ग्राउंड रिपोर्टः कठुआ गैंगरेप-मर्डर पर क्या कहते हैं ग्रामीण, कौन सही-कौन गलत

सच सिर्फ इतना है कि वह 8 साल की थी, फूलों वाली प्रिंट की फ्रॉक पहनती थी, उसे नशीली दवाएं दी गईं, उसका गैंगरेप किया गया और सिर्फ इसलिए उसकी हत्या कर दी गई क्योंकि कुछ लोग एक समुदाय को सबक सिखाना चाहते थे.

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Updated: April 17, 2018, 8:04 PM IST
ग्राउंड रिपोर्टः कठुआ गैंगरेप-मर्डर पर क्या कहते हैं ग्रामीण, कौन सही-कौन गलत
प्रतीकात्मक फोटो
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Updated: April 17, 2018, 8:04 PM IST
शेख सालिक

पड़ोसी बताते हैं कि वह हमेशा फ्लोरल प्रिंट की फ्रॉक पहना करती थी, उसकी गहरी भूरी आंखें और काले घने बाल उसे पड़ोसियों की फेवरिट बनाते थे. पड़ोसियों में से एक कहते हैं, 'वह बेहद प्यारी बच्ची थी.'

रासना में उसे हर कोई जानता था. कठुआ के हीरा नगर से लगे इस गांव तक ऊबड़-खाबड़ और धूल भरी सड़कों से होकर ही पहुंचा जा सकता है. वह यहां की पतली गलियों में अपने घोड़ों के साथ अक्सर दिखती थी, उन्हें चराने के लिए वह पास के जंगल में लेकर जाती थी. वहां वह अपना पूरा दिन गुजारती थी, उसे क्या मालूम था कि वहां किसी दिन उसके साथ इतना बुरा होने वाला है.

शाम को वह गांव की उन्हीं गलियों से गुजरती हुई घर लौटती थी. गांव की गलियां अक्सर खाली ही रहती थीं क्योंकि गांव के पुरुष काम के लिए बाहर चले जाते थे और महिलाएं घर के कामों में व्यस्त होती थीं.

अब गांव के बाहर टीवी चैनलों के ओबी वैन खड़े दिखते हैं. उसी फ्रॉक पहनने वाली 8 साल की लड़की के बलात्कार और हत्या के बाद यह गांव देश-दुनिया की नजर में आ गया है.

आज गांव के एक छोर पर स्थित उसका छोटा सा घर खाली पड़ा है. यहां सर्दियों में उसका परिवार रहने आता था. घर तक पहुंचने वाली पगडंडियां झाड़ियों से पटी हुई हैं. जब गांव में ओबी वैन आने लगीं तो परिवार ने अपना सामान बांधा और उन्ही पगडंडियों से गुजरते हुए गांव छोड़कर चला गया. बच्ची के साथ हुए हादसे से घबराए पड़ोसियों ने उन्हें गांव छोड़ने से नहीं रोका. एक ग्रामीण कहते हैं, “अच्छा हुआ जो वह परिवार यहां से चला गया.”

सर्दियों में इस घर में रहता है पीड़ित बच्ची का परिवार (फोटो- शेख सालिक)


तीन महीने पहले इस गांव में एक विभत्स घटना हुई है. बच्ची का किडनैप किया गया, उसे एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया, उसे नशीली दवाएं दी गईं, कई दिनों तक उसके साथ गैंगरेप किया गया और आखिर में उसे मार दिया गया. हत्या के बाद उसका शव गांव से कुछ सौ मीटर दूर फेंक दिया गया.

बच्ची के गायब होने के बाद उसके परिवार ने उसकी काफी तलाश की और आखिर में उसकी लाश उन्हें जंगल में मिली. गांव में इस घटना को लेकर तनाव स्पष्ट देखा जा सकता है.

पुलिस की एक टीम जांच के लिए भेजी गई. उनमें से ज्यादातर लोग आसपास के इलाकों से थे, उन्हें रासना के लोग अच्छे से जानते थे. संभवतः मामले को दबाने की भी कोशिश की गई और दबी जुबान से लोग मामला सेटल होने को लेकर चर्चा भी करने लगे थे.

