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कठुआ गैंगरेप-मर्डर केस में 3 दोषियों को उम्रकैद, सबूतों से छेड़छाड़ पर 3 पुलिसवालों को 5 साल की सजा

कठुआ गैंगरेप-मर्डर केस में 3 दोषियों को उम्रकैद, सबूतों से छेड़छाड़ पर 3 पुलिसवालों को 5 साल की सजा

Kathua Gangrape Murder case: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में मंदिर के सेवादार और ग्राम प्रधान सांझी राम ने बच्ची के मंदिर में ही बंधक बनाकर रखा था. वहां बच्ची के साथ पूरे 8 दिन तक रेप किया गया. 15 पन्नों की चार्जशीट में इसका जिक्र है.

Kathua Gangrape Murder case: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में मंदिर के सेवादार और ग्राम प्रधान सांझी राम ने बच्ची के मंदिर में ही बंधक बनाकर रखा था. वहां बच्ची के साथ पूरे 8 दिन तक रेप किया गया. 15 पन्नों की चार्जशीट में इसका जिक्र है.

Kathua Gangrape Murder case: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में मंदिर के सेवादार और ग्राम प्रधान सांझी राम ने बच्ची के मंदिर में ही बंधक बनाकर रखा था. वहां बच्ची के साथ पूरे 8 दिन तक रेप किया गया. 15 पन्नों की चार्जशीट में इसका जिक्र है.

    जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बंजारा समुदाय की आठ साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले में पंजाब स्थित पठानकोट स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया. इस मामले में कोर्ट ने तीन दोषियों सांजी राम, दीपक खजूरिया और परवेश कुमार को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. इन तीनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपये जुर्माने के तौर पर भी देना होगा.

    वहीं तीन पुलिस वालों सुरेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल तिलक राज और आनंद दत्ता को 5-5 साल की कैद और 50 हज़ार जुर्माने की सज़ा सुनाई है. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में तीनों पुलिस वालों छह महीने और जेल में बिताने होंगे. बता दें अदालत ने इस मामले में 7 आरोपियों में से 6 को दोषी करार दिया था. वहीं सांजी राम के बेटे विशाल को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है.

    अदालत ने इस मामले में तीनों पुलिसकर्मियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 201 (सबूत मिटाने) का दोषी करार दिया है. इसमें अधिक से अधिक 3 साल की सजा होती है. वहीं, मुख्य आरोपी सांजी राम पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 376 (रेप), 328 (अपराध करने के आशय से जहर या नशीला पदार्थ खिलाना), 343 (तीन या उससे अधिक दिनों के लिए बंदी बनाए रखना) लगाई गई हैं.

    वकीलों ने बताया कि जिस जगह अपराध हुआ, उस मंदिर की देखभाल करने वाले सांजीराम, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और आम नागरिक प्रवेश कुमार को रणबीर दंड संहिता की आपराधिक षड्यंत्र, हत्या, सामूहिक बलात्कार और सबूत नष्ट करने संबंधी धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया.

    पिछले साल जून में शुरू हुई थी पठानकोट में सुनवाई
    देश-दुनिया को झकझोर देने वाले इस मामले में बंद कमरे में सुनवाई 3 जून को पूरी हुई थी. कठुआ में फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर अदालत और उसके आसपास कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किये गए थे. 15 पन्नों की चार्जशीट के अनुसार, पिछले साल 10 जनवरी को अगवा की गई आठ साल की बच्ची को कठुआ जिले के एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर उसके साथ कई दिनों तक दरिंदगी की गई. बाद में उसकी हत्या कर दी गई.

    मामले में रोजाना हुई सुनवाई
    मामले में रोजाना आधार पर सुनवाई पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट में जिला और सत्र अदालत में पिछले साल जून के पहले सप्ताह में शुरू हुई थी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को जम्मू कश्मीर से बाहर भेजने का आदेश दिया था, जिसके बाद जम्मू से करीब 100 किलोमीटर और कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पठानकोट की अदालत में मामले को भेजा गया.

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    सुप्रीम कोर्ट का आदेश तब आया था, जब कठुआ में वकीलों ने क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को इस सनसनीखेज मामले में चार्जशीट दाखिल करने से रोका था. इस मामले में अभियोजन दल में जे के चोपड़ा, एस एस बसरा और हरमिंदर सिंह शामिल थे.


    यह लोग हैं दोषी
    क्राइम ब्रांच ने इस मामले में ग्राम प्रधान सांजी राम, उसके बेटे विशाल, किशोर भतीजे व उसके दोस्त आनंद दत्ता को गिरफ्तार किया था. इस मामले में दो विशेष पुलिस अधिकारियों दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था. सांजी राम से कथित तौर पर चार लाख रुपये लेने और महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट करने के मामले में हेड कांस्टेबल तिलक राज और एसआई आनंद दत्ता को भी गिरफ्तार किया गया था.

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    जिला और सत्र जज ने 8 आरोपियों में से 7  के खिलाफ रेप और हत्या के आरोप तय किये थे. किशोर आरोपी के खिलाफ मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है. उसकी उम्र संबंधी याचिका पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट सुनवाई करेगा.


    समुदाय को गांव से हटाने के लिए बच्ची को बनाया शिकार
    कठुआ के गांव रासना के आसपास हाल के वक्त में अल्पसंख्यक बकरवाल समुदाय के कुछ परिवार आकर बस गए थे. इसी गांव के देवीस्थान मंदिर का सेवादार सांजी राम इस समुदाय के लोगों को गांव से हटाना चाहता था. उसी ने ये पूरी साज़िश रची. राजस्व अधिकारी के पद से रिटायर सांजी राम पड़ोस की 8 साल की एक बच्ची को रोज पशुओं को चराने के लिए जंगल जाते हुए देखता था. इसी के बाद उसके मन में उस बच्ची को लेकर पाप जागा. उस हैवान ने अपने नाबालिग भतीजे को भी इस पाप में शामिल कर लिया.

    मंदिर में 8 दिन तक होता रहा गैंगरेप
    मंदिर के सेवादार और ग्राम प्रधान सांजी राम ने बच्ची के मंदिर में ही बंधक बनाकर रखा था. वहां बच्ची के साथ पूरे 8 दिन तक रेप किया गया. कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक मंदिर के प्रार्थना कक्ष में ही बच्ची से रेप होता रहा. सबसे पहले सांजी राम के भतीजे (नाबालिग) ने बच्ची के साथ दरिंदगी की. फिर वो अपने दोस्त मन्नू को भी बुला लेता है. दोनों फिर से रेप करते हैं. इसके बाद वो अपने चाचा को इसकी ख़बर देता है. सांजी राम बेहोशी की दवा मंगवाता है और मंदिर पहुंचता है. दोनों बच्ची को पीटते, रेप करते, पीटते, रेप करते पीटते और फिर रेप करते. कई बार बेहोशी की हालत में भी वो रेप करते रहे.

    गला घोंटकर हत्या, पत्थर से कुचला सिर
    इसके बाद सभी आरोपी बेहोशी की अवस्था में बच्ची को गला घोंट मार डालते हैं, फिर उसके सिर को पत्थर से कुचला जाता है. लाश जंगल में फेंक दी जाती है. चार्जशीट के तहत संजी राम, उसका बेटा विशाल, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, दो विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज और स्थानीय निवासी प्रवेश कुमार पर रेप, मर्डर और सबूत मिटाने के मामले दर्ज किए गए हैं.

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    Tags: Jammu and kashmir, Kashmir news, Kathua Rape, Kathua rape case

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