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कठुआ केस: जानें सोशल मीडिया पर वायरल ये दावे सच के कितने करीब हैं?

कठुआ केस: जानें सोशल मीडिया पर वायरल ये दावे सच के कितने करीब हैं?

Demo Pic.

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सोशल मीडिया पर इस केस को लेकर किए जा रहे दावे और चार्जशीट के मुताबिक अबतक सामने आया तथ्य

    जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों कई तरह की कंसपिरेसी थ्योरी गढ़ी जा रही हैं. इनमें से कुछ लोगों को यह पूरा मामला आरोपियों को फंसाने के लिए रची गई साज़िश लग रहा है, तो वहीं कुछ इस मामले में राज्य सरकार, पुलिस और मीडिया को ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. आइये सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं, सोशल मीडिया पर इस केस को लेकर किए जा रहे दावे और चार्जशीट के मुताबिक अबतक सामने आया तथ्य...

    पहला दावा- मासूम के माँ-बाप नहीं थे
    तथ्य
    असल में कठुआ की मासूम अपने माता-पिता के साथ नहीं रहती थी. उसके माता-पिता ने उसे अपने एक नि:संतान रिश्तेदार को गोद दे दिया था, लेकिन मासूम के माता-पिता ज़िन्दा हैं. NEWS18 इंडिया ने उनसे बातचीत भी की है. यानी सोशल मीडिया में ये दावा झूठ साबित हुआ.

    दूसरा दावा
    पुलिस का देवीस्थान में मासूम की हत्या और 8 दिन तक लाश मंदिर में रहने का दावा

    तथ्य
    15 पन्नों की इस चार्जशीट के सातवें पन्ने पर साफ़तौर से लिखा है कि मासूम को मौत के घाट उतारने के लिए आरोपी उसे मन्दिर के सामने एक पुलिया पर ले गए, जहां नाबालिग़ और उस वक्त वहां मौजूद एक पुलिस अफ़सर दीपक खजूरिया ने पहले उसका बलात्कार किया और फिर उसे मौत की नींद सुला दिया. पूरी चार्जशीट में कहीं पर भी ये दावा ही नहीं है कि देवीस्थान में मासूम की हत्या की गई.

    रिपोर्ट के मुताबिक, लोहड़ी की शाम नाबालिग़ ने सांजी राम को बताया कि उसने और विशाल जंगोत्रा ने मासूम के साथ देवीस्थान के अंदर गैंगरेप किया है. बाद में सांजी राम के कहने पर मनु, विशाल और नाबालिग़ मासूम को देवीस्थान से पास की एक पुलिया पर ले गए. वहां पर दीपक खजूरिया और नाबालिग़ ने मासूम का गैंगरेप किया. उसके बाद मासूम को मार डाला.

    प्लान के मुताबिक़, लाश को नहर में फेंकना था, लेकिन गाड़ी का वक़्त पर इंतज़ाम नहीं हो पाया, इसलिए लाश को ठिकाने लगाने तक आरोपियों ने उसे देवीस्थान में रखने का ही फ़ैसला किया. यानी 13 जनवरी की शाम को ही देवीस्थान के सामने एक पुलिया पर मासूम की हत्या कर दी गई थी.

    15 जनवरी 2018 को सांजी राम ने नाबालिग़ और अपने बेटे विशाल जंगोत्रा से कहा कि किशोर ने गाड़ी लाने से मना कर दिया है, इसलिए वो लाश को नहर में नहीं फेंक सकते. लिहाज़ा सांजी राम ने उनसे लाश को जंगल में ठिकाने लगाने के लिए कहा. सांजी राम ने कहा कि अगले दिन 'फन्दा' (धार्मिक अनुष्ठान) के लिए श्रद्धालु देवीस्थान आएंगे, ऐसे में बच्ची की लाश को वहां और ज्यादा रखना सुरक्षित नहीं.

    यानी 13 जनवरी को पुलिया पर मासूम की हत्या की गई, उसकी लाश को देवीस्थान में रखा गया और उसके बाद 15 जनवरी को उसकी लाश जंगल में फेंक दी गई. देवीस्थान में सिर्फ़ दो दिन तक मासूम की लाश थी, 8 दिन तक नहीं. चार्जशीट में ये भी साफ़ लिखा है कि आरोपियों ने मासूम बच्ची को देवीस्थान में ही छिपाकर रखा था. लिहाज़ा सोशल मीडिया पर वायरल ये दावा भी फ़र्ज़ी साबित हुआ.

    तीसरा दावा मासूम के दो बार पोस्टमॉर्टम हुए.पहली रिपोर्ट में रेप का ज़िक्र नहीं

    तथ्य

    क्राइम ब्रांच की 15 पन्नों की चार्जशीट में कहीं भी ये ज़िक्र ही नहीं है कि मासूम का दो बार पोस्टमॉर्टम किया गया. रिपोर्ट के पेज नंबर 9 पर साफ़तौर पर लिखा है कि 17 जनवरी 2018 को कठुआ के ज़िला अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने मासूम का पोस्टमॉर्टम किया था.

    देवीस्थान से मिले बाल और जंगल में मासूम की लाश मिलने वाली जगह से बरामद हुए बालों का आपस में मिलान हो गया, जिससे साफ़ हुआ कि मासूम को देवीस्थान में रखा गया था.