ऐसा लगभग हो भी गया था.
त्रिप्ता देवी ने जब तिलक राज को देखा तो एक बार में ही वह उन्हें पहचान गई. दोनों स्कूल में साथ में पढ़े थे. अब पुलिस अधिकारी बन चुके राज उस गैंगरेप और मर्डर की जांच कर रहे थे जिसमें त्रिप्ता देवी के बेटे शुभम सांगरा और भाई सांझी राम मुख्य आरोपी हैं. इसके बाद मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हुईं. सांझी राम के कहने पर त्रिप्ता देवी ने तिलक राज को 1.5 लाख रुपये दिए. इसके बाद के दिनों में कथित तौर पर झा नाम के एक पुलिस वाले को भी रुपये दिए गए ताकि सांझी राम और शुभम को परेशान न किया जाए.


क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम ने जो चार्जशीट दाखिल की है उसके मुताबिक सांगरा ने बच्ची के साथ बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी. यह सब सांझी राम की जानकारी और सहयोग से हुआ.

इससे पहले इस मामले की जांच में जुटे एक और पुलिस अधिकारी का नाम भी इस मामले में सामने आया.

स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया ने कथित तौर पर बच्ची के साथ गैंगरेप और उसकी हत्या की साजिश रची. वह पहला व्यक्ति था जिसने शुभम को बच्ची का अपहरण करने के लिए उकसाया और फिर हत्या से ठीक पहले बच्ची का रेप किया.

यानी खजूरिया उस अपराध की जांच कर रहा था जिसमें कथित तौर पर वह भी शामिल था. हालांकि मामले को दबाने की सारी कोशिशें तब नाकाम हुईं जब बच्ची की लाश मिलने के 6 दिन बाद 23 जनवरी को मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया.

क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने से पहले पुलिस अधिकारी तिलक राज और आनंद दत्ता ने बच्ची के खून और कीचड़ से सने कपड़े कथित तौर पर साफ किये थे. इसके बाद क्राइम ब्रांच ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

क्राइम ब्रांच की एसआईटी को जब अपराध में एसपीओ दीपक खजूरिया उर्फ दीपू (28) के शामिल होने के सबूत मिले तो उसे गिरफ्तार किया गया. इसके बाद एक-एक कर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई. जांच के दौरान नाम सामने आने के बाद सांझी राम फरार चल रहा था, उसने बाद में समर्पण कर दिया. सांझी राम के बेटे को राज्य के बाहर से गिरफ्तार किया गया.

जब क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट फाइल की और घटना की विभत्स जानकारी सामने आई तो गांव दो अलग-अलग हिस्सों में बंट गया. एक जो इस बात पर यकीन करता है कि बाहरी लोग गांव की इज्जत खराब करने की साजिश रच रहे हैं. वहीं दूसरे पक्ष में गुज्जर और बकरवाल थे, बच्ची बकरवाल समुदाय से थी. इस पक्ष को लगता है कि बच्ची अल्पसंख्यक समुदाय से थी इसलिए उसके साथ ऐसी हरकत की गई.

क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में गुज्जर और बकरवालों के पक्ष की पुष्टि की गई. बच्ची के साथ रेप और बाद में उसकी हत्या इसलिए की गई क्योंकि मुख्य आरोपी सांझी राम गुज्जरों को डरा कर इलाके से भगाना चाहता था. हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपियों को गलत तरीके से फंसाया गया है.

ग्रामीणों की राय में इतना अधिक अंतर होना अपने आप में विचित्र है.

आरोपी विशाल जंगोत्रा के नाना बीशेंद्र शर्मा को तो इस बात पर भी यकीन नहीं है कि बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है. तीन दिन पहले जब हमारे रिपोर्टर उनसे मिले तो वह यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि बच्ची के साथ गैंगरेप किया जा सकता है. बल्कि वह कुछ कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज पर बात करते हैं कैसे यह उनके समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए यह कश्मीरी मुस्लिमों की एक साजिश हो सकती है.

जिस देविस्थान में बच्ची को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, 14 अप्रैल को शर्मा उसी देविस्थान के पास बैठे दिखे. उन्होंने इस मुद्दे पर बात की.

इस देविस्थान में बच्ची को बनाया गया था बंधक (फोटो- शेख सालिक)


शर्मा ने सवाल किया, “एक आठ साल की बच्ची से इतने लोग कैसे गैंगरेप कर सकते हैं?”

उनकी विचित्र बातें यहीं नहीं रुकी. इसके बाद उन्होंने बलात्कार होने की संभावना से ही इनकार कर दिया. वह पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं, “बलात्कार हुआ ही नहीं. आप मुझे फॉरेंसिक रिपोर्ट दिखाइये जिसमें लिखा है कि रेप हुआ है."


