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कठुआ गैंगरेप केस: बच्ची को खाली पेट दी गई थी भांग और नशीली दवाइयां, चार्जशीट में हुआ था खुलासा

कठुआ गैंगरेप केस: बच्ची को खाली पेट दी गई थी भांग और नशीली दवाइयां, चार्जशीट में हुआ था खुलासा

पिछले साल कठुआ में एक आठ साल की बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी (सांकेतिक तस्वीर)

पिछले साल कठुआ में एक आठ साल की बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी (सांकेतिक तस्वीर)

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ हुए रेप और हत्या के मामले में पठानकोट की विशेष अदालत ने कुल 7 आरोपियों में से 6 को दोषी करार दिया है. इनमें से तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

    जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ हुए रेप और हत्या के मामले में पठानकोट की विशेष अदालत ने कुल 7 आरोपियों में से 6 को दोषी करार दिया है. जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया गया है. मास्टरमाइंड सांझी राम, प्रवेश और दीपक खजूरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. तीनों को मृत्यु तक जेल में ही रहना होगा. वहीं तीनों पुलिसकर्मियों जिन्होंने सबूत मिटाने में मदद की थी उन पर 50-50 हजार का जुर्माना और 5-5 साल की सजा सुनाई गई है.

    जनवरी, 2018 में हुए 8 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में पुलिस को आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने में चार महीने का वक्त लग गया था. इस चार्जशीट से पता चलता था कि मात्र 8 साल की बच्ची के साथ किस तरह दिल दहला देने वाला घिनौनापन किया गया था.

    बकरवाल समुदाय से घृणा के चलते बनाया था प्लान
    इस चार्जशीट के मुताबिक पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड सांझी राम को बताया गया था. बकरवाल समुदाय की इस बच्ची का अपहरण, रेप और मर्डर, इस समुदाय को इलाके से निकालने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था.

    पुलिस की चार्जशीट में रासना गांव में देवीस्थान, मंदिर के सेवादार सांझी राम को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था. 15 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया था कि सांझी राम ने इस समुदाय को गांव से बाहर निकालने के लिए यह साजिश रची थी. इसके लिए वह अपने नाबालिग भतीजे और अन्य 6 लोगों को भी उकसा रहा था.

    बकरवाल समुदाय पर गोहत्या और ड्रग्स की तस्करी में शामिल होने का भी लगाता था आरोप
    दाखिल चार्जशीट में कहा गया है कि साजिशकर्ता सांझी राम बकरवाल समुदाय के तहसील में बसने के खिलाफ था. उसने गांव के हिंदू समुदाय के लोगों को भड़काया था कि वे इस समुदाय के लोगों को बसने के लिए जमीने न दें. गांव के ज्यादातर लोग सोचने लगे थे कि यह समुदाय गोहत्या और ड्रग्स की तस्करी करता है. उनके यहां बसने से, गांव के बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा. इसके चलते कई बार बकरवाल समुदाय के लोग धमकाए भी गए थे. उन्हें धमकाने में सांझी राम और उसके साथी भी शामिल थे.

    चार्जशीट में इन्हें बनाया गया था दोषी
    चार्जशीट के मुताबिक साजिशकर्ता पुजारी सांझी राम के साथ विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया, सुरेंद्र वर्मा और उसके दोस्त परवेश कुमार उर्फ मन्नू, भतीजा राम किशोर और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा उर्फ शम्मा भी शामिल पाए गए थे.

    हत्या से पहले भी किया गया रेप
    चार्जशीट के मुताबिक क्षेत्र में दोनों समुदायों के बीच विरोध इतना बढ़ गया था कि लगातार दोनों समुदायों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई थीं. क्राइम ब्रांच के हवाले से चार्जशीट में लिखा गया था कि कठुआ में बच्ची का अपहरण करने के बाद उसे एक मंदिर में ले जाया गया और वहां उसे नशा देकर, एक सप्ताह में उसके साथ कई बार रेप किया गया. यहां तक कि जब दोषियों ने उसे मारने की बात तय कर ली, उससे पहले भी उसके साथ रेप किया. एक आरोपी ने बच्ची को मारने से पहले कहा था, रुको, पहले रेप कर लेते हैं.

    मौत सुनिश्चित करने के लिए सिर पर किए पत्थर के कई वार
    चार्जशीट से सामने आया था कि रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई. इसके अनुसार दोषियों ने उसे मारने के बाद यह सुनिश्चित करने की लिए कि वह पूरी तरह से मर गई है, उसके सिर पर कई बार पत्थर से वार किए. बाद में इन दोषियों ने पुलिसवालों को मामले को दबाने के लिए 1.5 लाख की रिश्वत भी दी.

    सप्लीमेंट्री चार्जशीट से सामने आई थीं कई बातें
    बाद में जुलाई में इस मामले में क्राइम ब्रांच ने एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दायर की थी. इसमें केस से जुड़े फॉरेंसिक लैब के टेस्ट की रिपोर्ट्स और आरोपियों की कॉल डिटेल को भी अटैच किया गया था. कॉल डिटेल से साफ पता चल रहा था कि सारे ही आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में थे.

    यह सप्लीमेंट्री चार्जशीट 624 पेजों की थी. जिसमें 129 गवाहों के बयानों को भी शामिल किया गया था. इस केस में कुल 351 गवाह थे. इन सभी के बयान रिकॉर्ड भी किए गए थे.

    बच्ची को दिया गया था नशीली दवाओं का ओवरडोज
    इस चार्जशीट में बताया गया था कि बच्ची को मुनार (स्थानीय भांग) खिलाई गई थी. कुछ नशीली दवाओं का ओवरडोज भी दिया गया था. बच्ची को पहले दिन खाली पेट एपिट्रिल दी गई थी. दूसरे दिन क्लोनाजेपम की पांच टेबलेट खिलाई गईं थी जो कि सामान्य से दस गुना ज्यादा स्ट्रांग डोज थी. मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया था कि इस ओवरडोज के चलते बच्ची को सांस लेने में परेशानी हुई और इसी के चलते वह कोमा में चली गई.

    इस चार्जशीट में इंस्पेक्टर की बैंक डीटेल और अकाउंट नंबर को भी शामिल किया गया था. सांझी राम की ओर से इंस्पेक्टर के अकाउंट में रिश्वत जमा की गई थी ताकि पूरे केस को दबाया जा सके. आरोपियों में पुजारी सांझी राम, उसके बेटे विशाल, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, दो विशेष पुलिस अधिकारियों दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज और स्थानीय नागरिक प्रवेश कुमार को शामिल किया था. इनके खिलाफ रेप, मर्डर और सबूतों को छिपाने की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.

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    Tags: Gangrape and murder, Jammu and kashmir, Kathua Rape, Kathua rape case, Pocso act

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