    चार्जशीट के मुताबिक, पुलिस सब इंस्पेक्टर दत्ता और तिलक राज ने सबूतों को मिटाने की पूरी कोशिश की थी. उन्होंने मासूम के कपड़े भी धो दिए थे. श्रीनगर FSL धुले हुए कपड़ों की जांच के आधार पर कोई टिप्पणी नहीं कर पा रही थी, लिहाज आगे की जांच के लिए बच्ची के कपड़े और विसेरा सैंपल दिल्ली की फॉरेंसिंक लैबोरेटरी भेजा गया. यह लैब बेहद उच्च तकनीक से लैस है और इसने जांच में बताया कि मासूम के कपड़ों पर ख़ून के धब्बे थे, जो कि मासूम के DNA से मेल खाते थे.

    विशेषज्ञों के मुताबिक़, मासूम के अंदरूनी हिस्सों में चोट भी पाई गई. मेडिकल एक्सपर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़, पहली नज़र में ऐसा ही लगता है कि मासूम की हत्या करने से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था. जांच में ये भी ख़ुलासा हुआ है कि मासूम का एक से ज़्यादा आरोपियों ने बलात्कार किया था. यानी चार्जशीट के मुताबिक सभी सबूतों और एफएसएल की जांच के मुताबिक बलात्कार हुआ था.

    सोशल मीडिया पर जो दो पोस्टमॉर्टम होने की अफ़वाह फैलाई जा रही है, वो दरअसल दो फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में हुई जांच हैं. चूंकि मासूम के कपड़े धो दिए गए थे, इसलिए जम्मू FSL मामले पर कोई मत नहीं दे पा रही थी. लिहाज़ा क्राइम ब्रांच ने सबूतों की जांच के लिए दिल्ली FSL की मदद ली थी और दिल्ली FSL की रिपोर्ट में ये पुष्टि हुई है कि बच्ची के यौन अंगों में चोट पाई गई है जिससे लगता है कि उसका बलात्कार हुआ था.

    चौथा दावा चार्जशीट में देवीस्थान के तहख़ाने में बलात्कार की बात

    तथ्य
    उपदेश राणा ने नाम के एक शख़्स ने सोशल मीडिया पर एक अलग ही दावा कर डाला है. इनका कहना है कि चार्जशीट में ये दावा है कि मासूम के साथ देवीस्थान के तहख़ाने में बलात्कार हुआ.कठुआ में जिस मन्दिर को बदनाम कर रहे हैं, उसकी सच्चाई भी जान लीजिये.

    NEWS18 इंडिया जब मामले की पड़ताल के लिए कठुआ पहुंचा था, देवीस्थान में ऐसा कोई कोई तहख़ाना नहीं था. क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में भी कहीं भी देवीस्थान में तहख़ाना होने का दावा है ही नहीं. चार्जशीट में साफ़तौर पर लिखा है. मासूम को देवीस्थान में बंधक बनाकर रखा गया था और देवीस्थान की देखरेख सिर्फ़ सांझी राम के ज़िम्मे थी. सांझी राम की जानकारी के बिना यहां किसी और शख़्स की मौजूदगी मुमकिन नहीं थी.

    साफ़ है कि चार्जशीट को गलत साबित करने के इरादे से तहखाना होने का झूठ फैलाया जा रहा है. वायरल वीडियो का ये भी फ़र्ज़ी दावा कर रहा है कि देवीस्थान की 3 चाबियां, आस-पास के लोगों के पास थीं, क्योंकि चार्जशीट के मुताबिक़ देवीस्थान की रखवाली सिर्फ़ और सिर्फ़ सांझी राम के हाथ में थी.

    पांचवां दावा बच्ची को दरी से ढककर कैसे रखा जा सकता है?

    तथ्य
    क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के पेज नंबर 5 पर लिखा है 10 जनवरी 2018 नाबालिग़ आरोपी और मन्नु बेहोश बच्ची को देवीस्थान में ले गए और उसे टेबल के नीचे रख दिया और फिर ऊपर से दरी डालकर उसे ढंक दिया. इसके बाद नाबालिग़ और मनु देवीस्थान में ताला लगाकर चले गए. अगले दिन दोपहर 12 बजे विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और नाबालिग़ देवीस्थान गए.

    दीपक खजूरिया ने नशे की गोलियों का पत्ता निकाला, बच्ची का मुंह खोला और दो गोलियां उसके मुंह में डाल दीं. शाम को क़रीब 5 बजे नाबालिग़ दोबारा से देवीस्थान गया. उसने मासूम को चेक किया. बच्ची बेहोश थी.

    13 जनवरी 2018 की सुबह विशाल जंगोत्रा और नाबालिग़ ने बच्ची का बलात्कार किया. इसके बाद नाबालिग़ ने नशे की 3 गोलियां बच्ची को खिला दीं और उसे फिर से दरी से ढक दिया और उसके आगे एक बर्तन रख दिया ताकि वो छुप जाए. जाँच के दौरान, नशे की गोलियों का पत्ता देवीस्थान के पास बरामद हुआ है.

    चार्जशीट के पेज नंबर 13 पर ये लिखा है कि मेडिकल रिपोर्ट से ये साबित हुआ है कि बच्ची को खाना नहीं खिलाया गया और उसे नशे की दवा दी गई. यानी कि बेहोश बच्ची को देवीस्थान में रखा गया उसे बार-बार नशे की गोलियां खिलाई गईं. अब जब बच्ची बेहोश ही है, तो ज़ाहिर है कि उसने कोई आहट भी नहीं की होगी और चूंकि उसे दरियों और बर्तन से ढका गया था तो देवीस्थान में आने वाले लोगों को उसकी मौजूदगी का कोई शक भी नहीं हुआ.

    कठुआ को लेकर राजनीति भी गर्म है और इसके लिए कुछ लोग सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर हो रहे उलूल-जुलूल दावों को मानने से पहले सतर्क रहें.

    पढ़ें- कठुआ केस: बच्ची से रेप न होने की खबर पूरी तरह गलत- पुलिस

    Tags: Kathua Rape

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