हालांकि उनके दावों का कोई आधार नहीं है क्योंकि चार्जशीट में यह साबित हो चुका है कि बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है और सिर्फ एक बार नहीं कई बार. चार्जशीट में लिखा है कि बच्ची की डीएनए प्रोफाइलिंग, एफएसएल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम से साफ है कि उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया.

वहीं शर्मा यह भी कहते हैं कि हो सकता है कि बच्ची के अपने समुदाय के लोगों ने उसके साथ बलात्कर किया हो. इसके बाद वह देविस्थान का दरवाजा खोलते हैं. यह एक कमरे का मंदिर है. यहां के गर्भगृह में राजा मंडलीक, बाबा सुरगल और बाबा कलिवीर जैसे कुलदेवता रखे गए हैं, इन कुल देवताओं का जम्मू के डोगरा समुदाय में खास महत्व है.

गर्भगृह के पीछे सामुदायिक बर्तन रखे गए हैं, सामने की तरफ दो कोनों पर कुछ टेबल रखे हैं और बीच में एक प्लास्टिक की चटाई बिछी हुई है.

शर्मा कहते हैं, “यहां कैसे किसी को लंबे समय तक बंधक बनाकर रखा जा सकता है? चार चाबियां है जिन्हें गांव के अलग-अलग घरों में रखा जाता है और उनकी मदद से देविस्थान के तीन दरवाजे खुलते हैं. लोग यहां आते जाते रहते हैं. तीन खिड़कियां हैं. कोई भी अंदर देख सकता है. किसी को यहां रखकर उसका रेप करना किसी के लिए संभव ही नहीं है.”

रासना और आसपास के कई गांवों के लोग कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और वे इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह की दलीलें दे रहे हैं.

वहीं दूसरी तरफ हीरा नगर-जम्मू हाईवे पर सांझी राम का परिवार एक पेड़ के नीचे धरने पर बैठा है. उनकी मांग है कि मामले की जांच किसी भरोसेमंद एजेंसी से करवाई जाए. भूख हड़ताल पर बैठे लोग एक स्वर में कहते हैं, “हम क्राइम ब्रांच की जांच को स्वीकार नहीं करते हैं क्योंकि यह जांच कश्मीरी मुस्लिमों ने की है.”

वे क्राइम ब्रांच की जांच पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि कैसे एक पिता अपने बेटे से कह सकता है कि वह एक नाबालिग बच्ची का बलात्कार करे. सांझी राम की एक बेटी ने कहा, “यह शर्मनाक है, कोई कैसे कह सकता है कि एक बुजुर्ग आदमी ने अपने बेटे और भतीजे से एक लड़की का बलात्कार करने के लिए कहा होगा. ऐसा कौन करता है?"


इस गांव के ज्यादातर लोगों को इस बात पर यकीन नहीं है कि जिन लोगों को क्राइम ब्रांच ने आरोपी बनाया है वे इस अपराध में शामिल हो सकते हैं. इस मामले के ज्यादातर आरोपी भूख हड़ताल में शामिल लोगों के करीबी रिश्तेदार हैं.

हालांकि गांव में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दबी जुबान से यह स्वीकार करते हैं कि अपराध में इन आरोपियों का हाथ हो सकता है. गैंगरेप और हत्या में शामिल एक नाबालिग के एक दोस्त को भी ऐसा लगता है. वह दूसरे गांव में रहता है, उसने कहा, “वह नशा करता था.” उसने बताया कि कुछ महीनों पहले एक लड़की को लेकर आरोपी नाबालिग की एक लड़के से लड़ाई हो गई थी जिसके बाद उसे स्कूल से निकाल दिया गया था.

दोस्त ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा, “मुझे नहीं पता कि उसने उस लड़की का बलात्कार किया है या नहीं लेकिन वह हमेशा कहता था कि वह गुज्जरों से नफरत करता है और उन्हें सबक सिखाना चाहिए.”

नाबालिग के दोस्तों में सभी को यह पता था कि उसे गुज्जरों से नफरत है. पिछले साल उसने एक गुज्जर से लड़ाई की थी क्योंकि गुज्जर ने अपने समुदाय के लिए मस्जिद बनवाया था. लड़के ने लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर लड़ाई की थी, लेकिन गुज्जरों ने कथित तौर पर उसकी पिटाई कर दी थी. उसके दोस्त ने कहा, “इसके बाद ही वह कहने लगा था कि कुछ करना पड़ेगा नहीं तो गुज्जर पूरे कठुआ में फैल जाएंगे.”

