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केदारनाथ : यात्रा शुरू होने से पहले क्यों खड़े हो रहे हैं श्रद्धालुओं के लिए मुश्किलों के पहाड़

News18India
Updated: April 25, 2019, 7:33 PM IST

केदारनाथ की पहाड़ियां अभी तक बर्फ़ से लदी हैं और मंदिर के आसपास जमी कई फ़ीट मोटी बर्फ़ की चादर अब सरकारी एजेंसियों को डराने लगी है.

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  • Last Updated: April 25, 2019, 7:33 PM IST
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देश के अलग अलग शहरों से केदारनाथ की यात्रा शुरु होने में केवल 10 दिन का वक़्त बचा है. लेकिन इस बार केदारनाथ यात्रा में मौसम की वजह से यात्रियों को भारी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.

केदारनाथ की पहाड़ियां अभी तक बर्फ़ से लदी हैं और मंदिर के आसपास जमी कई फ़ीट मोटी बर्फ़ की चादर अब सरकारी एजेंसियों को डराने लगी है.

न्यूज 18 इंडिया की रिपोर्ट की मुताबिक धाम बर्फ़ से पूरी तरह ढका हुआ है. हालांकि पहाड़ियों पर बर्फ़ तो हमेशा ही जमी रहती है, लेकिन इस बार बर्फ़ इतनी है कि रास्ते दिखाई तक नहीं दे रहे.

सरकारी अधिकारियों की टीमें केदारनाथ के धाम के पास रास्ते खोलने में लगी हुई हैं. उत्तराखंड में केदारनाथ धाम की यात्रा इस बार श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल भरी हो सकती है क्योंकि केदारनाथ की पहाड़ियाँ अभी तक बर्फ़ से लदी हैं और मंदिर के आसपास जमी कई फ़ीट मोटी बर्फ़ की चादर अब सरकारी एजेंसियों को डराने लगी है.

कैसी चल रही है केदारनाथ यात्रा की तैयारी

न्यूज़ 18 केदारनाथ यात्रा की तैयारियां दिखाने के लिए ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचने वाला पहला न्यूज़ चैनल है. हमने वहां देखा की सरकारी अधिकारियों की टीमें केदारनाथ के धाम के पास रास्ते खोलने में लगी हुई हैं.

फावड़े हाथ में लेकर मज़दूर बर्फ़ हटाने में पूरी ताक़त से लगे हैं. कई फ़ीट तक बर्फ़ को हटाने के बाद भी रास्ते दिखाई नहीं देते. मौसम ने इस बार ऐसी करवट ली कि जनवरी और फरवरी ही नहीं, बल्कि अप्रैल के महीने में भी आसमान से खूब बर्फ़ गिरी. ग्लेशियर यानी बर्फ़ के बड़े बड़े टुकड़े अब तक रास्तों पर मौजूद हैं.पैदल यात्रियों को करना पड़ सकता है मुश्किलों का सामना

यात्रियों के ठहरने के लिए टेंट बनाने का काम भी यात्रा शुरू होने से पहले पूरा करना है. हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले ये तमाम तैयारियां पूरी कर ली जाती हैं. लेकिन इस बार सरकारी एजेंसियां उम्मीद कर रही हैं कि तापमान बढ़े और बर्फ़ के बड़े बड़े टुकड़े ख़ुद ही पिघल जाएं.

केदानाथ के कपाट खुलने से पहले एजेंसियों को केवल पैदल यात्रा का रास्ता ही तैयार नहीं करना, बल्कि यात्रियों के लिए कई तरह की सुविधाएं भी तैयार करनी हैं. परेशानी ये है कि अब यात्रा शुरू होने में ज़्यादा वक़्त बाक़ी नहीं बचा है. 10 दिन का वक़्त तो बर्फ़ को हटाने के लिए भी नाकाफ़ी लग रहा है.

यात्रियों के ठहरने के लिए टेंट बनाने का काम भी यात्रा शुरू होने से पहले पूरा करना है. हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले ये तमाम तैयारियाँ पूरी कर ली जाती हैं लेकिन इस बार सरकारी एजेंसियां उम्मीद कर रही हैं कि तापमान बढ़े और बर्फ़ के बड़े बड़े टुकड़े ख़ुद ही पिघल जाएं.

मौसम विभाग के अनुमान से भी ज़्यादा बर्फ़बारी हुई इस बार
उत्तराखंड सरकार के कई महकमे एक साथ यात्रा की तैयारियों में लगे हुए हैं. अफ़सरों की कई टीमें केदारनाथ के धाम के पास मौजूद हैं और हालात पर नज़र रख रही हैं. लेकिन अभी तक हालत ऐसी है कि सालों पुराने बोर्ड ही रास्तों की पहचान का सहारा बने हुए हैं. इतनी बर्फ़ के बीच कुछ घंटे गुज़ारना भी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन सैकड़ों मज़दूर लगातार काम करके नए रास्ते बनाने में जुटे हैं. सबसे ज़्यादा परेशानी पैदल यात्रियों के रास्ते खोलने में हो रही है क्योंकि इस बार मौसम विभाग के अनुमान से भी ज़्यादा बर्फ़बारी हुई.

सबसे ज़्यादा परेशानी पैदल यात्रियों के रास्ते खोलने में हो रही है क्योंकि इस बार मौसम विभाग के अनुमान से भी ज़्यादा बर्फ़बारी हुई. बर्फ़बारी ने पिछले 11 साल की रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिसकी वजह से सरकार की सारी तैयारियां फेल दिख रही हैं. कई जगहों पर 30 फ़ीट तक, यानी सामान्य इमारतों की क़रीब ढाई मंज़िल जितनी ऊंचाई तक बर्फ़ जमी है.

माना जा रहा है कि उत्तराखंड सरकार इस बार केदारनाथ पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या को सीमित कर देगी. केदारनाथ के कपाट 9 मई को खोले जाएंगे, जिसमें दो हफ़्ते का ही वक़्त बाक़ी रह गया है. देश की अलग अलग जगहों से 4 मई को ही केदारनाथ के लिए यात्रा शुरू हो जाएगी.

 

 

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First published: April 25, 2019, 7:07 PM IST
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