीरापुर में मौजूद था न कि कठुआ में.


    विशेष अदालत ने कहा कि जंगोत्रा द्वारा ‘एलिबाई’ (अनुपस्थति) के पेश सबूत झूठे या फर्जी या गलत हैं, यह साबित करने के महत्वपूर्ण काम को पूरा करने के लिए पक्के सबूत पेश करने में अभियोजन पक्ष असफल रहा है, इसलिए उसे बरी किया जाता है. (PTI इनपुट के साथ)

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    Tags: Gang Rape, Jammu kashmir, Kathua rape case

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