इस झगड़े के बाद ही नाबालिग की मां ने उसे सांझी राम के साथ रहने के लिए रासना भेजा था. नाबालिग की मां ने कहा कि उसका बेटा अभी बच्चा है और वह ऐसा नहीं कर सकता है. उसकी मां ने कहा, “वह सिर्फ 15 साल का है. वह बच्चों की तरह सोचता और काम करता है. आप मुझसे कह रहे हैं कि एक बच्चा किसी का बलात्कार कर सकता है?” हालांकि परिवार का दावा कि वह 15 साल का है संदेह के घेरे में है. डीएनए रिपोर्ट के मुताबिक उसकी उम्र 19 साल से अधिक है.

घटना को नकारने की कोशिश यहीं नहीं रुकी.

चार्जशीट के मुताबिक मुख्य आरोपी सांझी रामा का बेटा विशाल जंगोत्रा ने भी बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी लाश को ठिकाने लगाने में मदद की. मेरठ में बीएससी फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहे विशाल को कथित तौर पर नाबालिग आरोपी ने फोन करके बच्ची के रेप के लिए कठुआ बुलाया था. हालांकि उसके परिवार का दावा है कि विशाल उस वक्त मेरठ में परीक्षा दे रहा था.


विशाल की मां दर्शना देवी ने कहा, “उसकी मेरठ की टिकट, परीक्षा में उसकी उपस्थिति और उसकी आंसर शीट कोई भी देख सकता है. जब वह हजारों किलोमीटर दूर था तो वह क्राइम में शामिल कैसे हो सकता है?”

हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में आयोजित इस परीक्षा में विशाल और उसके तीन दोस्त शामिल नहीं हुए थे. परीक्षा केंद्र से क्राइम ब्रांच को जो सीसीटीवी फुटेज मिली है उससे यह साफ होता है कि परीक्षा में चारों शामिल नहीं हुए थे बल्कि उनकी जगह कोई और पेपर देने पहुंचा था.

जब परिवार को यह बताया गया तो उन्होंने कहा, “सीसीटीवी वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है. हिंदू लड़कों को बलात्कारी साबित करने के लिए महबूबा मुफ्ती कुछ भी कर सकती है.”

इस घटना के सभी आरोपियों में एक चीज कॉमन है कि वे गुज्जर समुदाय से नफरत करते हैं. एसपीओ दीपक खजूरिया की कहानी इस पर अधिक रोशनी डाल सकती है कि अपराध की योजना कैसे तैयार की गई और ग्रामीणों ने कैसे पूरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास किया.

पीड़ित बच्ची के पिता और खजूरिया की जमीनें आपस में जुड़ी हुई हैं. स्थानीय लोग कहते हैं कुछ समय पहले दोनों के बीच जमीन को लेकर विवाद भी हुआ था और खजूरिया ने बच्ची के पिता को सबक सिखाने की कसम खाई थी.

खजूरिया के पिता भी पुलिस में थे. खजूरिया को रासना और आसपास के गांवों के लोग लंबी घुमावदार मूंछों और रॉयल एनफील्ड के लिए जानते हैं. धुमियाल गांव के एक ग्रामीण ने बताया,“लोग उससे डरते थे.”

खजूरिया के हीरा नगर में रहने वाले एक दोस्त ने कहा कि वह क्रिमिनल माइंडेड है. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि पुलिस में उसकी नौकरी कैसे लग गई. वह हमारे ग्रुप का सबसे बदमाश लड़का था. उसे गुज्जर बिलकुल पसंद नहीं थे.”

चार्जशीट के मुताबिक अपराध में खजूरिया की भूमिका सबसे बर्बर है. उसने बच्ची की हत्या से ठीक पहले उसका बलात्कार किया. खजूरिया ने ही बच्ची को नशीली दवाएं खिलाने की योजना बनाई थी. पिछले साल दिसंबर में खजूरिया की सगाई हुई थी, दोनों की 26 अप्रैल को शादी होने वाली थी. हालांकि अब वह जेल में है तो संभवतः फिलहाल शादी नहीं होगी.


खजूरिया की मंगेतर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि सच क्या है. सीबीआई जांच से ही पूरा सच सामने आएगा. मुझे नहीं लगता कि वह ऐसा कर सकते हैं.” हालांकि 26 वर्षीय यह युवती कहती है कि वह खजूरिया से मिलना चाहती है ताकि उससे पूछ सके कि उसने ऐसा किया है या नहीं. उसने कहा, “लेकिन पता नहीं क्यों वो लोग (खजूरिया का परिवार) मुझे उससे मिलने नहीं देते हैं?”

खजूरिया की मां कहती हैं, “वह उससे मिलने जेल नहीं जा सकती है. उसे वहां जाने की जरूरत नहीं है.”

हालांकि इस भयावह घटना का केंद्र बिंदू सांझी राम है. एक रिटायर्ड राजस्व अधिकारी जिससे रासना के लोग डरते हैं. वह देविस्थान का केयर टेकर भी है. यह सबको पता है कि उसे बकरवाल समुदाय से नफरत है और वह उन्हें इलाके से भगाने के लिए कुछ भी कर सकता है. पास के कुटा गांव के एक निवासी ने बताया, “उन्होंने सबको सख्त हिदायत दी थी कि गुज्जरों और बकरवालों को जानवर चराने के लिए कोई भी अपनी जमीन नहीं देगा.”

ग्रामीण ने कहा, “वह क्षेत्र में गुज्जरों और बकरवालों के बसने के खिलाफ लगातार प्रचार कर रहे थे.” हालांकि सांझी राम और अन्य आरोपियों के परिवार दूसरी तरह से सोचते हैं. परिवार के एक सदस्य ने कहा, “जो बताया जा रहा है सच उससे अलग है. गुज्जर ही मामा के साथ लड़ाई करते थे.”

वहीं गुज्जर और बकरवाल समुदाय के लोग सांझी राम को एक गुंडा समझते हैं. गुज्जर और बकरवाल समुदाय के एक सामाजिक कार्यकर्ता और केस को सामने लाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले तालिब हुसैन बताते हैं, “मुस्लिम सांझी राम के नाम से ही डरते थे. वह बकरवाल महिलाओं के साथ भी गलत व्यवहार करता था.”

धुमियाल, कुटा और मैला गांव के सात ग्रामीण तालिब की बात से सहमत हैं. धुमियाल की एक बकरवाल महिला ने बताया कि पहले भी गुज्जर और बकरवाल महिलाओं के साथ सांझी ने गलत व्यवहार किया था. महिला ने कहा, “वह (सांझी राम) हमें घूरता था, हम पर फब्तियां कसता था और कई बार बिना किसी वजह के हमें गालियां भी देता था.”

हालांकि सांझी राम का नाम इस मामले से मुख्य रूप से पुलिसवालों को घूस देने की वजह से जुड़ा. ज्यादातर ग्रामीण इस तरफ ध्यान नहीं देते हैं. बच्ची से रेप और मर्डर की घटना सामने आने के बाद सांझी राम ने कथित तौर पर हीरा नगर पुलिस थाने के सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को करीब 6 लाख रुपये घूस देने की कोशिश की.

सूत्रों के मुताबिक सांझी राम ने जांच के दौरान अपने अकाउंट से करीब 10 लाख रुपये निकाले हैं. वहीं अपने छिपने के बाद 6 लाख रुपये उसने कहीं छिपाकर रख दिए हैं. जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “उसने पुलिस वाले को इंस्टॉलमेंट में घूस देने की योजना बनाई थी और अन्य लोगों को घूस देने के लिए उसने अपने पास कुछ पैसे भी रखे थे.”

एक तरफ जहां आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग तेज हो रही है वहीं दूसरी तरफ रासना और आसपास के गांवों के लोग यही कह रहे हैं कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है. एक ग्रामीण ने कहा, “हमने कुछ भी नहीं देखा. गांव में कुछ भी नहीं हुआ.”

ऐसा लगता है कि पूरे गांव ने 8 साल की बच्ची से रेप और उसकी हत्या की घटना से अपनी आंखें फेर ली हो. सच सिर्फ इतना है कि वह 8 साल की थी, फूलों वाली प्रिंट की फ्रॉक पहनती थी, उसे नशीली दवाएं दी गईं, उसका गैंगरेप किया गया और सिर्फ इसलिए उसकी हत्या कर दी गई क्योंकि कुछ लोग एक समुदाय को सबक सिखाना चाहते थे.

(Translated By- Kusum Lata)
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